Dhanna Bhagat

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Dhanna Bhagat
Dhanna Bhagat

Dhanna Bhagat (धन्ना भगत) (born 1415) was an extremely charitable person and devotee of God.

Early life

Different sources about the birth of Dhanna Bhagat refer to different villages as his birthplace. According to one source he was born in a Jat Hindu family of Haritwal clan in village Choru of district Jaipur in Rajasthan, India. Another source tells that he was born in village Choru, tehsil Fagi, district Jaipur on baisakh badi 3, samvat 1472 in the family of Rameshwar Jat of Haritwal gotra. His mother's name was Gangabai.

He was married in a Kairo gotra family. [1] During his childhood his father moved to village Abhaynagar that is now-a-days known as village Dhuan Kalan near Deoli city in Tonk district. According to Dr Pema Ram he was born at village Choru in Tonk district in 1415 AD (v.samvat 1472) in the family of Rameshwar Harchatwal and his mother was from Garhwal gotra. [2]

Divine powers of Dhanna Bhagat

Dhanna Bhagat is known for sacrifice and hospitality. He was a strong devotee of God. It is said that his house was always full of needy people like sanyasis and beggars. Nobody returned empty handed or empty stomach from his house. [3]

There are number of myths about divine powers of Dhanna Bhagat. Once he was ploughing his fields. Large number of sanyasis came to him and demanded food. He gifted all the seed kept for sowing to them and ploughed fields without seeds. The fields produced no food grains but the gourds. When Jagirdar came to collect levy he offered two gourds. The Jagirdar broke the gourds and found that they were full of pearls. The Jagirdar was influenced by the divine powers of Dhanna Bhagat and constructed a pond that was named ‘Moti Talab’. After independence of India this pond was converted into Moti Nagar Dam. People of Rajasthan while cultivating fields sing the folk songs about Dhanna Bhagat. There is a proverb: [4]

धन्‍ना जाट का हरिसों हेत, Dhannā Jāt kā Harison het,

बिना बीज के निपजा खेत। Binā Bīj ke Nipajā khet.

Meaning - Dhanna Jat had so much love with God that fields produce food grain without sowing seeds.


The Guru Granth Sahib includes three of Dhana's hymns. "Loving devotion," says Dhanna in his sabda in Raga Asa, "is now fixed in my heart and thereby have I found solace and fulfilment. In whose heart is light divine manifested he alone recognizeth the Immaculate One." [5] [6]

Ramananda of Vaishnava sect

He was initiated by Ramananda of Vaishnava sect. Ramananda had about 500 pupils out of whom Dhanna Bhagat, Pipa ji, Kabir, Raidas and 14 others were main. The people of village still take the soil from Dhuan Kalan and put it in their fields. They have the belief that it enhances the productivity. Dhanna Bhagat had constructed a temple named 'Gangeshwar temple' and put an inscription on the pillar which bears name of his guru Ramananda and year of construction samvat 1535. [7]

भक्त धन्ना जी का परिचय

भक्त धन्ना जी का मंदिर

भक्त धन्ना जी का जन्म श्री गुरु नानक देव जी से पूर्व कोई 53 वर्ष पहले माना जाता है| आपका जन्म जयपुर के पास Choru गाँव में एक जाट घराने में हुआ| आप के माता पिता कृषि और पशु पालन करके अपना जीवन यापन करते थे| वह बहुत निर्धन थे| जैसे ही धन्ना बड़ा हुआ उसे भी पशु चराने के काम में लगा दिया| वह प्रतिदिन पशु चराने जाया करता|

गाँव के बाहर ही कच्चे तालाब के किनारे एक ठाकुर द्वार था जिसमे बहुत सारी ठाकुरों की मूर्तियाँ रखी हुई थी| लोग प्रतिदिन वहाँ आकर माथा टेकते व भेंटा अर्पण करते| धन्ना पंडित को ठाकुरों की पूजा करते, स्नान करवाते व घंटियाँ खड़काते रोज देखता| अल्पबुद्धि का होने के कारण वह समझ न पाता| एक दिन उसके मन में आया कि देखतें हैं कि क्या है| उसने एक दिन पंडित से पूछ ही लिया कि आप मूर्तियों के आगे बैठकर आप क्या करते हो? पंडित ने कहा ठाकुर की सेवा करते हैं| जिनसे कि मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं| धन्ने ने कहा, यह ठाकुर मुझे भी दे दो| उससे छुटकारा पाने के लिए पंडित ने कपड़े में पत्थर लपेटकर दे दिया|

