Rajasthani Language Idioms and Phrases

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यहां आप राजस्थानी भाषा के मुहावरे और लोकोक्तियां पढ या लिख सकते हैं

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Contents

अ-अः

  • अकल बिना ऊंट उभाणा फिरैं ।
  • अक्खा रोहण बायरी, राखी सरबन न होय । पो ही मूल न होय तो, म्ही दूलन्ती जोय ।।
  • अगम् बुद्धी बाणियो पिच्छम् बुद्धी जाट । तुर्त बुद्धी तुरकड़ो, बामण सपनपाट ।।
  • अग्रे अग्रे ब्राह्मणा, नदी नाला बरजन्ते ।
  • अगस्त ऊगा, मेह पूगा ।
  • अटक्यो बोरो उधार दे ।
  • अठे किसा काचर खाय है
  • अदपढ़ी विद्या धुवै चिन्त्या धुवे सरीर
  • अनहोणी होणी नहीं, होणी होय सो होय
  • अभागियो टाबर त्युंहार नै रूसै ।
  • अम्बर कै थेगळी कोनी लागै ।
  • अम्मर को तारो हाथ सै कोनी टूटै ।
  • अम्मर पीळो में सीळो ।
  • अमरो तो मैं मरतो देख्यो, भाजत देख्यो सूरो । चोधर तो मैं खुसती देखी, लाछ बुहारी कूडो ।। आगै हूँ पाछो भलो, नांव भलो लैटूरो ।।। (देखें - नाम में क्या रखा है)
  • अय्याँ ही रांडा रोळा करसी अर अय्याँ ही पावणा जिमबो करसी ।
  • अरड़ावतां ऊँट लदै ।
  • अरजन जसा ही फरजन ।
  • अल्ला अल्ला खैर सल्ला ।
  • असलेखा बूठां, बैदां घरे बधावणा । अर्थ - असलेखा नक्षत्र में वर्षा हो तो बैद-हकीमों के घर बधाई बँटे, मतलब रोग बढ़ते हैं ।
  • असवार तो को थी ना पण ठाडां करदी - किस्सा यों है कि एक औरत को एक डाकू जबरदस्ती उठा कर ले जा रहा था. ऊँट तेजी से दोड़ रहा था. रास्ते में उस औरत का एक परिचित मिल गया. उसने पूछा, 'आरी तू ऐसी सवार कब से हो गयी जो ऊँट को इतने जोरों से भगा रही है ?' तब उसने उत्तर में ऊपर की कहावत कही जिसका अर्थ है कि मैं सवार तो नही थी, जबर्दस्तों ने मुझे सवार बना दिया ।
  • असाई म्हे असाई म्हारा सगा, बां कै टोपी न म्हारे झगा ।
  • असी रातां का अस्सा ही तड़का ।
  • असो भगवान्यू भोळो कोनी जको भूखो भैसां में जाय ।
  • अस्सी बरस पूरा हुया तो भी मन फेरां में रह्या ।
  • आंध्यां की माखी राम उडावै ।
  • आलकसण ने रोट्याँ रो साग ।
  • आठ फिरंगी नो गोरा लड़ें जाट के दो छोरा ।
  • आसोजां का पड्या तावडा जोगी बणग्या जाट ।
  • उधार दियोड़ो आवै घर लेखै, नींतर हर लेखै ।
  • ऊन'रै को जायेड़ो बिल ही खोदै ।
  • अछूकाळ कादा में पीवै ।
  • आदर खादर बाजे बाव , झूंपङ पङिया झोला खाय ।
  • आँख कान को च्यार आंगळ को फरक है ।
  • आंख गयी संसार गयो, कान गया हँकार गयो ।
  • आँख फड़कै दहणी, लात घमूका सहणी ।
  • आँख फड़कै बांई, के बीर मिलै के सांई ।
  • आँख फुड़ाई मूंड मुन्डायो, घर को फेरयो द्वार । दोन्यू बोई रै बूबना, आदेश न जुहार ।।
  • आँख मीच्यां अंधेरो होय ।
  • आंख्याँ देखी परसराम, कदे न झूठी होय ।
  • आंख्याँ में गीड पड़ै, नांव मिरगानैणी ।
  • आंख्याँ सै आन्धो, नांव नैनसुख ।
  • आंगल्याँ सूं नूं परै कोनी हुवे ।
  • आंधा की गफ्फी, बहरा को बटको । राम छुटावै तो छूटै नहीं सिर ही पटको ।।
  • आंधा सुसरा सैं क्यांकी लाज ।
  • आंधी आई ही कोनी, सूंसाट पैली ही माचगो ।
  • आंधी भैंस बरू में चरै ।
  • आई ही छाय ने, घर की धिराणी बन बैठी ।
  • आक को कीड़ो आक में, ढाक को कीड़ो ढाक में ।

