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25 September
is the birthday of Chaudhary Devi Lal

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Humayunpur

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Also see Himayunpur and Humayupur


Humayunpur (हुमायूंपुर) is a village situated in south Delhi in the center of safderjang and Mohammadpur. It was founded by Roopa Ram and Ratiya Singh Tokas, descendants of Ruddh Singh Tokas in the year 1675. The Bhat records of Phogat clan indicate that village was founded by Ch. Devi Singh Phogat in year 1683.

Jat Gotras

There are people of many gotras like Tokas gotra, Mahalwal gotra, Phogat gotra , Gehlot gotra and GURSEY gotra.

The population in decreasing order is Phogats, Tokass , Mahalwals and GURSEY.

This village is a modern village of Jat's.

History

Tokas Jats, descendants of Chaudhary Ruddh Singh Tokas, moved from Munirka village to Humayunpur (हुमायूंपुर), Mohammad Pur (मोहम्मदपुर), Mukhmailpur (मुखमैलपुर), Silanigaon (सिलानीगांव), Lahiki Hasanpur (लहिकी हसनपुर) (Near Hodal) on Palwal to Sohana Road. They are in villages Tawadu (तावडू ), Gudda Guddi (Nihalgarh), Shekhpura (शेखपुरा), Vasi (वसी), Pataudi Goyala (पटौदी गोयला) , Rawata (रावता), Ambarahi (अम्बराही) , Galampur (गालमपुर) , Munda (मुण्डा), Kheda (खेड़ा), Jhad Setli (झाड़ सेतली), Dhul Siras (धूल सिरस), (Nazafgarh Kharkhadi Raund), Safiabad (सफिआबाद), Kharkhoda, Sonipat etc villages.[1]

भाट ग्रन्थ की पुस्तक के अनुसार

भाट ग्रन्थ की पुस्तक के अनुसार टोकस जाटों का वंश - चन्द्रवंश, कुल-यदुकुल, मूल गोत्र-अत्री, शाखा-टोकस, किला-तहन गढ़ (राजस्थान), तख्त (मुख्यस्थान) - मथुरापुरी , निशान-पीला, घोड़ा-मुद्रा , कुल देवी- योगेश्वरी , देवता-कृष्ण, मन्त्र - पंचाक्षरी, पूजन व शस्त्र-तलवार, नदी-यमुना, वेद-यजुर्वेद, उपवेद-धनुर्वेद, वृक्ष-कदम्ब, निकास - टांक टोडा से और पहला पडाव रावलदी (हरयाणा) है. [2]

चरखी दादरी के पास रावलदी की भागा/भागवती नाम की कन्या बहरोड़ ब्याही थी. बहरोड़ में भागा को वहां के बहुसंख्यक समाज के लोग तंग करते थे. भागा ने रावलदी से अपने भाई राजा उदय सिंह टोकस व राजा रुद्ध सिंह टोकस को बुलवाया. उन्होंने बहुसंख्य तंग करने वाले समाज को परास्त किया. भागा के नाम से अलग गाँव बसाया. जो आज भागी बहरोड़ के नाम से प्रसिद्द है. [3]

अपनी बहन भागा की रक्षा के लिए टोकस वंश के लोग भागी में रहने लगे. तबसे गाँव भागी में टोकसों का खेड़ा आबाद हुआ.

कुछ समय पश्चात चौधरी उदय सिंह और चौधरी रुद्ध सिंह की पत्नियों ने कहा कि आपकी बहन अब सुरक्षित है और सुख से रह रही है. अतः अब हमें बहन के घर से प्रस्थान करना चाहिए. बहन के पास कुछ आदमी छोड़कर वे वहां से निकले. रस्ते में चले जा रहे थे की उनकी गाड़ी का धूरा टूट गया. उन्होंने वहीँ पड़ाव डाला.

पंडित चन्द्रभान वैद्य (भट्ट) के अनुसार छोटी रानी (रुद्ध सिंह की पत्नि) के यह कहने पर कि जेठ जी को थोडा हटकर आगे डेरा डालने के लिए कह दें तो राजा उदय सिंह ने इस बात को ताना मानकर पीलीभीत चले गए. वहां से पुछवाया कि छोटी रानी से पूछो कि क्या और आगे जाऊं. इस तरह राजा उदय सिंह पीलीभीत में बस गए.

