Vikrant Sahrawat

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Sergeant Vikrant Sahrawat (B: 1986, d: 27 Feb. 2019) of Bhadani village of Jhajjar district. of Haryana was deployed in J&K when he got martyrdom in an MI-17 chopper crash in Badgam district on 27 February 2019.

News in Media dated 1 March 2019

The Sehrawat household in Bhadani village of Haryana’s Jhajjar is grieving too, but not without pride in their eyes and voice for their son, sergeant Vikrant. Their relatives and neighbours, who have gathered at the house, however, are vehement that Article 370 should be scrapped, so that the long tussle can get over soon.

The 33-year-old officer, the third among four children, joined the IAF in 2005; he got married seven years ago to Suman and has two children — five-year-old Kavya and 18-month-old Vardan. He was posted to Srinagar from Coimbatore four months ago and had resumed duty after a month-long leave just 40 days ago.

His father Krishna, a farmer, said, "Political parties should look for a permanent solution to this issue and, if need be, go into a war with Pakistan to finish everything once and for all; so that mothers of this country don’t keep losing their children.”

Krishna is already determined to serve the country in a war-like situation and wants his second son to join the army too “so that enemies of the country can be taught a lesson”.

Vikrant’s uncle Ashok, a retired army man, seconded Krishna and said, “I am proud of Vikrant. It’s about time we finished this... we all ex-servicemen are ready to go to the border to give Pakistan a befitting reply.”

Sergeant Vikrant's visibly devastated mother, however, couldn’t say much but said he was proud of him.[1]

News in Dainik Bhaskar dated 1 March 2019

News reg. Vikrant Sahrawat.jpg

झज्जर से भदानी 8 किलोमीटर 4 घंटे में पहुंची शहीद की अंतिम यात्रा, सैकड़ों की भीड़ चली साथ

कश्मीर के बडगाम में एमआई-17 हेलिकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए थे झज्जर के भदानी गांव के विक्रांत सहरावत

झज्जर। कश्मीर के बडगाम में बीते बुधवार को एमआई-17 हेलिकॉप्टर क्रैश होने पर शहीद हुए झज्जर के जवान विक्रांत सहरावत का राजकीय सम्मान के साथ शुक्रवार को अंतिम संस्कार हुआ। शहीद की शव यात्रा झज्जर के सिविल अस्पताल से भदानी गांव तक 8 किलोमीटर की दूरी को 4 घंटे में पूरा कर पहुंची। शहीद के छोटे भाई दिशांत ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।

जैसे-जैसे गांव की तरफ बढ़ी अंतिम यात्रा, काफिला जुड़ता गया

बता दें कि शहीद के पार्थिव शरीर को गुरुवार की रात में झज्जर ले आया गया था और सिविल अस्पताल में रखवाया था। शुक्रवार सुबह 8 बजे शहीद की अंतिम यात्रा झज्जर से शुरु हुई। इससे पहले ही लोग बड़ी संख्या में बाइक लेकर पहुंच गए थे। जैसे-जैसे यात्रा गांव की तरफ बढ़ी, एक बड़ा काफिला जुड़ता चला गया। 8 किलोमीटर की दूरी 4 घंटे में पूरी की गई। भारत माता और शहीद विक्रांत अमर रहे के जयकारों से भदानी गांव गूंज उठा। सैकड़ों की संख्या में लोग शहीद के अंतिम दर्शन करने पहुंचे।

12 बजे जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो शहीद के पिता कृष्ण सहरावत, मां कांतादेवी, पत्नी सुमन और बच्चे काव्या और वरदान को बुलाया गया। शहीद विक्रांत को देखकर माहौल गमगीन हो गया। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सभी को सांत्वना दी। इसके बाद श्मशान घाट ले जाया गया, जहां छोटे भाई दिशांत ने मुखाग्नि दी।

इस दौरान वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, विधायक रघुवीर कादियान, कांग्रेस नेता गीता भुक्कल मौजूद रहे।

शहादत से एक दिन पहले मां और पत्नी से हुई थी बात

सार्जेंट विक्रांत सहरावत ने हादसे से एक दिन पहले ही मां और पत्नी से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि यह सेना की ड्यूटी है। यहां कुछ भी हो सकता है। अपना ख्याल रखना। 14 साल पहले विक्रांत इंडियन एयरफोर्स में बतौर टेक्नीशियन भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग असम में हुई। दो माह पूर्व ही कोयम्बटूर से जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग पर आए थे।[2]

External Links

References


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