क-घ

  • क ख ग घ ड़, काको खोटा क्यों घडै ।
  • कपूत हूँ नपूत भलो ।
  • कर रै बेटा फाटको, खड्यो पी दूध को बाटको ।
  • करम लिखा कंकर तो के करै शिव शंकर ।
  • करमहीण किसनियो, जान कठै सूं जाय । करमां लिखी खीचड़ी, घी कठै सूं खाय ।।
  • करमहीण खेती करे, के हळ भागे के बळद मरे ।
  • काणी के ब्याह में सौ टेड ।
  • काम का ना काज का ... ढाई मण अनाज का ।
  • काळी बहू अर जल्योड़ो दूध पीढ्याँ ताईं लजावै ।
  • काळी हांडी रै कनै बैठयाँ काळस न सरी काट तो लाग्यां सरै ।
  • कौड़ी बिन कीमत नहीं सगा नॅ राखै साथ, हुवै जे नामों (रूपया) हाथ मैं बैरी बूझै बात।
  • खरी कमाई घणी कमाई ।
  • खेती करै नॅ बिणजी जाय, विद्या कै बल बैठ्यो खाय ।
  • गरज दीवानी गूजरी नूंत जिमावै खीर, गरज मिटी गूजरी नटी, छाछ नही रे बीर ।
  • गरजवान री अकल जाय, दरदवान री शक्कल जाय ।
  • गरज सरी अर वैद बैरी ।
  • गरीब री हाय, जड़ामूल सूं जाय ।
  • गादड़ै की मोत आवै जणा गांव कानी भागै।
  • गाँवहाला कूटै तो माईतां कनै जावै, माईत कूटै तो कठै जावै ।
  • गोदी मैं छोरो गळी मैं हेरै ।
  • घणी सुधी छिपकली चुग चुग जिनावर खाय ।
  • घणूं खाय ज्यों घणों मरै ।
  • घणों सयाणों कागलो दे गोबर में चांच ।
  • घर का टाबर काणा भी सोवणा ।
  • घर की खांड किरकिरी लागै, गुड चोरी को मीठो ।
  • घर की डाकन घर का नै ही खाय ।
  • घर को जोगी जोगणूं आन गाँव को सिद्ध ।
  • घर नै खोवाई साळो ।
  • घर बळतो कोनी दीखै, डूंगर बळतो दीखै
  • घी सुधारै खीचड़ी, और बड्डी बहू का नाम ।
  • घैरगडी सासू छोटी भू बडी ।