रुद्ध सिंह अकेले रह गए. वहां से नाहरपुर आकर बसे. वहां की जमीन ख़राब होने के कारण बाबरपुर आकर बसे, जिसे हार्डिंग ब्रिज कहते हैं. यहाँ से चलकर रुद्ध सिंह टोकस स्थाई रूप से मुनीरका में आकर बस गए. भट्ट ग्रन्थ के अनुसार विक्रमी संवत १५०३ सन १४४६ वरखा सावन सुदी नवम तिथि दिन सोमवार को रुद्ध सिंह ने मुनिरका गाँव बसाया. रुद्ध सिंह टोकस का गाय, भैंस का दूध का कारोबार था. और वे मनीर खां नामक पठान से भी दूध का कारोबार करते थे. मनीर खां पठान रुद्ध सिंह का कर्जदार था. वह कर्जा नहीं पटा पाया. इसलिए मनीर खां ने वीरपुर, रायपुर, उजीरपुर तीनों पट्टियां रुद्ध सिंह को दे दी. इस तरह से वे इस जागीर के मालिक बने. मनीर खान को ये जागीरें बादशाह मुबारक शाह ने इनाम में दी थी. [4]

उस समय मुनीरका गाँव की जमीन ७००० बीघे थी. जिसमें आज आर. के. पुरम, जे. अन. यू, डी. डी. ए. फ्लेट , बसंत कुञ्ज, बसंत बिहार आबाद हैं. सन १६७५ विक्रम संवत १७३२ में रुद्ध सिंह के वंशज रूपा राम/रतिया सिंह टोकस मुनिरका से हुमायूंपुर गाँव जा बसे और उसके पश्चात् १७१५ विक्रम संवत १७७२ में तुला राम टोकस मुनीरका से मोहम्मदपुर गाँव जा बसे. [5]

आज मुनिरका गाँव में टोकस वंश के २०० परिवार हैं जिनकी आबादी २० से २५ हजार के बीच है. अरावली पर्वत के अंचल में बसा मुनिरका गाँव प्राकृतिक नालों के बीच स्थित है. पहले यहाँ बीहड़ जंगल हुआ करते थे. मुनिरका गाँव में सिद्ध मच्छेन्द्र यती गुरु गोरख नाथ सिद्ध बाबा से सम्बद्ध गाँव के इष्टदेव मुनिवर बाबा गंगनाथ जी का प्राचीन मंदिर है. बाबा गंगनाथ जी ने यहाँ वर्षों तपस्या करके जिन्दा समाधि ली थी. बाबा गंगनाथ जी की समाधि, इनका भव्य मंदिर और इनकी धूनी आज भी गाँव का हृदय स्थल है. मंदिर के पास एक प्राचीन भव्य तालाब है. [6]

हुमायूंपुर में फोगाट

वीरेंद्रसिंह फोगाट (9891474827, Email:<virendersphogaat1985@gmail.com>) ने यह वंशावली भेजी है, जो गढ़ गंगा के भाट की पोथी से है। इसके पेज तीन पर लिखा है कि चौधरी देवीसिंह फोगाट ने हुमायूंपुर गाँव 1683 में आबाद किया। इसी कारण इस गाँव में दादा भुईया जी का एक मंदिर है जिसे सभी लोग पूजते हैं। यदि यह गाँव टोकस लोगों द्वारा आबाद किया गया होता तो यहाँ भी बाबा गंगनाथ जी का मंदिर होता जैसा कि मुनिरका और मुहम्मदपुर दोनों में है।

गाँव के बुजुर्गों से सुना है कि मुहम्मदपुर की एक बेटी (गोत्र:टोकस) ससुराल से लड़कर अपने माता-पिता के पास गाँव में रहने के लिए आ गई। पिता ने उसको बोला कि बेटी पिता के पीछे पीहर आये। यह बात सुनकर वह रोती हुई गाँव के बाहर आ गई। हुमायूंपुर गाँव की सीमा के पास गहलोत के खेत पर कुछ बुजुर्ग बैठे थे जिन्होने रोने का कारण पूछा। बेटी ने सारी बात बुजुर्गों को बता दी। एक गहलोत गोत्र के बुजुर्ग ने बेटी को कुछ बीघा जमीन देदी। वह वहाँ रहने लगी। बेटी के भाई-बंद समय-समय पर उसका हाल जानने आते रहे। गाँव की जमाबंदी से भी यह स्पष्ट होता है कि टोकस परिवार को गहलोत परिवार ने जमीन दी।

हुमायूंपुर के फोगाट गोत्र की वंशावली

External links

References

  1. Jat Samaj Patrika, Agra, October-November 2001, p.9
  2. Jat Samaj Patrika, Agra, October-November 2001, p.9
  3. जाट समाज पत्रिका:आगरा, अक्टूबर-नवम्बर २००१, पृष्ठ ९
  4. जाट समाज पत्रिका:आगरा, अक्टूबर-नवम्बर २००१, पृष्ठ ९
  5. जाट समाज पत्रिका:आगरा, अक्टूबर-नवम्बर २००१, पृष्ठ ९
  6. जाट समाज पत्रिका:आगरा, अक्टूबर-नवम्बर २००१, पृष्ठ १७

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