Bajrang Lal Takhar

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Bajrang Lal Takhar

Bajrang Lal Takhar went on to win the first individual rowing medal for the country at the 15th Asian Games at Doha. He won the first individual rowing Gold medal for India at the 2010 Asian Games held in Guangzhou. Takhar is a Naib Subedar in the Rajputana Rifles regiment of the Indian Army.

Bajrang Lal was born on January 05,1981 in a small village named Balu Baba Ki Dhani near Maganpura in Danta Ramgarh tahsil, Sikar district in Rajasthan. His father's name is Shri Dula Ram Takhar, a Hindu Jat.

Bajrang Lal Takhar, has also won two gold medals in the single and double skull races in South Asian Games 2006.

Arjun Award

He was awarded with Arjun Award by Government of India.[1]

Bajrang Lal Takhar won India's maiden rowing gold medal in the Asian Games 2010.

Vishisht Seva Medal

He was Awarded with Vishisht Seva Medal on 26 January 2012.[2]

Padma Shri award

2013 - Padma Shri India's fourth highest civilian award from the Government of India was awarded to him on 26 January 2013.

सूबेदार बजरंगलाल ताखर

बजरंगलाल ताखर

5 जनवरी 1981 को सीकर जिले के गाँव मगनपुरा (दांतारामगढ़) में इनका जन्म हुआ ।

  • इनके पिताजी श्री दुल्हाराम जी हैं जो पेशे से अध्यापक हैं (राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय न्याम में अध्यापक) ।
  • मां: बिदामी देवी. बजरंग पांच भाइयों में दूसरे नंबर के है।
  • भाई : पांच (सबसे छोटा भाई जगदीश वायुसेना में कंपाउडर)
  • पत्नी : उर्मिलादेवी
  • बजरंग जी 2001 में सेना में भर्ती हुए एवं वर्तमान में दिल्ली में तैनात है।
  • खेल के दम पर पदोन्नति: 2004 में सैनिक से हवलदार व 2006 में नायाब सूबेदार.
  • वर्तमान में कहां : दिल्ली की राजपूताना बटालियन में नायाब सूबेदार के पद पर कार्यरत
  • प्रशिक्षण : पुणे व हैदराबाद

सुनहरी उपलब्घियां :

बजरंगलाल ताखर

2001 में भारतीय सेना में सिपाही के पद पर नियुक्ति के बाद फरवरी 2001 में हैदराबाद में नौकायान क्षेत्र में पदस्थापना हुई। वर्ष 2002 से 2004 तक पूना में नौकायान का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 2003 में प्रशिक्षण काल में ही सबसे पहले नेशनल चैम्पियनशिप में रजद पदक जीता। वर्ष 2004 में सेना की ओर से खेलते हुए चंडीगढ में आयोजित नेशनल चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। 2005 में हैदराबाद में आयोजित 11वीं एशियन चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते। 2006 में श्रीलंका में हुए सैफ गेम में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दो स्वर्णपदक जीते। वर्ष 2006 में दोहा कतर में 15वें एशियन गेम्स में 1 रजत पदक जीता।

वर्ष 2007 में कोरिया में 12वीं एशियन चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण पदक जीता। 12 वें एशियन रोर्ईग चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल किया। इसी उपलब्धि पर वर्ष 2008 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। वर्ष 2009 में 4 से 8 नवम्बर तक ताईवान में आयोजित 13 वीं एशियन नौकायान चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में हांगकांग को हराकर स्वर्ण पदक जीता। और अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक।

बजरंगलाल ताखड़ अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और गुरू ब्रिगेडियर के.पी.सिंह देव को देते हैं। ताखड़ ने कहा कि मैं बास्केटबॉल का खिलाडी था। सेना में भर्ती होने के बाद सेना की ओर से बास्केटबॉल के अनेक मैच खेले और जीते। लेकिन वर्ष 2001 में हैदराबाद में तैनाती के साथ ही मेरा खेल जीवन बदल गया। यहां मेरी काबिलियत को मेरे खेल जीवन के गुरू ब्रिगेडियर के.पी.सिंह देव ने नौकायन का प्रशिक्षण दिलवाया। परिणाम यह रहा कि मैं एक के बाद एक जीत हसिल करता गया।

