Rooniya

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Rooniya (रूणिया) is a village in tehsil Jayal of Nagaur district in Rajasthan , India.

Location

Origin

The Founders

History

....गोदारों का सरदार पाण्डु जो सेखसर में रहता था और रूनियां का सरदार जो उससे दूसरे दर्जे पर था, गोदारा जाटों की सभा ने इन दोनों को बीका के पास अधीनता स्वीकार करने की बात तय करने को भेजा। उन्होंने बीका के सामने निम्न प्रस्ताव रखे-

  • 1. जोहिया आदि दीगर फिरकों के मुकाबले में हमारी मदद की जाये,
  • 2. पश्चिमी सीमा की हिफाजत रखें,
  • 3. हमारी जमात के अधिकार और लाभों में कोई हस्तक्षेप न किया जाये, अर्थात् सुरक्षित रखें।

‘भारत के देशी राज्य’ नामक इतिहास में लिखा है कि -

“बीका ने उक्त प्रस्ताव स्वीकारते हुए कहा था - ‘मैं’ तथा मेरे उत्तराधिकारी किसी भी समय तुम्हारे अधिकारों में हस्तक्षेप न करेंगे। और जब तक इस तरह राजतिलक न दिया जाएगा, तब तक राजसिंहासन सूना समझा जाएगा।”

मुन्शी ज्वालासहाय जी ‘वाकए-राजपूताना’ में आगे लिखते हैं -

'इस पर गोदारों ने अपने इलाके में महसूल धुआं फी घर एक रुपया और जोता जमीन फी सौ बीघे पर दो रुपया लगान वसूल करने का अधिकार बीका को दिया।

'इस पशुपालन गिरोह के इस तरह इन्तकाल आतअत करने से शौक आजादी जो आक्सस और जगजार्टिस के किनारे से हिन्दुस्तान के जंगल तक उनके साथ रहा, बखूबी अयां है और अगर्चे उनकी हुकूमत मालिकाना बिलकुल चली गई है लेकिन उनका राजपूत आकाए, उनके नामुमकिन उल-इन्तकाल वापोती यानी


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-622


हुकूक मौरुसी पर दस्तन्दाजी करना चाहें तो अब भी खूरेजी पर मुस्तैद हैं।1

गौदारों की अनबन से बीका को बिना लड़ाई-झगड़ा किए भू-भाग व हुकूमत मिल गई। ऐसा बहुत कम होता है और कुछ एक रस्में जो बतौर यादगार तरज हसूल हुकूमत मालिकाना कदमि वाशिन्दगान मुल्क से कुल हिन्दुस्तान के राजपूतों में जारी है असलियत की जानकारी के लिए बड़े काम की है। फर्मान रवायां मेवाड़ का मुल्क के कदीम वाशिन्दगान यानी भीलों से तिलक कराना आमेर में खजाने व किलआत का मैनों की हिफाजत व अहतमाम में रहना। कोटा-बूंदी का मदीक मालिकान हाडौती के नाम से मासूम होना और औलाद बीका का जाटों से टीका कराना ऐसी रस्में हैं कि उनके सबब से कदीम मालिकान सर जमीन के हकूक और तर्ज हसूल रियासत फर्मान वालिया हाल सहू नहीं हो सकते। आज तक दस्तूर जारी है कि बीका की औलाद में से कोई तख्तनशीन होता है तो पांडु खानदान का कोई शख्स उसके राजतिलक करता है। उस जाट को राज पच्चीस अशर्फियां देता है। अलावा इसके जिस जमीन को बीका ने अपनी राजधानी बनाने के लिए पसन्द किया था, वह एक जाट की मुल्क-मौरूसी थी। उसने भी दावा किया कि शहर के नाम के साथ मेरा नाम भी शामिल किया जाये। उसका नाम नेरा था, इसलिए बीका और नेरा के नाम से शहर का नाम बीकानेर रखा गया। दवामी यादगार मिल्कित के सिवा शेखसर और रूनियां के जमींदार होली और दशहरा पर रईस और उसके सरदारों के टीका करते हैं। रूनियां का सरदार अपने हाथ में नकरई तस्त व प्याला लेता है और शेखसर वाला रईस की पेशानी पर तिलक करता है। रईस इनको एक अशर्फी और पांच रुपये पेश करता है। अशर्फी शेखसर वाला ले लेता है और रुपये रूनियां वाले के पास रहते हैं। अन्य सरदार भी इसी तरह अपनी-अपनी हैसियत के अनुसार नजर करते हैं।”[1]

Jat Gotras

Population

Notable Persons

  • B. L. Royal - SDE BSNL, Date of Birth : 20-July-1969. VPO - Runia ,Teh- Jayal Dist.- Nagaur, Present Address : 2/282-283, Rajasthan Housing Board, Nagaur, Rajasthan. Resident Phone Number : 0291-2641335, Mobile Number : 9414001335, Email Address : bl_royal@yahoo.com

External Links

References

  1. Jat History Thakur Deshraj/Chapter IX (Page 622-623)
  2. Jat History Thakur Deshraj/Chapter IX (Page 622-623)

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