Piploda Ratlam

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Location of Piploda in Ratlam District

Piploda (पिपलोदा) or Piplauda (पिपलौदा) is a village in Ratlam district in Madhya Pradesh. Lalaniya and Latiyar are big jat gotras here.

Jat Gotras

As per Veer Jat Parichayavali, Anand Prakashan Ratlam (Madhya Pradesh), the gotra wise population of Jats, including that of women, living in the village is as under:

History

Om Prakash Saran, Piploda Ratlam

There is a huge beautiful statue of Gajananda Ganesha at Piploda. There is also mataji temple near Piploda. [1]

Piploda was made the capital by Dodiya clan kshatriya Shardul Singh in 1547. There was a strong fort on the top of a hillock. The fort had a ditch on one side surrounded by Khedra nalah. Goddess Chamunda was Kuladevi of the Dodiya rulers. The Dodiya rulers were well protected due to the fort. They never hesitated to challenge the powerful Rajput rulers of Rajasthan. Maharawat Pratap Singh (1673-1708) of Pratapgarh, Rajasthan defeated Dodiya ruler Rawat Bhawat Singh (1663-1703). On accepting his supremacy Maharawat Pratap Singh returned the statehood to Dodiya rulers. Later Dodiya rulers successively ruled under the reign of Yashwant Rao Holker, Jaora Nawab Gafoor Khan, and British rule. [2]

Dodiya is a Jat clan found in Ratlam and Nimach in Madhya Pradesh and Chittorgarh in Rajasthan. It is probably a variant of Dudi Jat Gotra. In Malwa region they are called as Dodiya, Dundi, Dundiya etc. due to local language variation.

There is also a village called Dodiyana (डोडियाना) in Jaora tahsil in Ratlam district in Madhya Pradesh. Its population is 1,184. It probably gets name after Dodiya rulers. It is inhabited by many Jat Gotras, such as Badak 2, Badbadwal 1, Baswana 1, Bhabhariya 6, Bhoot 8, Chautiya 5, Danga 1, Dayla 1, Dhaneriya 1, Dhariya 1, Dhaulya 1, Dudi 3, Gadwar 1, Gaina 2, Ghora 5, Godara 2, Goraya 2, Hagthoria 1, Jewar 1, Kachharia 3, Korwal 1, Kuradiya 2, Lalariya 19, Puniya 1, Randera 1, Suran 37, Tandi 1,

पिपलौदा का प्राचीन दुर्ग

पिपलौदा को डोडिया क्षेत्रीय शार्दूलसिंह ने सन १५४७ में अपने राज्य की राजधानी बनाया. यहाँ एक मजबूत गढ़ ऊँचे टेकरे पर बना है. गढ़ की दीवार में अनेक बुर्ज थे. गढ़ के एक तरफ खाई थी जिसे खेदरा नाला कहा जाता है. इसमें हमेशा पानी बहता रहता है. गढ़ का मुख्य द्वार पूर्व की और है जिसे सुरजपौर दरवाजा कहते हैं. एक बुर्ज में जमीन के अन्दर रास्ता था जो महल के अन्दर से चूल देवी चामुंडा माता के मंदिर के बाहर आँगन में निकलता था. चूल देवी चामुंडा डोडिया सरदारों की देवी थी. नवरात्रि के अवसर पर चूल देवी चामुंडा माता के मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती थी. गढ़ी के अन्दर राम, लक्ष्मण, सीता का सुन्दर मंदिर है. परमार युगीन वास्तु कला का यह सुन्दर नमूना है. पिपलौदा के डोडिया शासक गढ़ी के कारण अपने को सुरक्षित समझते थे. वे बड़े बड़े राजपूताने के शासकों से लोहा लेने में संकोच नहीं करते थे. राजस्थान, प्रतापगढ़ देवसिया शासक महारावत प्रताप सिंह (१६७३-१७०८) ने पिपलौदा शासक रावत भावत सिंह (१६६३-१७०३) को हरा कर विजय प्राप्त की परन्तु राज्य वापद डोडिया शासक को लौटा दिया. कालांतर में डोडिया शासक यशवंत राव होलकर, जावरा नवाब गफूर खां एवं अंग्रेज शासक के अधीन राज्य करते रहे. [3]