पत्नी ने दी प्रेरणा

बजरंगलाल की सफलता के पीछे पत्नी का भी हाथ है। बकौल बजरंगलाल वर्ष 2008 में ओलम्पिक खेलों में भाग लेने के लिए चीन जा रहा था तब उसकी पत्नी उर्मिला ने तीन शब्द कहे 'कामयाब होकर लौटना'। और यही तीन शब्द जीत के लिए जुनून बन गए। हर समय उनके कानों में यही तीन शब्द गूंजते रहे। बजरंगलाल ने रहस्योद्घाटित करते हुए बताया कि आज सारा भारत मुझे ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने की वजह से जानता है, लेकिन चीन के लिए रवाना होते समय तक मेरी पत्नी उर्मिला ओलम्पिक खेलों और उसके महत्व के बारे में जानती तक नहीं थी। इसलिए उसने मुझसे कहा कि जिस खेल के लिए जा रहे हो उसमें जीतकर लौटना।

बजरंग के स्वर्ण पदक ने चमकाया राजस्थान का नाम

Source: Bhaskar News - शनिवार,20 नवंबर, 2010 जयपुर. एशियाई खेलों में शुक्रवार को राजस्थान के रोवरों ने देश का मान बढ़ाया।

सीकर के स्टार रोवर बजरंग लाल ताखर ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की सिंगल स्कल्स रोइंग का स्वर्ण जीता। वे एशियन गेम्स के इतिहास में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय रोवर बन गए हैं। यह ग्वांगझू एशियाड में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। पहला स्वर्ण पंकज आडवाणी ने बिलियर्डस सिंगल्स में जीता था। भारत ने एशियाड में शुक्रवार को एक स्वर्ण सहित चार पदक जीते। इनमें से तीन पदक रोवरों और एक पदक निशानेबाजों ने दिलाए।

शानदार आगाज, खूबसूरत अंजाम: बजरंग लाल ने गुआंगडोंग इंटरनेशनल रोइंग सेंटर में सिंगल स्कल्स इवेंट में 2000 मी. की दूरी 7 मिनट 04.78 सैकंड में नापकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। लेन तीन से शुरुआत करने वाले बजरंग पहले 500 मी. की दूरी तय करने तक करीब दो सैकंड की बढ़त बना चुके थे। उन्होंने पहले 500 मी. की दूरी एक मिनट 39.87 सैकंड में तय की।

अगले 500 मी. तय करने के लिए उन्होंने एक मिनट 46.23 सैकंड लिए। इसके बाद तीसरे 500 मी. की रेस एक मिनट 48.33 सैकंड और अंतिम 500 मी. रेस एक मिनट 50.35 सैकंड में नापकर उन्होंने स्वर्ण जीत लिया। ताइवान के वांग मिंग (7:07.33) ने रजत और इराक के हैदर हमराशिद (7:10.10) ने कांस्य पदक जीता। भारतीय सेना के अधिकारी ताखर ने दोहा एशियड में रजत जीता था। ताखर ने हीट में सात मिनट और 02.45 सैकंड का समय निकाला था।

25 को राजस्थान आएंगे बजरंग व सतीश: ग्वांगझू एशियाड में शानदार प्रदर्शन करने वाले दोनों रोवर बजरंगलाल ताखर व सतीश जोशी 25 नवंबर तक राजस्थान आ सकेंगे। बजरंग ने ग्वांगझू से बताया कि हम दोनों का 22 नवंबर को देश पहुंचने का कार्यक्रम है। हमें कुछ दिन हैदराबाद में अपने मुख्यालय में बिताने होंगे। उसके बाद ही हम राजस्थान आ सकेंगे। उम्मीद है कि 25 या 26 नवंबर तक हम राजस्थान आ जाएंगे।

किराए की नाव पर जीता पदक: भारतीय रोवरों के पास अपनी नावें तक नहीं थीं। दरअसल, उन्हें जिन नावों के साथ एशियन गेम्स में भाग लेना था, वह हैदराबाद देर से पहुंची। इसकारण उन्हें ग्वांगझू नहीं भेजा जा सका। किराये की नाव से ही रोवरों ने पदक जीते।

मैं फाइनल में स्वर्ण जीतने के इरादे से उतरा था और इसमें कामयाब रहा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैंने हीट से ज्यादा समय फाइनल में लिया। - जीत के बाद बजरंग

बधाइयों का तांता लगा

बजरंग लाल की यह स्वर्णिम उपलब्धि राजस्थान के लिए गौरव की बात है। उनकी यह सफलता युवा खिलाड़ियों को Ÿोष्ठ प्रदर्शन के साथ-साथ प्रदेश एवं देश का नाम ऊंचा करने की प्रेरणा देगी।’ - अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री

