Balaghat

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Map of Balaghat District‎

Balaghat (बालाघाट) is a city and district in Madhya Pradesh.

Tahsils in Balaghat District

Villages in Balaghat tahsil

Jat Gotras

History

दलीप सिंह अहलावत[1] लिखते हैं कि कुषाणशक्ति के अस्त और गुप्तों के उदय से पूर्व नागशक्ति शैव धर्मानुयायी रूप से पुनः उदित हुई। इस समय ये लोग शिवजी का अलंकार नाग (सांप) अपने गले में लिपटाकर रखने लगे थे। इन नवोदित नागवंशियों ने शिवलिंग को स्कन्ध पर धारण कर शिवपूजा की एक नई परम्परा स्थापित की थी। अतः इनका नाम भारशिव प्रसिद्ध हो गया। इस नाम को स्पष्ट करनेवाला एक लेख बालाघाट में मिला है। इसका उल्लेख ‘एपिग्राफिका इण्डिया’ भाग 1 पृष्ठ 269 तथा ‘फ्लीट गुप्त इन्स्क्रिप्शन्स’ 245 में इस प्रकार किया है -

“शिवलिंग का भार ढोने से जिन्होंने शिव को भलीभांति सन्तुष्ट कर लिया था, जिन्होंने अपने पराक्रम से प्राप्त की हुई भागीरथी गंगा के पवित्र जल से राज्याभिषेक कराया और जिन्होंने दश अश्वमेध यज्ञ करके अवभृथ स्नान किया था, इस प्रकार उन ‘भारशिव’ महाराजाओं का राजवंश प्रारम्भ हुआ।”

Balaghat Inscription of Bharashiva people

Bharashiva gotra started from their ancestral people of Nagavansh who started the new system of worship of Shiva with sivalinga carrying on shoulders. This fact is derived from an Inscription of Bharashiva people found at Balaghat mentioned in Epigraphia Indica Vol.I. [2][3] [4]

दिलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

.....नागवंशी भारशिवों की शक्ति का उदय ऐसे ही अन्धकारकाल में हुआ जबकि भारत देश की कोई सत्ता अखिल भारतीय शासक रूप में सामने न थी। वायु पुराण के लेख अनुसार सात नाग राजाओं द्वारा पद्मावती (ग्वालियर में), कान्तिपुर (मिर्जापुर में) और मथुरा पर शासन किया गया। यह लेख कुषाण शासन के अन्त और गुप्तवंश के उदय के मध्य के लिखे हुए हैं। इसी समय शिव के प्रति बढ़ती हुई श्रद्धा का प्रदर्शन करने के लिए नागवंशियों ने ‘भारशिव’ नाम धारण करके जनता के समक्ष अपने आपको नवीन रूप में प्रस्तुत किया। इस नाम से प्रसिद्धि पाने के कारणों पर बालाघाट की चमक प्रशस्ति[5] का लेख पर्याप्त प्रकाश डालता है। उसमें लिखा है कि शिवलिंग का अपने कन्धे पर भार ढोने से जिन्होंने भलीभांति शिव को सन्तुष्ट कर दिया था - जिन्होंने अपने पराक्रम से प्राप्त की हुई भागीरथी गंगा के स्वच्छ जल से राज्याभिषेक कराया और जिन्होंने अश्वमेध करके अवभृथ-स्नान किया था, इस प्रकार के भारशिवों के महाराजा द्वारा नागवंश का पुनरुत्थान किया गया। इनके राजा शिवनन्दी ने पद्मावती का शासन करते हुए कनिष्क से पराजय पाई थी। [6]

Notable persons

External links

References


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