Harshapura

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.)

Harshapura (हर्षपुर) is an ancient historical place in Mewar region of Rajasthan.

Variants

  • Harshapura (हर्षपुर), मेवाड़, राज., (AS, p.1012)
  • Harshapur (हर्षपुर)

Location

History

Dasharatha Sharma [1] provides list of Towns and Villages of Chauhan Dominions which includes Harshapura, identified with Harsha of Harsha Inscription.


The Ahar Inscription of 977 AD and the Saraneshwara Temple Inscription of 953 AD indicate that ...There is one Allata (951 AD) in Guhil dynasty of Mewar who married Huna king's daughter Hariyadevi, who founded Harshapura village.

हर्षपुर

विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है ...हर्षपुर मेवाड़ में एक प्राचीन स्थान है जिसका उल्लेख इंडियन एंटिक्वेरी[3] में है। विसेंट स्मिथ के अनुसार यह नगर मेवाड़ अथवा मारवाड़ के किसी हर्ष नामक नरेश के नाम पर प्रसिद्ध हुआ होगा। संभवतः यह वही हर्ष है जिसका उल्लेख तिब्बत के बौद्ध इतिहासकार तारानाथ ने किया है।

चितवर

विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...चितवर राजस्थान का एक प्राचीन नगर था, किंतु अब इसका अभिज्ञान अज्ञात है। इसका उल्लेख तिब्बत के इतिहास लेखक तारानाथ ने मारवाड़ के किसी राजा हर्ष के संबंध में किया है। हर्ष ने चितवर में एक बौद्ध विहार का निर्माण करवाया था, जिसमें एक सहस्त्र बौद्ध भिक्षुओं का निवास था। संभवत: 'इंडियन एंटिक्वेरी' [5] में उल्लिखित हर्षपुर भी इसी हर्ष के नाम पर बसा हुआ नगर था। इस राजा हर्ष का समय 7वीं शती ई. माना गया है।

आहड़ का शक्तिकुमार का लेख 977 ई.

यह लेख टोड को मिला था.[6] सम्भवत: वह इसे इंगलैण्ड ले गया. यह वि.सं. 1034 वैशाख सुदी 1 का है. इसमें शक्तिकुमार को प्रभुशक्ति, मंत्रशक्ति और उत्साह शक्ति से सम्पन्न बताया गया है. इसमें यह भी उल्लेखित है कि शक्तिकुमार का निवास स्थान आहड़ था. इस लेख से शक्तिकुमार की राजनीतिक प्रभुता तथा आहड़ की आर्थिक सम्पन्नता का बोध होता है. इस लेख में अल्लट की माता महालक्ष्मी का राठौड़ वंश की होना तथा अल्लट की राणी हरियदेवी का हूण राजा की पुत्री होना और उस राणी का हर्षपुर गांव बसाना अंकित है. इस लेख में गुहदत्त से शक्ति कुमार तक पूरी वंशावली दी है जो मेवाड़ के प्राचीन इतिहास के लिये बड़े काम की है. इस लेख में वर्णित शक्तिकुमार की राजनीतिक प्रभुता आहड़ के देवकलिका वाले शिलालेख से प्रमाणित होती है. एक अन्य लेख द्वारा हमें यह सूचना मिलती है कि राजा नरवाहन के अक्षपटलिक श्रीपति के दो पुत्र मत्तट और गुंदल थे. ये दोनों भाई शक्तिकुमार की दोनों भुजाओं के समान थे. यह राजधानी एक प्रकार से सैनिक छावनी थी. इसलिये प्रशस्तिकार ने इसके लिये ’कटक’ शब्द का प्रयोग किया है. ये दोनों बन्धु इस कटक के भूषण बताये गये हैं. इससे इनके सैनिक उपयोगिता का आभाष होता है. एक अन्य जैन मन्दिर के सीढी के लगे हुये अपूर्ण शिलालेख से मत्तट का शक्तिकुमार का अक्षपटलाधिपति होना सूचित होता है. उसने राजा की आज्ञा से एक सूर्य मन्दिर के लिये प्रतिवर्ष 14 द्रम देने की व्यवस्था की थी. यह अपूर्ण लेख उदयपुर संग्रहालय में सुरक्षित है.

External links

References

  1. Early Chauhān dynasties by Dasharatha Sharma, Books treasure, Jodhpur. ISBN 0-8426-0618-1. p.348-353, Table-2, S.No.126
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.1012
  3. इंडियन एंटिक्वेरी, 1910, पृष्ठ 187
  4. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.351
  5. इंडियन एंटिक्वेरी, पृ. 187 (1910)
  6. डॉ गोपीनाथ शर्मा: 'राजस्थान के इतिहास के स्त्रोत', 1983, पृ.67 E.I. Vol. 39,p.191