Sawai Madhopur

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Map of Sawai Madhopur District

Sawai Madhopur (सवाईमाधोपुर) is a town and district in Rajasthan.

Variants

  • Sawaimadhopur सवाईमाधोपुर, राजस्थान (AS, p.944)

Location

Sawai Madhopur is located in southeast Rajasthan. It lies on the northern extension of the Vindhyan Plateau. The city is approximately 121 km southeast of Jaipur. To the north of the town is the Banas River.[1] To the east, across the Parbati River, is the large Kuno Wildlife Sanctuary of Madhya Pradesh.

Tahsils in Sawai Madhopur district

Villages in Sawai Madhopur tahsil

Location of villages around Sawai Madhopur

Adoondi, Ajeetpura Sawai Madhopur, Ajnoti, Akodiya, Alanpur (Rural), Anchher, Atoon Kalan, Atoon Khurd, Awand, Badolas, Bagawda, Balwan Khurd, Bandha, Banota, Bhadlao, Bhains Khera, Bhairoonpura, Bhatpura, Bhuderda, Bilopa, Bodal, Borif, Chakeri, Chharoda, Chitara, Dahakwa, Dangarwara, Dhanoli, Dheeroli, Dhingla Jatwara Khurd, Dhoonda, Dhumon Kalan, Dhumon Khurd, Dobra Khurd, Dolada, Dondri, Dubbi Bidarkha, Dubbi Khurd, Dubra Kalan, Dumoda, Endwa, Gambhira, Garhi, Ghudasi, Gongor, Gothra, Hajjam Kheri, Halonda, Himmatpura, Hindwar, Hingoni, Itawa, Jalpa Kheri, Jamool Khera, Jarawata, Jatwara Kalan, Jeenapur, Juwar, Kailashpuri, Kali Bhati, Kanseer, Karela, Karmapur, Karmoda, Keerpura, Khandoj, Khanpur, Khat Kalan, Khat Khurd, Khatupura, Khawa, Kherla, Kherli Kalan, Kherli Khalsa, Khidarpur, Khijoori, Khilchipur, Khirkhari, Kishanpura, Koshali, Kundera, Kushalipura, Kushtala, Kutalpura Jatan, Kutalpura Maliyan, Lahsoda, Laxmipura, Laxmipura, Lodhipura, Lorwara, Madhosinghpura, Mahu, Makholi, Manrajpura, Mathurapura, Menpura, Mor Doongri, Mui, Mundraheri, Needarda, Nimli Kalan, Nimli Khurd, Ninoni, Niwadi, Olwara, Pacheeplya, Padana, Pancholas, Parli, Peepalwara, Phalaudi, Phoosoda, Qila Ranthambor, Rahitha Kalan, Rahitha Khurd, Ramnagar, Rampura, Ramri, Ramsinghpura, Ranwal, Rawanjna Chaur, Rawanjna Doongar, Sankli, Sawai Madhopur (M), Sawaiganj, Seloo, Sewti Kalan, Sewti Khurd, Sherpur, Shyamota, Shyampura, Shyopura, Shyopura, Sinoli, Soorwal, Sunari, Surang, Tetra, Todra (CT), Uliyana, Vijaipura,

Notable persons

History

Sawai Madhopur was built as a planned city by Maharaja Madho Singh I of Jaipur (1751 – 1768) and is named after him.[2] Construction began on 19 January 1763 and Sawai Madhopur celebrates its foundation day annually.

Near to Sawai Madhopur is the Ranthambore National Park which is 7 km from the railway station and Ranthambore Fort, a UNESCO World Heritage Site. In Sawai Madhopur is the Trinetra Ganesh temple.

Ranthambore Fort was founded by Nagil jat chieftain Ran Mal , hence the name Ranthambore. [3][4][5] Its earlier name was Ranastambha (रणस्तम्भ) or Ranastambhapura (रणस्तम्भपुर). It was associated with Jainism during the times of Prithviraja I of Chahamana dynasty in 12th century. Siddhasenasuri, who lived in 12th century has included this place in the list of holy Jaina tirthas. In Mughal period a temple of Mallinatha was built in the fort. [6]

Ran Mal Jat founded this place by putting a stambh (pillar) at the location of present Ranthambore. He challenged the neighbouring rulers for battle. The area around Ranthambore was ruled by Gora and Nagil Jats two centuries prior to the rule of Chauhans.[7]

Raja Sajraj Veer Singh Nagil (880 to 935 AD) was the most famous ruler of the this small Jat State who headed a small army of 20000 die hard warriors including a calvary of 10000 soldiers to protect his kingdom from invaders.He was the first ruler of Ranthambore who developed and raised infrastructure to make this area worth talking. He is also considered as the founder of the fort, but nobody knows for certainty about the real founder the famous fort.

