Roria Singh Jat

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Roria Singh Jat was Sinsinwar Jat of Bharatpur who organized Jats to oppose Mughal imperial officers appointed by Shahjahan in 1635.

इतिहास

योद्धा रोरियासिंह जाट - सिनसिनवार गोत्री जाट, जिसने अपने ब्रज क्षेत्र में जाट खापों को इकट्ठा करके सबसे पहले सन् 1635 में मुगल शासन का विरोध किया।[1]


दलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

श्रीकृष्ण जी से 82वीं पीढ़ी तथा सूये (सोदेव) से 13वीं पीढ़ी में रौरियासिंह हुआ। उसके चार पुत्रों में से एक का नाम सिंघा (उदयसिंह) तथा दूसरे का नाम विजय था। उस विजय का पुत्र मदुसिंह था। इस मदु (मदुसिंह) को महाकवि सूदन ने ‘महीपाल’ तथा ‘शाह का उरसाल’ (शाहजहां के हृदय का कांटा) लिखा है। वह वीर साहसी तथा क्रान्तिकारी जाट जमींदार था। उसने सिनसिनी गांव का ठाकुर (मुखिया) पद प्राप्त किया और शाही फौजदार करोड़ी सागरमल का विरोध करके डूंग तथा समीपवर्ती अन्य जाटपालों में यथेष्ट सम्मान तथा प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली थी। उसने अपने चाचा सिंघा के नेतृत्व में एक किसान संगठन तैयार कर लिया। इन्होंने कांमा, पहाड़ी, कसबाखोह आदि परगनों के खानजादौं मेवाती, जाट, गुर्जर तथा अन्य नवयुवकों के साथ मिलकर आगरा तथा दिल्ली के मध्य खालसा (सरकार के अधिकृत) गांव तथा शाही मार्गों में काफिलों तथा व्यापारियों के माल को लूटना शुरु कर दिया। इससे शाही मार्ग बन्द हो गये।.....[2]

External links

References

  1. Asli Lutere Koun/Part-I,p.64
  2. II (Page 622-623)

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