पिपलौदा का महल

गढ़ के अन्दर एक विशाल महल था. महल में नीले रंग के कांच लगे हुए थे. अतः उसे कांच महल भी कहते थे. रावत के रहने का स्थान भी महल के अन्दर था. कांच महल के नीचे सिलेखाना (रजकीय शस्त्रागार) था. राजमाता व रानियों के लिए रहने के अलग-अलग कमरे बने हुए थे. उन कमरों के सामने आँगन में सुन्दर फव्वारा बना हुआ था. पानी निकालने के लिए ऊपर से नीचे तक अंडर ग्राउंड नालियां बनी हुयी थी. महल तीन मंजिला था. महिलाओं और रानियों के लिए जालीदार झरोखे बने हुए थे. छोटी रियासत होने के कारण महल के एक भाग में तहसील लगती थी. भग्नावस्था में होते हुए भी गढ़ी एवं कांच के महल के अवशेष प्राचीन वैभव को दर्शाते हैं. [4]

डोडिया शासक

डोडिया गोत्र के लोग वर्तमान में रतलाम जिले के पिपलौदा तहसील में गाँव कंचन खेड़ी में पाए जाते हैं. यह एक जाट गोत्र है. डोडिया गोत्र की उत्पति संभवतः डूडी जाट गोत्र से हुयी है. रतलाम जिले में डूडी जाट गोत्र के काफी लोग पाए जाते हैं. यहाँ पर डूडी को कहीं कहीं डूंडी भी लिखते हैं. कहीं कहीं डूंडिया भी लिखते हैं. डूंडी और डूंडिया रतलाम के अलावा चित्तोड़गढ़ और नीमच जिलों में भी पाए जाते हैं.

Villages in Piploda tahsil

Ajampur Dodiya, Akatwasa, Akyadeh, Amba, Arniya Gujar, Ayana, Bachhodiya, Badayala Chorasi, Badinal, Badoda, Badyala Mata, Badyala Sarwan, Bagiya, Banikhedi, Bara Kheda, Bargarh, Barkhedi, Belara, Bhakar Khedi, Bhamriya, Bhat Kheda, Bhat Khedi, Bilandpur, Borkheda, Chachri, Chandavata, Chhotinal, Chiklana, Chipiya, Dhamedi, Dhaturiya, Duda Khedi (Piploda), Ganeshganj, Gudar Kheda, Halduni, Hariyakheda, Hatnara, Jadwasa, Jaliner, Jethana, Jhajha Khedi, Jhatla, Kabul Khedi, Kalaliya (Piploda), Kalu Kheda, Kamla Kheda, Kanchan Khedi, Kanser, Kesharpura, Kheda Piploda, Khedavda, Kotda, Kushalgdh Amethi, Lasudiya Nathi, Machun, Mamat Kheda, Manan Kheda, Mau Khedi, Mawta, Nandleta, Naulakha, Naveli, Nawabganj, Nipaniya, Padliya Hasan, Padliya Umath, Pancheva, Pindwasa, Pingrala, Pipliya, Piploda Ratlam (NP), Ramgarh, Ranayara, Ranigaon, Rankhet, Rankoda, Richha Dewada, Riyawan, Sabalgarh, Sarsana, Semal Khedi, Shakkar Khedi (Piploda), Sherpur, Shyampura, Sohangarh, Sujapur, Sukheda, Talidana, Thikriya, Ummedpura, Uparwada,

References

  1. Dr Ajit Raizada: Art, Archaeology and History of Ratlam, Sharada Prakashan Delhi, 1992, ISBN 81-85320-14-4, p.116
  2. Dr Ajit Raizada: Art,Archaeology and History of Ratlam, Sharada Prakashan Delhi, 1992, ISBN 81-85320-14-4,p 111
  3. Dr Ajit Raizada: Art,Archaeology and History of Ratlam, Sharada Prakashan Delhi, 1992, ISBN 81-85320-14-4,p 111
  4. Dr Ajit Raizada: Art,Archaeology and History of Ratlam, Sharada Prakashan Delhi, 1992, ISBN 81-85320-14-4, p 112

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