Bhadaani

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Bhadaani or Bhadani (भदानी, भदाणी) is a medium-size village in Jhajjar district.

Location

The names of neighbouring villages are: Chhudani (छुडाणी), Surakhpur, Chhara (छारा), Kablana (कबलाणा), Dulehra (दुल्हेड़ा), Kherka Gujjar (खेड़का गूजर).

History

Jat gotras

पोरस की जाति

पोरस की जाति संबंधी उल्लेख किसी भी ग्रंथ में नहीं मिलता. इतिहास में पोरस तथा एलेग्जेंडर का युद्ध भारत में एक घटना बनकर रह गया, जिसका उल्लेख इतिहास में एक झलक भर है. ऐसी बहुत सारी घटनाएं इतिहास में हो जाती हैं, परंतु वे इतिहास में लेखकों का अधिक ध्यान आकर्षित नहीं करती. पुरातन पोरस के वंशधारों तथा उसके समान वर्षों से संबंधित लोगों की खोज होनी चाहिए. इतिहास इस विषय में मौन है कि पोरस क्षत्रिय वर्ण में कौन जाति का था. पोरस के नाम के साथ पौरव उपाधि लगाने से यह तो स्पष्ट ही है कि वह पुरू वंशी था, किंतु जाति की गहराई में जाने के लिए ईस्वी पूर्व के इतिहास में पाई जाने वाली जातियों में उसके वंशजों का अन्वेषण किए जाने से जाट क्षत्रियों में आज भी पोरसवाल विद्यमान हैं, जिनको पोरस के नाम पर अपना पूर्वज होने के लिए आज भी अभिमान है. पौरव शब्द में 'व' हटाकर ग्रीक अस (os) जोड़ने से पोरोस तथा बदलकर पोरस बना. पोरस में 'वाल' प्रत्यय जोड़ने पर पोरसवाल अथवा परसवाल बन गया. 'वाल' या 'वाला' का अर्थ है प्रथम शब्द से संबंधित जैसे कर्णवाल, कर्ण से संबंधित है.

रोहतक में स्थित भदानी गांव आधा पोरसवाल जाटों का है. इस गांव के एक वंशधर दिल्ली के पश्चिम की ओर एक पहाड़ी पर बस गए. उनकी परंपरा में धीरजराव बड़े प्रसिद्ध पुरुष हुए. जब दिल्ली की आबादी उसकी चारदीवारी के बाहर चारों ओर बढ़ी तब जहां आज सदर बाजार है, वहां जाटों की आबादी की यह पहाड़ी- धीरज की पहाड़ी के नाम पर प्रसिद्ध हुई.

पोरस के भतीजे को भी ग्रीक लेखकों ने पोरोस/पोरस ही लिखा है. स्ट्रेबों लिखता है कि इंडिया के पोरोस/ पोरस नाम के दूसरे राजा ने रोमन सम्राट अगस्टस सीजर की कोर्ट में अपना राजदूत भेजा. अतएव ग्रीक लेखकों के अनुसार पोरोस न तो किसी व्यक्ति का नाम, न ही किसी राजवंश का नाम है. यह जाति/वंश का नाम है जो इंडिया के जाटों में पाया जाता है.

पारसियों के धर्मग्रन्थ अवेस्ता में इस जातिवंश को पोरु लिखा है. पोर, पौर तथा पुरु सभी शब्द एक ही हैं, अंतर स्थान तथा भाषा भेद के कारण है. स्थान तथा भाषा परिवर्तन के कारण शब्द का उच्चारण बदल जाता है जैसे वोट बंगाल में भोट, हिंदी में चक्रवर्ती बंगाल में चक्रबोर्ती जैसे हिंदी में पोरस तथा ग्रीक में पोरोस. परसवाल में है प, फ में बदल जाता है जैसे पत्थर से फत्थर. अतएव परसवाल से ग्रामीण भाषा में फरसवाल बन गया. भारतवर्ष में किसी भी जाति में जाटों को छोड़कर परसवाल नहीं पाए जाते, केवल जाट ही परसवाल है. इस वंश के बहुत सारे काम हैं जैसे कि बुलंदशहर उत्तर प्रदेश में लोहरका, जालंधर में शंकरगांव, गाजियाबाद में सुल्तानपुर, बिजनौर में कादीपुर आदि.

साभार - यह भाग जाट समाज पत्रिका आगरा, जून-2019, में प्रकाशित लेखक तेजपाल सिंह के पोरस पर लिखे गए लेख के पृ. 13 से लिया गया है.

Notable persons

  • Maj. General Daryao Singh has been the prominent figure from this village. He joined in Indian Army during British Times and retired in Sixties. He served in Army Medical Corps and was famous ENT Surgeon of his times. After retirement, he spent his retired life in Jhajjar town and gave free medical treatment to rural masses of the area.
  • Dr. Yoganand Shastri also hails from this village.
  • Sergeant Vikrant Sahrawat of Indian Air Force - Martyr, lost his life in a Chopper crash in Budgam district of J&K, during fight with militants.

External Links

References

Photo Gallery


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