सवाईमाधोपुर

सवाईमाधोपुर (AS, p.944): राजस्थान में सवाई माधोपुर स्टेशन के निकट ही यह पुराना नगर बसा हुआ है। इसे जयपुर नरेश सवाई माधोसिंह ने बसाया था। ऐसा प्रतीत होता है कि रणथंभौर का प्रसिद्ध गढ़ हाथ आने पर ही इसके निकट यह नगर महाराज ने बसाया था। प्राचीन नगर यद्यपि अब जीर्णशीर्ण दशा में है, किंतु बसाया यह काफ़ी विस्तार से गया था। रणथंभौर का इतिहास प्रसिद्ध दुर्ग यहां से प्रायः छः मील दूर है। सवाई माधोपुर में तीन जैन मन्दिर और एक चैत्यालय है। [8]


रणथंभौर का क़िला

सवाई माधोपुर का इतिहास रणथंभौर क़िले के आस-पास घूमता है। विंध्य और अरावली से घिरे रणथंभौर क़िले का निर्माण रणमल नामक नागिल गोत्र के जाट राजा ने कराया था. राजा सजराज वीरसिंह नागिल (880 to 935 ई.) यहाँ के प्रसिद्ध राजा रहे हैं. [9][10][11]

सवाईमाधोपुर परिचय

पर्यटन स्थल: सवाई माधोपुर राजस्थान के प्रमुख शहरों में से एक है। यह शहर 'रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान' के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस शहर की स्थापना सवाई माधोसिंह प्रथम ने की थी, जो जयपुर के महाराजा थे। 18वीं शताब्दी में महाराजा सवाई माधोसिंह द्वारा इस शहर की स्थापना करने के बाद उन्हीं के नाम पर इस जगह का नाम 'सवाई माधोपुर' पड़ा। यह स्थान केवल राष्ट्रीय उद्यान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। सवाई माधोपुर में हर मंदिर के साथ कोई-न-कोई कहानी जुड़ी हुई है। ख़ूबसूरत वास्तुशिल्प से सजे ये मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते हैं।

रणथंभौर क़िले क़िले की ताकत और दुर्गम रास्ता इसे शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता था, विशेष रूप से दिल्ली और आगरा के शासक यहाँ पहुंचने में असमर्थ लगते थे। क़िले के प्रमुख शासक राव हमीर थे, जिन्होंने 1296 के आसपास यहाँ शासन किया। क़िले का सुंदर वास्तुशिल्प, तालाब और झील इसके निर्माण के कला प्रेम और ज्ञान को दर्शाते हैं। क़िले का प्रत्येक हिस्सा भारतीय संस्कृति और दर्शन का प्रतीक है। क़िले के अंदर ऐतिहासिक महत्व के अनेक स्थान हैं, जसे- तोरण द्वार, महादेव छत्री, सामतों की हवेली, 32 खंबों वाली छतरी, मस्जिद और गणेश मंदिर।

राष्ट्रीय उद्यान: 'रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान' सवाई माधोपुर का प्रमुख पर्यटक स्थल है। यह उद्यान देश के बेहतरीन बाघ आरक्षित क्षेत्रों में से एक है। 1981 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। 392 वर्ग किमी में फैला यह उद्यान अरावली और विंध्य की पहाड़ियों में फैला है। यहाँ स्थित तीन झीलों के पास इन बाघों के दिखाई देने की अधिक संभावना रहती है। बाघ के अलावा यहाँ चीते भी रहते हैं। यह चीते उद्यान के बाहरी हिस्से में अधिक पाए जाते हैं। इन्हें देखने के लिए कचीदा घाटी सबसे उपयुक्त जगह है। बाघ और चीतों के अलावा सांभर, चीतल, जंगली सूअर, चिंकारा, हिरन, सियार, तेंदुए, जंगली बिल्ली और लोमड़ी भी पाई जाती है। जानवरों के अलावा पक्षियों की लगभग 264 प्रजातियाँ यहाँ देखी जा सकती हैं। सर्दियों में अनेक प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं। यहाँ जीप सफारी का भी आनंद उठाया जा सकता है।

गणेश मंदिर: गणेश मंदिर सवाई माधोपुर का प्रमुख आकर्षण है। देश के हर हिस्से से हज़ारों लोग सुख समृद्धि के इस देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।

अमरेश्वर महादेव मंदिर: रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के रास्ते में ख़ूबसूरत पहाड़ियों के बीच पवित्र 'अमरेश्वर महादेव मंदिर' स्थित है। यह स्थान सवाई माधोपुर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट भी है।

संदर्भ: भारतकोश-सवाई माधोपुर

External Links

Gallery

References