Rana Ram Singh

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Rana Ram Singh

Rana Ram Singh (b.1883, r. 1901-d.1911) was the Jat ruler of princely state Dholpur (1901 - 1911) in Rajasthan, India. He was from Bamraulia gotra of Jats. He was born on 26th May 1883 and succeeded Rana Nihal Singh in 1901 after his death. He was not of age when ascended to the throne. He got full rights in March 1905.

He married with the daughter of the Maharaja Nabha. He was educated at Mayo College, Ajmer; later joined the Imperial Cadet Corps.

During his rule the state was divided into six parganas namely, 1. Dholpur, 2. Rajakhedi, 3. Badi, 4. Basaidi, 5. Mania and 6. Kulari. This way the administration of the state was improved. He died on 2nd April 1911. His successor was Rana Udaybhanu Singh.

महाराज रामसिंह (r.1901 - 1911)

ठाकुर देशराज लिखते हैं कि महाराज निहालसिंह के बाद राजगद्दी पर उनके बड़े बेटे रामसिंह बैठे। इन्होंने लगभग ग्यारह वर्ष राज किया। इनके समय में राज्य में साधारण सुधार हुए। नए ढंग के कानूनों का प्रचलन जो कि ब्रिटिश-भारत में हो चुका था, इनके राज्य में भी होने लगा। धौलपुर की भूमि की प्राकृतिक बनावट बड़ी बेढंगी है। सैकड़ों मील भूमि वैसे ही पड़ी रह जाती है। ‘राजपूताना गजेटियर’ में धौलपुर की खेती के योग्य भूमि 256,985 एकड़ बताई है। बंजर भूमि जिस पर खेती नहीं होती 234,862 एकड़ लिखी है। कुछ भूमि ऐसी भी ‘गजेटियर’ ने बताई है कि जिस पर कभी फसल हो जाती है, कभी नहीं। ऐसी भूमि 88,923 एकड़ है। महाराणा रामसिंह के समय तक राज्य छः परगनों में विभक्त हो चुका था।


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-692


वे परगने मनिया, कुलारी, बारी, बिसहरी, राजाखेड़ा और धौलपुर के नाम से मशहूर थे। उनके समय राज्य की आय ग्यारह लाख रुपये से अधिक न थी। खास शहर धौलपुर की आबादी भी शनैः-शनैः बढ़ रही थी। उनके समय में लगभग बीस हजार जनसंख्या धौलपुर की थी। इनको सरकार ने के. सी. आई. ई. का खिताब भी दिया था। सन् 1911 ई. में महाराज रामसिंह जीमहाराज रामसिंह का स्वर्गवास हो गया। उनके कोई पुत्र न था। इसलिए उनके छोटे भाई श्री उदयभानसिंह राजसिंहासन पर बैठे। उस समय आप भी नाबालिग थे। इसलिए राज्य का प्रबन्ध पोलीटिकल एजेण्ट व कौंसिल के द्वारा होने लगा।

References

  • Dr. Ajay Kumar Agnihotri (1985) : "Gohad ke jaton ka Itihas" (Hindi)
  • Dr. Natthan Singh (2004) : "Jat Itihas"
  • Jat Samaj, Agra: October-November 2004
  • Dr. Natthan Singh (2005): Sujas Prabandh (Gohad ke Shasakon ki Veer gatha – by Poet Nathan), Jat Veer Prakashan Gwalior

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