घर जाकर धन्ने ने पत्थर को ठाकुर समझकर स्नान कराया और भोग लगाने के लिए कहने लगा| उसने ठाकुर के आगे बहुत मिन्नते की| धन्ने ने कसम खाई कि यदि ठाकुर जी आप नहीं खायेंगे तो मैं भी भूखा ही रहूंगा| उसका यह प्रण देखकर प्रभु प्रगट हुए तथा रोटी खाई व लस्सी पी| इस प्रकार धन्ने ने अपने भोलेपन में पूजा करने और साफ मन से पत्थर में भी भगवान को पा लिया|

जब धन्ने को लगने लगी उस समय उसके माता - पिता बूढ़े हो चूके थे और अकेला नव युवक था| उसे ख्याल आया कि ठाकुर को पूजा से खुश करके यदि सब कुछ हासिल किया जा सकता है तो उसे अवश्य ही यह करना होगा जिससे घर की गरीबी चली जाए तथा सुख की साँस आए| ऐसा सोच कर ही वह पंडित के पास गया| पंडित ने पहले ठाकुर देने से मना के दिया कि जाट इतना बुद्धिमान नहीं होता कि वह ठाकुर की पूजा कर सके| दूसरा तुम अनपढ़ हो| तीसरा ठाकुर जी मन्दिर के बिना कही नहीं रहते और न ही प्रसन्न होते| इसलिए तुम जिद्द मत करो और खेतों की संभाल करो| ब्रहामण का धर्म है पूजा पाठ करना| जाट का कार्य है अनाज पैदा करना|

परन्तु धन्ना टस से मस न हुआ| अपनी पिटाई के डर से पंडित ने जो सालगराम मन्दिर में फालतू पड़ा था उठाकर धन्ने को दे दिया और पूजा - पाठ की विधि भी बता दी| पूरी रात धन्ने को नींद न आई| वह पूरी रात सोचता रहा कि ठाकुर को कैसे प्रसन्न करेगा और उनसे क्या माँगेगा| सुबह उठकर अपने नहाने के बाद ठाकुर को स्नान कराया| भक्ति भाव से बैठकर लस्सी रिडकी व रोटी पकाई| उसने प्रार्थना की, हे प्रभु! भोग लगाओ! मुझ गरीब के पास रोटी, लस्सी और मखन ही है और कुछ नहीं| जब और चीजे दोगे तब आपके आगे रख दूँगा| वह बैठा ठाकुर जी को देखता रहा| अब पत्थर भोजन कैसे करे? पंडित तो भोग का बहाना लगाकर सारी सामग्री घर ले जाता था| पर भले बालक को इस बात का कहाँ ज्ञान था| वह व्याकुल होकर कहने लगा कि क्या आप जाट का प्रसाद नहीं खाते? दादा तो इतनी देर नहीं लगाते थे| यदि आज आपने प्रसाद न खाया तो मैं मर जाऊंगा लेकिन आपके बगैर नहीं खाऊंगा|

प्रभु जानते थे कि यह मेरा निर्मल भक्त है| छल कपट नहीं जानता| अब तो प्रगट होना ही पड़ेगा| एक घंटा और बीतने के बाद धन्ना क्या देखता है कि श्री कृष्ण रूप भगवान जी रोटी मखन के साथ खा रहे हैं और लस्सी पी रहें हैं| भोजन खा कर प्रभु बोले धन्ने जो इच्छा है मांग लो मैं तुम पर प्रसन्न हूँ| धन्ने ने हाथ जोड़कर बिनती की --

भाव- जो तुम्हारी भक्ति करते हैं तू उनके कार्य संवार देता है| मुझे गेंहू, दाल व घी दीजिए| मैं खुश हो जाऊंगा यदि जूता, कपड़े, साथ प्रकार के आनाज, गाय या भैंस, सवारी करने के लिए घोड़ी तथा घर की देखभाल करने के लिए सुन्दर नारी मुझे दें|

धन्ने के यह वचन सुनकर प्रभु हँस पड़े और बोले यह सब वस्तुएं तुम्हें मिल जाएँगी|

प्रभु बोले - अन्य कुछ?

