Barli Ajmer

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Villages around Bhinay, Ajmer

Barli (बडली) (Badli) is a large village in Bhinay Tehsil in District Ajmer, Rajasthan.

History

बड़ली, जिला अजमेर

विजयेन्द्र कुमार माथुर[1] ने लेख किया है .....बड़ली (AS, p.602), जिला अजमेर]], राजस्थान. इस स्थान से 1912 ई. में स्वर्गीय डॉक्टर गौरीशंकर हीराचंद ओझा को 443 ई.पू. का एक खंडित अभिलेख किसी स्तंभ के टुकड़े पर अंकित प्राप्त हुआ था जो पिपरावा के अभिलेख (487 ई.पू.) के साथ ही भारत के अभिलेखों में प्राचीनतम समझा जाता है. अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है. यह अजमेर के संग्रहालय में सुरक्षित है.

बड़ली का शिलालेख

अजमेर जिले के बड़ली गांव में 443 ईसवी पूर्व का शिलालेख वीर सम्वत 84 और विक्रम सम्वत 368 का है यह अशोक से भी पहले ब्राह्मी लिपि का है. स्थानीय आख्यानो के अनुसार पद्मसेन बरली का समृद्ध राजा था जिसने अजमेर की तलहटी में पद्मावती नगरी इन्दरकोट बसाया था. अजमेर जिले में 27 km दूर बड़ली गाँव में भिलोत माता मंदिर से स्तंभ के टुकडों से प्राप्त हुआ. राजस्थान तथा ब्राह्मी लिपि का सबसे प्राचीन शिलालेख है.

यह अभिलेख गौरीशंकर हीराचंद ओझा को भिलोत माता के मंदिर में मिला था यह राजस्थान का सबसे प्राचीन अभिलेख है जो वर्तमान में अजमेर संग्रहालय में सुरक्षित है अजमेर के साथ माध्यमिका (चित्तोड) में जैन धर्म के प्रसार का उल्लेख।

संदर्भ: राजस्थान के विविध रंग

Barli fragmentary Inscription of 443 BC

Dr Gauri Shankar Hirachandra Ojha obtained in 1912 a fragmentary Inscription of year 443 BC which along with Piprava Inscription of 487 BC are the most ancient Indian Inscriptions. It is in Brahmi script and preserved in Ajmer Museum.[2]

Dr Ozha writes that this small inscription is piece of pillar. In its first line , the words 'वीर' (T) 'य भागव(त)' and in the second line, the words 'चतुरासिति व (स)' are inscribed. [3]

Piprawa is a village in the Basti district of Uttar Pradesh.

Population

At the time of Census-2011, the population of Barli village stood at 4466, with 822 households.

Notable persons

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.602
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.602
  3. Āgama and Tripiṭaka: Language and literature By Nagraj (Muni.), Bhūpendra Swarup Jain