Tola Sardar

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Tola Sardar (1508 AD) was a Chieftain of Loyal clan of Khari Karamsotan (Nagaur) in Rajasthan.

इतिहास

इस वंश के जाट मारवाड़ में रहते हैं । सोलहवीं सदी से पहले नागौर के प्रदेश पर इन्हीं लोगों का राज था । यद्यपि पठान, मुगल नागौर जैसे बड़े-बड़े स्थानों पर कब्जा कर लेते थे, किन्तु इन लोगों ने उनको अपना शासक कभी नहीं माना । यह भूमिया-चारे की पद्धति से अपने अधिकृत प्रदेश पर शासन करते थे । जिन दिनों अकबर बादशाह हुआ और उसे भी इन लोगों ने किसी भांति की भेंट अथवा शाही कर न दिया, तो उसने बहुत से जाट सरदारों को जब यह पता लगा कि बादशाह जब तक शाही कर न ले लेगा, तब तक उनके जाति भाइयों को न छोड़ेगा, तो तोला अकबर बादशाह के पास गए । बादशाह ने यही सवाल किया कि हमें राजस्व (कर) दो । तोला इस बात पर कड़क कर बोला - इसी लोभ के लिये तुमने हमारे जाति भाइयों को पकड़ा है, तो छोड़ दो । हमारे यहां तुम्हारा जैसा घाटा नहीं है । मारवाड़ी भाषा में तोला और अकबर की बातचीत का इस भांति काव्यमय वर्णन किया है-

काव्यमय वर्णन

अकबर सूं तोला मिला करके बात कराड़ी ।

पट्टी रहूं मैं नागौररी घर म्हाड़ा खाड़ी ।

खच्चर भरले मोहरां की बिरादरी छोड़ म्हाड़ी ।।’’

परगना नागौर में खारी गांव में तोला सरदार की राजधानी थी । गांव में पश्चिम दिशा में तोरणां नाम का तालाब है, जो उसी के नाम से मशहूर है । यहां एक शिलालेख है, उस पर संवत् 1565 भादवा सुदी 8 खुदा हुआ है । उसी पत्थर पर तोलाजी की मूर्ति है । वे पांचों हथियार बांधे हुए हैं । उनके आगे छड़ीदार अथवा चोबदार हैं । खारी के समीप किस्ताना, ढोलोलाव नाम के कई तालाब हैं, जो तोला तथा उसके पूर्वजों की समृद्धि और वैभव को प्रकट करते हैं । उनके खजाने में अपार धन भरा रहता था, इसलिए तो उन्होंने अकबर से कह दिया कि मुहरों से खच्चर भर ले ।[1]

External links

References


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