च-झ

  • च्यार चोर चौरासी बाणिया, बाणिया बापड़ा के करँ ।
  • चढ्योड़ो जाट तूम्बो ई चबा जावै ।
  • चोरी जैड़ो रुजगार नीं, जे पड़ती व्है मार नीं ।
  • छड़ी पड़ै छमाछम, विद्या आवै धमाधम।
  • ज्यादा स्याणु कागलो गू मैं चांच दे ।
  • जाओ लाख रैवो साख, गई साख तो बची राख ।
  • जंगल जाट न छोड़िये,हाटां बीच किराड़। रांगड़ कदे न छोड़िये,ये हरदम करे बिगाड़।।
  • जमीन ऍर जोरु जोर की नहीं तो कोई और की।
  • जांटी चढे जको सीरणी बाँट - अर्थ: जो समी के पेड़ पर चढ़ता है, वही खतरे के निवारण हेतू देवता का प्रसाद बोलता है ।
  • जाट की बेटी और काकोजी की सूं - अर्थ: छोटा भी जब ज्यादा नजाकत दिखाने लगता है तब प्रयोग किया जाता है ।
  • जाट जंवाई भाणजो, रेवारी सुनार । ऐता नहीं है आपणा, कर देखो उपकार ।।
  • जाट जंवाई भाणजा, रैबारी सुनार । कदे न होसी आपणा, कर देखो व्योहार ।।
  • जाट जठे ठाठ ।
  • जाट जडूलै मारिये, कागलिये ने आळै । मोठ बगर में पाडि़ये, चोदू हो सो बाळै - अर्थ:जाट जब तक वयस्क नहीं हो जाता, कौवा जब तक उड़ना नहीं सीख लेता तब तक ही ये वश में आते हैं । मोठों पर जब तक बगर आया रहता है तब तक ही उपाड़ना ठीक है
  • जाट कहे सुण जाटणी, इसी ना कदे होय । चाकी पीसे ठाकरां, भांडा मांजै जोय ।।
  • जाट कहे सुण जाटणी, इणी गाँव में रणों, ऊंट बिलाई लेगई हांजी हांजी कहणों ।
  • जाट की छोरी र' फलकै बिना दोरी ।
  • जाट को के जजमान, राबडी को के पकवान ।
  • जाट गंगाजी नहा आयो के ? कह, खुदाई कुण है ।
  • जाट जाट तेरो पेट बांको, कह, मैं ई मैं दो रोटी अलजा ल्यूंगो ।
  • जाट न जायो गुण करै, चणैं न मानी बाह, चन्नण बिड़ो कटायकी, अब क्यों रोव बराह ।
  • जाट बलवान जय भगवान ।
  • जाट डूबै धोळी धार, बानियों डूबै काळी धार ।
  • जाट मरा जब जानिये जब चालिसा होय ।
  • जाट रे जाट ! तेरे सिर पर खाट, कह, मियाँ रे मियाँ ! तेरे सिर पर कोल्हू, कह, तुक तो मिली ना, कह, बोझ्याँ तो मरैगा ।
  • जीम्या जिनै जीमांणा ई पडे ।
  • जीमण अर झगड़ौ, पराये घरां आछो लागै ।
  • जीमाणों सोरो जीमाणो दोरौ ।
  • जीम्यां छोडै पांवणौ, मरयाँ छोडै ब्याज ।
  • जैं करी सरम, बैंका फूट्या करम ।
  • जो गुड़ सैं मरै बी'नै जहर की के जरुरत।
  • जाट और घोयरा तावडॆ मॆ ही निकला करे।

ट-ढ

  • टका दाई ले गी अर कून्डो फोड़गी ।
  • टकै की हांडी फूटी, गंडक की जात पिछाणी ।
  • टपकन लागी टापरी, भीजण लागी खाट ।
  • टको टूंसी एक न यार, तोरण मारण होग्यो त्यार ।
  • ठाकर री गोळी, गांवरी सिरमोळी ।
  • ठाकरण भागो किसाक ? कह, गैल की मार जाणिये ।
  • थाडै को डोको डांग नै फाड़ै ।
  • थाडो मारै अर रोवण भी कोन्या दे ।
  • ठाली ठुकराणी को पेई में हाथ जाय ।
  • ठाली बैठी डोकरी, घर में घाल्यो घोड़ो ।
  • ठालै बैठ्याँ सूँ बेगार भली ।
  • ठिकाणे ठाकुर पूजीजै ।
  • ठिकाणै सैं ई ठाकर बाजै ।
  • ठोकर खार हुन्स्यार होय ।
  • डाकण बेटा ले क दे ।
  • डाकणां के ब्यावां में नूतारां का गटका ।
  • डाकणां सै गाँव का नळा के छाना है ।
  • दिग्मरां के गाँव में धोबी को के काम ।
  • डूंगर चढ़तो पांगळो, सीस अणीतो भार ।
  • डूंगर बळती दिखै, पगां बळती कोनी दिखै ।
  • डूबतो सिंवाळां न हाथ घालै ।
  • डेड घड़ो'र डीडवाणू पाऊँ ।
  • ढक्योड़ो मत उघाड़ और भू घर तेरो ई है ।
  • ढबां खेती,ढबां न्याव ।
  • ढल्यो घोटी, हुयो माटी ।
  • ढेढ़ को मन ल्याह्वड़ै में ही ।
  • ढेढ़ नै सुरग में भी बेगार ।
  • ढेढ़ रे साथे धाप'र जीमो भांवै आंगळी भर कर चाखो ।
  • ढेढ़ रो पल्लो लगावो, भांवै बाथे पड़ो ।
  • ढेढ़ां की दुर्सीस सूं दाव थोड़ा ई मरै ।
  • ढेढणी और रावळै जा आई ।
  • ढोली गावतो अर टाबर रोवतो चोखो लागै ।

