Srigupta

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Srigupta (240-280AD) is the first person who started the Gupta Empire. The origins of the Guptas are shrouded in obscurity. KP Jayaswal and Bhim Singh Dahiya have proved that the Guptas were Jats. [1]Nothing certain is known about the rise of this dynasty. Only this much is known that a person named Srigupta took advantage of the confusion that prevailed in the country after the fall of Kushan Empire and declared himself the ruler of Magadha. Historians write that probably he belonged to a low caste but gradually rose to the position of an independent ruler. He was followed by his son Ghatotkacha. The most likely date for the reign of Srigupta is c. 240-280 CE His successor Ghatotkacha ruled probably from c. 280-319 CE In contrast to his successor, he is also referred to in inscriptions as 'Maharaja' .

दिलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

श्रीगुप्त (240 ई० से 280 ई० तक)

महान् गुप्त सम्राटों के पूर्वजों में पहला नाम, जो हमें प्राप्त हुआ है, श्रीगुप्त का है। इलाहाबाद के स्तम्भ लेख में उसे समुद्रगुप्त का दादा बताया है। चीनी यात्री ई-त्सिंग (I-tsing), जो भारत में सातवीं शताब्दी में आया, लिखता है कि श्रीगुप्त ने मृगशिखवन के पास चीनी यात्रियों के लिए एक मन्दिर बनवाया था और उसकी रक्षार्थ 24 गांव दिये थे। कुछ लेखकों के मत अनुसार श्रीगुप्त का अपने आपको ‘महाराज’ कहना यह स्पष्ट करता है कि वह एक स्वतन्त्र सम्राट् नहीं था। उसके शासनकाल के सिक्के भी प्राप्त नहीं हैं। डा० जायसवाल के कथनानुसार, उसने भारशिवों के अधीन प्रयाग के पास एक छोटे से राज्य पर शासन किया। उसका शासनकाल सन् 240 ई० से 280 ई० तक का था।[1]



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