प्रभु! मैं जब भी आपको याद करू आप दर्शन दीजिए| यदि कोई जरुरत हुई तो बताऊंगा|

तथास्तु! भगवान ने उत्तर दिया|

हे प्रभु! धन्ना आज से आपका आजीवन सेवक हुआ| आपके इलावा किसी अन्य का नाम नहीं लूँगा| धन्ना खुशी से दीवाना हो गया| उसकी आँखे बन्द हो गई| जब आँखे खोली तो प्रभु वहाँ नहीं थे| वह पत्थर का सालगराम वहाँ पड़ा था| उसने बर्तन में बचा हुआ प्रसाद खाया जिससे उसे तीन लोको का ज्ञान हो गया|

प्रभु के दर्शनों के कुछ दिन पश्चात धन्ने के घर सारी खुशियाँ आ गई| एक अच्छे अमीर घर में उसका विवाह हो गया| उसकी बिना बोई भूमि पर भी फसल लहलहा गई| उसने जो जो प्रभु से माँगा था उसे सब मिल गया|

किसी ने धन्ने को कहा चाहे प्रभु तुम पर प्रसन्न हैं तुम्हें फिर भी गुरु धारण करना चाहिए| उसने स्वामी रामानंद जी का नाम बताया| एक दिन अचानक ही रामानंद जी उधर से निकले| भक्त धन्ने ने दिल से उनकी खूब सेवा की तथा दीक्षा की मांग की| रामानंद जी ने उनकी विनती स्वीकार कर ली और दीक्षा देकर धन्ने को अपना शिष्य बना लिया| धन्ना राम नाम का सिमरन करने लगा| मौज में आकर धन्ना कई बार भगवान को अपने पास बुला लेता और उनसे अपने कार्य पूर्ण करवाता|

धन्ना भगत की जीवनी पर बनेगा पैनोरमा, जमीन आंवटन प्रक्रिया शुरू

धन्ना भगत पैनोरमा

Ref - Bhaskar News Network, Mar 08, 2016

धुंआकला में धन्ना भगत के 600 वें जन्मोत्सव पर तीन मुख्य मंत्रियो के आने की तैयारियों को लेकर सोमवार को सांसद, विधायक सहित कई जनप्रतिनिधियों ने धुंआ कला का दौरा कर मौके का जायजा लिया। धूंआकला में करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जाने वाली पैनोरोमा की जमीन के आंवटन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। गुरुद्वारे का बाबा लक्खा सिंह कोटा वाले बाबा शेर सिंह, प्रवक्ता सुखबीर सिंह ने बताया कि धुंआ कला स्थित धन्ना भगत के 600 वें जन्मोत्सव 11 से 13 मार्च तक मनाया जाएगा। इसमें राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भुपेन्द्र हुड्डा, पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, राजस्थान के श्रम मंत्री सुरेन्द्र पाल टीटी के अलावा कई जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारियों को लेकर सड़क, बिजली, चिकित्सा विभाग के आलाधिकारियों का दौरा होना शुरू हो गया है। हैलीपेड का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। सोमवार को टोक-सवाईमाधोपुर सांसद सुखवीर सिंह जौनपुरिया, विधायक राजेंद्र गुर्जर, भाजपा जिलाध्यक्ष गणेश माहुर, भाजपा नेता नरेश बंसल, देवली नगरपालिका चेयरमैन रेखा जैन, भाजपा देहाॅत अध्यक्ष बनवारी जाट, उपप्रधान रमेश भारद्वाज के अलावा भाजपा के कई जनप्रतिनिधियों, घाड़ थानाप्रभारी मुकेश कुमार वर्मा ने गुरुद्वारा, मुख्यमंत्री के सभा स्थल, हैलीपेड के अलावा यहां आने वाले सिख समुदाय के लोगों के ठहरने, खाने-पीने की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

युद्धस्तरपर चल रहा है कार्य: सिखसमुदाय जन-जन की आस्था के धन्ना भगत जी महाराज के जन्मोत्सव की तैयारियां युद्घ स्तर पर चल रही है। वही धुंआ कला में धन्ना भगत के जीवन को प्रदर्शित करने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से पैनोरोमा बनाए जाने को लेकर जमीन आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। एसडीएम मनोज शर्मा का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनाए जाने वाले पैनोरोमा के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया जारी है।

पुस्तक का प्रकाशन

Gallery

References

  1. Navhind Lal: Bhakt shiromani Dhanna Jat, Jat Samaj Agra, August 1997
  2. Dr Pema Ram, Jaton ki Gauravgatha, p.20
  3. Thakur Deshraj, Jat Itihas (Hindi), Maharaja Suraj Mal Smarak Shiksha Sansthan, Delhi, 1934, 2nd edition 1992 page 611.
  4. Thakur Deshraj, Jat Itihas (Hindi), Maharaja Suraj Mal Smarak Shiksha Sansthan, Delhi, 1934, 2nd edition 1992 page 611.
  5. Guru Granth Ratnavali. Patiala, n.d.
  6. Sahib Sirigh, Bhagat-BaniSati`k, vol. I. Amritsar, 1979
  7. Navhind Lal: Bhakt shiromani Dhanna Jat, Jat Samaj Agra, August 1997

External link

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