त-न

  • तंगी में कुण संगी ?
  • तरवार को घाव भरज्या बात को कोनी भरै ।
  • तवै की काची नै, सासरै की भाजी नै कठैई ठोड़ कोनी ।
  • तवै चढ़ै नै धाड़ खाय ।
  • ताता पाणी सैं कसी बाड़ बळै ।
  • तातो खावै छायाँ सोवै, बैंको बैद पिछोकड़ रोवै ।
  • ताळी लाग्यां ताळो खुलै ।
  • तावळो सो बावळो ।
  • तिरिया चरित न जाणे कोय, खसम मार के सत्ती होय ।
  • तीज त्युंहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर ।
  • तीजां पाछै तीजड़ी, होळी पाछै ढूंढ, फेरां पाछै चुनड़ी, मार खसम कै मूंड ।
  • तीतर कै मूंडै कुसळ है ।
  • तीतर पंखी बादळी, विधवा काजळ रेख । बा बरसे बा घर करै, ई में मीन न मेख ।।
  • तीन तेरा घर बिखरै ।
  • तीन बुलाया तेरा आया, भई राम की बाणी । राघो चेतन यूँ कहै, द्यो दाळ में पाणी ।।
  • तीन सुहाळी, तेरा थाळी । बांटण वाळी सतर जणी ।।
  • तीसरे सूखो आठवैं अकाळ - राजस्थान के लिए प्रयोग किया गया है ।
  • तुरकणी कै रान्ध्योड़ा में के कसर ।
  • तुरकणी रे कात्योडे में ही फिदकड़ो ।
  • दियो लियो आडो आवै ।
  • दूसरे की थाळी मँ घी ज्यादा दीखॅ।
  • दूसरे की थाळी में सदा हि ज्यादा लाडू दीखैं ।
  • धणी रो धन नीं देखणों, धणी रो मन देखणों ।
  • धन्‍ना जाट का हरिसों हेत, बिना बीज के निपजँ खेत।
  • नानी फंड करै, दोहितो दंड भरै ।
  • नेपॅ की रुख खेड़ा'ई बतादें ।

प-म

  • पावणां सूं पीढ़ी कोनी चालै, जवायाँ सूं खेती कोनी चालै ।
  • पेड़ की जड धरती और लूगाई की जड़ रसोई ।
  • पूत का पग पालणें में ही दीख जा हीं ।
  • पत्थर का बाट - जत्ता भी तोलो, घाट-ही-घाट ।
  • पीसो हाथ को, भाई साथ को ही काम आवै ।
  • फूटेड़ो ढोल अर कूटेड़ो ढोली चीं नीं करै ।
  • बड़ी रातां का बड़ा ही तड़का ।
  • बहुआं हाथ चोर मरावै, चोर बहू का भाई ।
  • बाड़ में मूत्यां कसौ बैर नीकळै ।
  • बाड़ में हाथ घालण सैं तो काँटा ही लाग ।
  • बातां रीझै बाणियूं, गीतां सै रजपूत । बामण रीझै लाडुवां, बाकळ रीझै भूत ।।
  • बात में हुंकारो, फौज में नंगारो ।
  • बाप ना मारी मांखी, बेटो तीरंदाज ।
  • बाबो सगळां'नॅ लड़ॅ, बाबॅ'न कुण लड़ॅ ।
  • बामण नै दियां पीछै गाय पराई हो जावै, परबारे हाथां में गयां पीछै रकम पराई हो जावै, पर्णीज्यां पीछै बेटी पराई हो जावै ।
  • बायेड़ो उगै अर लिखेड़ो चूगै ।
  • बावाड़ेड़ो पाहुणों भूत बिरौबर ।
  • बिना बुलाया पावणा, घी घालूं कॅ तेल ।
  • बिना रोऍ तो मा'ई बोबो कोनी दे ।
  • बीन कॅ'ई लाळ पड़ँ जणा बराती के करँ ।
  • बींद मरौ बींदणी मरौ, बांमण रै टक्कौ त्यार। ठाकर ग्या ठग रिया, रिया मुळक रा चोर॥
  • बैठणो छाया मैं हुओ भलां कैर ही, रहणो भायां मैं हुओ भलां बैर ही ।
  • भोजन में लाडू अर सगाँ में साडू ।
  • भौंकँ जका काटँ कोनी ।
  • मन का लाडु खाटा क्यों ।
  • मन सूं रान्धेड़ो खाटो ई खीर लागै ।
  • म्हानैं घडगी अ'र बेमाता बाड़ मैं बड़गी ।
  • मँगो रोवे ऐक बार, सस्तो रोवे सो बार ।
  • मन मीठो तो सै मीठा, मन खाटो तो सै खाटा ।
  • मरद की कूब्बत राड़ में, लुगाई की कूब्बत रान्धणें में |
  • मानो तो देव नहीं तो भींत को लेव।
  • मिनख कमावै च्यार पहर, ब्याज कमावै आठ पहर ।
  • मिनख बाण रो गोलौ ।
  • मेवा तो बरसँता भला, होणी होवॅ सो होय ।
  • मेह की रुख तो भदवड़ा'ई बता दें ।
  • मुंडै सूं नीसरी बात, कमाण सूं नीसरयो तीर, अर परमात्मा री पोळ गयोड़ा पराण पाछा नीं बावडै ।
  • मोटो ब्याज मूल नै खावै ।

