Ranjit Singh Sihag

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Ranjit Singh Sihag (1526) was a Sihag clan ruler of Hisar during the period of Babar (1483 – 1530). He is said to be originator of Bolan branch of Sihags.

सिहाग गोत्र की बोलान शाखा

सिहाग गोत्र की बोलान शाखा का विकास बाबर (1483 – 1530) के समय में रणजीत सिंह सिहाग से हुआ। पानीपत के युद्ध (1526) के समय उनकी एक प्रेयसी बेगम रास्ता भटक कर रतिया नामक स्थान पर पहुँच गयी। रंजीत सिंह सिहाग को जब पता लगा कि एक नारी भटक कर आई है तो उसको अपने परिवार में शरण दे दी। वहीँ बेगम ने एक पुत्र को भी जन्म दिया बताते हैं जो आगे चलकर बाबर के वंश का किसी क्षेत्र का महत्वपूर्ण शासक बना। बाबर जब वापस पंजाब होकर कांधार जा रहा था तो उसको रानी का पता चला। खुश होकर उसने रणजीत सिंह को कुछ मांगने के लिए कहा। रणजीत सिहाग ने एक नगाड़ा माँगा। रणजीत सिहाग ने शरणागत की रक्षा कर कुल को यशस्वी बनाया। समाज ने माँगने की बात पर प्रतिक्रिया स्वरुप एकत्र होकर उसे बोला की संज्ञा दी जो बोलान का अपभ्रंश है। उसके वंशज बोलान कहलाये। रतिया बोलान, सिवानी बोलान, सिसाय बोलान गाँव सिहाग गोत्री हैं। ये रणजीत सिंह के वंशज माने जाते हैं। रणजीत सिंह को बाबर ने नगाड़ा बजाने कि स्वीकृति दी थी जो उस काल में बड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक थी। इसीलिए आज समाज में विवाह के अवसर पर स्त्रियां गति है - "नगाड़ा बाज्या हे रणजीत का म्हारै हाकिम आया।"[1]

सन्दर्भ

  1. जाट समाज, अक्टूबर,2013,p.26

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