Jat Bazar Sikar

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Jat Bazar Sikar

Jat Bazar Sikar is probably only market established by Jats in Sikar, Rajasthan.

Founder

It was founded by Shiv Baksha Ram Mavliya of village Bidoli, Sikar, Rajasthan. He was a businessman & worked in Kolkata (Bengal). After that he came back to Sikar HQ & opened a shop of Grain & Ghee etc. At present the market called Jat Bazar & his old house is also situated there in front of Surajpole Gate & near by the Head Post Office of Sikar HQ. He gave the only name of 'Jat Bazar' in Rajasthan State. Later on the Government of Rajasthan had published the name of Jat Bazar in the Gazette Notification No. F 10(99)/Krishi-5/66 dtd. 18th July, 1967 page No. 601(3). He expired on 3rd July, 1993. His five sons are residing in Sikar HQ & elder son is Chaudhary Ganapat Ram Mavliya & his Mobile No. is 919461538221.

जाट बाजार सीकर

केवल राजस्थान ही नहीं अपितु सम्भवतः पूरे देश में "जाट बाजार" नाम से यह अकेला बाजार है जो सीकर जिला मुख्यालय पर 1937 ईस्वीं में यानि आज से 80 वर्ष पूर्व ग्राम बिडोली के चौधरी शिवबक्ष राम मावलिया द्वारा स्थापित यह हुवा, उनकी हवेली सीकर के प्रधान डाकघर के पास आज भी गर्व से इसी बीच बाजार खड़ी है । इसके नामकरण की गजट अधिसूचना इसकी स्थापना के पूरे 30 वर्ष बाद राजस्थान सरकार द्वरा 18 जुलाई, 1967 को अधिसूचित की गई जसमें इसका सीमा ज्ञान इस प्रकार कराया गया है:- "सूरजपोल दरवाजे से पूर्व की ओर तेलियों के कुए व सब्रशाह बानी की कब्र तक की सड़क के दोनों ओर, जाट बाजार के चौराहे से स्टेशन रोड पर बने लक्ष्मी भवन तक की सड़क के दोनों ओर तथा यहीं से बावड़ी गेट तक की सड़क के दोनों ओर, तबेला बाजार में तनसुखराम लक्ष्मीनारायण की हवेली तक की सड़क के दोनों ओर तथा सूरजपोल दरवाजे से गोविन्दराम रामदेव की दुकान तक की सड़क के दोनों ओर" यह है इस ऐतिहासिक बाजार की सीमा।

जाट बाजार खाटू श्यामजी: इसके अलावा एक जाट बाजार खाटू श्यामजी में भी कहा जाता है मगर उसकी कोई गजट अधिसूचना संज्ञान में नहीं है तथापि एक नया "जाट बाजार" रींगस के समाज बंधुओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 11 के मिल तिराहा बस स्टेण्ड पर गत वर्ष बना कर नगर पालिका रींगस से नामांकित करवाया है परंतु 80 साल पुराना सीकर का ऐतिहासिक जाट बाजार जिले की 56% जाट आबादी की असल गौरवशाली धरोहर है ।

Author

Bhanwar Lal Bijarnia

References


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