य-व

  • रजपूत की जात जमी ।
  • राजपूती धोरां में रळगी, ऊपर चढ़ गई रेत ।
  • राजा री आस करणी, पण आसंगो नीं कारणों ।
  • रांड आग गाळ कोनी ।
  • रांड कै मारयोड़ै की अर गाँव में फिरयोड़ै की दाद-फिराद कोनी ।
  • राई का भाव रात ही गया ।
  • राई बिना किसो रायतो ।
  • राजा करै सो न्याव, पासो पड़ै सो डाव ।
  • राजा जोगी अगन जळ, इण की उलटी रीत । डरता रहियो परसराम, ये थोडी पाळै प्रीत ।।
  • राड़ को घर हांसी, रोग को घर खांसी ।
  • राड़ सैं बड़ भली ।
  • रात आगै उँवार कोनी ।
  • रात च्यानणी, बात आंख्या देखी मानणी ।
  • राबड़ी को नांव गुलसफ्फा ।
  • राबड़ी बी कहै मन दांतां सै खावो ।
  • राबड़ी में गुण होता तो ब्या में नां रान्धता ।
  • राबड़ी में राख रांधै, चून पाटै पीसती । देखो रै या फ़ूड रांड, चालै पल्ला घींसती ।।
  • रिण अर बैर कदैई जूनां नीं व्है ।
  • रांड स्याणी हुवै पण कसम मरयां फेर ।
  • रूप की रोवै करम की खावै ।
  • रूपयो होवै रोकड़ी सोरो, आवै सांस, संपत होय तो घर भलो, नहीं भलो परदेस।
  • रोता जां बै मरेडां की खबर ल्यावैं ।
  • लालबही छप्पन रो पानो, बोहरो रोवै छानो-छानो ।

श-ह

  • सरलायो छूंदरो, बद्दां बंध्यो जाट । मदमाती गूजरी, तीनों वारां बाट ।।
  • साबत रैसी सर तो घणाई बससीं घर।
  • सात घर तो डाकण भी छोड दिया करै है।
  • सावण भलो सूर'यो भादुड़ो पिरवाय, आसोजां मैं पछवा चाली गाडा भर भर ल्याव ।
  • सासरौ सुख आसरौ, जे ढबै दिन चार । जे बसै दिन दस बीस, हाथ में खुरपी माथै भार ।।
  • सासरौ सुख बासरौ, चार दिनां को आसरौ, जै रवे मास दो मास, देस्याँ खुरपी खुदास्याँ घास ।
  • हाँसी-हाँसी में हो-ज्यासी खाँसी ।
  • हिल्योडो चोर गुलगुला खाय ।

क्ष-ज्ञ


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