बजरंग और सतीश जोशी ने एशियाड में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य ही नहीं, देश का नाम रोशन किया है। मैं इन खिलाड़ियों व उनके परिजनों को शुभकामना देता हूं। - अरुण चतुर्वेदी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष

बजरंग लाल ताखर ने ग्वांगझू में स्वर्ण पदक जीतते हुए बता दिया है कि राजस्थान में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनके इस प्रदर्शन से राज्य के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खेल दिखाने की प्रेरणा मिलेगी। - यशप्रताप सिंह, सचिव राज्य हैंडबॉल संघ

ताखर ने इस स्वर्ण पदक से इतिहास रच दिया है। सीकर के छोटे से गांव के साधारण परिवार में जन्मे बजरंग ने देश का नाम रोशन किया है। मुझे उम्मीद है कि लंदन ओलिंपिक में भी वे इस प्रदर्शन को बरकरार रखने में सफल रहेंगे। - गिरिराज खंडेलवाल, सचिव राज्य नौकायन संघ

बजरंग ताखर ने इस स्वर्ण पदक से राज्य का नाम रोशन किया है। मैं उनके साथ ही सतीश जोशी को भी दो रजत पदकों के लिए बधाई देता हूं। - नवीन यादव, सचिव राज्य बॉडी बिल्डिंग संघ

बजरंगलाल ताखर को पद्मश्री, बोले-'पदकों का दौर जारी रहेगा'

Source: Bhaskar News | Jan 26, 2013: 2010 के एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले नौकाचालक बजरंगलाल ताखर ने एक बार फिर राजस्थान और शेखावाटी का मान बढ़ाया है। शुक्रवार को घोषित सूची के अनुसार ताखर को पद्मश्री अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इस घोषणा के बाद शेखावाटी में जश्न का माहौल रहा। शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे ताखर के पास पहला फोन रोइंग फैडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष केपीसिंह देव का आया।

उस समय ताखर मगनपुरा (दांतारामगढ़) स्थित घर पर माता-पिता के साथ थे। सूचना के बाद पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। पिता दूलाराम ने कहा-आगे भी कामयाबी हासिल करते रहो और यूं ही देश का नाम रोशन करो। ताखर ने भास्कर को बताया कि जितना सम्मान मुझे मिला, वह कम नहीं है। यह प्रदेश व देश का सम्मान है। उन्होंने यह भी बताया कि भास्कर ने हमेशा हौसला बढ़ाया है।

सम्मान के बाद पहली प्रतिक्रिया : सम्मान मेरे अकेले को नहीं। शेखावाटी और देश को मिला। मेरा हौसला बढ़ा है और देश के लिए पदक जीतने का दौर जारी रहेगा।

क्या सम्मान के बारे में सोचा था : यकीन नहीं था, लेकिन मेरे भाई को विश्वास था। खिलाड़ियों को मिले सम्मान से युवाओं का हौसला बुलंद होता है। मन में जीत का जज्बा पैदा होता है। नई पीढ़ी के लिए भी सीख है कि हमेशा मेहनत करते रहो। एक दिन फल जरूर मिलता है। शेखावाटी के खिलाड़ियों से कहना चाहता हूं कि वे निराश नहीं हों। एक दिन जरूर जीतेंगे और दुनिया लोहा मानेगी।

लक्ष्य भी तय : एशियन गेम्स व 2014 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में परचम लहराना लक्ष्य है। अगले महीने दिल्ली में प्रैक्टिस शुरू कर दूंगा।

..और ऐसे बन गए अच्छे तैराक : ताखर बताते हैं कि 1990 तक फव्वारा सिस्टम नहीं आने के कारण सिंचाई के लिए खेतों में होद बनाने का चलन था। बचपन में खेतों में जाता और होद में कूद जाता। इसके बाद इलाके की बावड़ियों में तैराकी का अभ्यास करने लगा। इसी मेहनत ने मुझे अच्छा तैराक बना दिया।

2001 में जब सेना में भर्ती हुआ तो बास्केटबॉल टीम में शामिल कर लिया गया। जब सेना के ब्रिगेडियर केपी सिंह देव को पता लगा कि अच्छा तैराक हूं तो उन्होंने नौकायन का अभ्यास करने की सलाह दी।सेना के साथी व राजस्थान निवासी नौकायन खिलाड़ी सतीश जोशी के साथ अभ्यास शुरू किया।

External links

References


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