Jagdev Panwar

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Jagdev Panwar was Panwar clan Jat Ruler of Umarkot in Afghanistan.

इतिहास

महाराजा जगदेव पंवार - अमरकोट के प्रसिद्ध राजा हुए जो पंवार गोत्री थे। गुजरात के जाट राजा सिद्धराज सोलंकी ने अपनी सुन्दर कन्या वीरमती का इनसे विवाह किया था। लोहचब पंवार गोत्र भी इन्हीं के वंशज हैं।[1]

ठाकुर देशराज लिखते हैं

उमरकोट - सिन्ध और राजपूताना के मध्य में यह स्थान है। इस पर हुमायूं के समय तक पंवार गोत्री जाटों का राज्य था। पंवार शब्द के कारण कर्नल टाड ने उसे राजपूतों का राज्य बताया है। किन्तु जनरल कनिंघम ने 'हुमायूं नामा' के लेखक के कथन का हवाला देकर उसे जाट पंवार लिखा है। टाड राजस्थान के कथन का प्रतिवाद करते हुए जनरल कनिंघम लिखते हैं - “किन्तु हुमायूं की जीवनी लिखने वाले ने प्रमार के राजा और उनके अनुचरों का 'जाट' के नाम से परिचय दिया है।”1 यह वंश धारा नगर के जाट-परमारों से सम्बन्धित रहा होगा। क्योंकि धारा नगर में जगदेव नाम का जाट राजा राज्य करता था और प्रमार जाट था। बिजनौर के कुछ जाट अपने को धारा नगर के महाराज जगदेव की संतान बताते हैं2, जो कि वहां से महमूद गजनवी के आक्रमण के समय यू० पी० की ओर बढ़ गए थे। प्रमार भी 'अवार' की भांति एक शब्द है। जाट एक समय अवार कहलाते थे, जिसका कि भारत में अवेरिया से सम्बन्ध है। इसी भांति एक प्रदेश का नाम पंवार-प्रदेश था, जो कि धारा नगर और उज्जैन के मध्य में था और जो प्रान्त पंवार लोगों के बसने के कारण प्रसिद्ध हुआ।

इसी तरह से सिन्ध के अन्य अनेक स्थानों पर जाट-राज्यों की सामग्री मिल सकती है, किन्तु उसके लिए महान् साधन और खोज की आवश्यकता है।


1. Memoirs of Humayoon P.45 ।
2. ट्राइब्स एण्ड कास्ट्स ऑफ दी नार्थ वेस्टर्न प्राविंसेज एण्ड अवध।


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-705

मानवेन्द्र सिंह तोमर फेसबुक

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राजा जगदेव पंवार परिचय

राजा जगदेव राजा उदयादित्यके पुत्र थे राजा उदयादित्य के चार पुत्र रणधवल, लक्ष्यदेव, नरवर्म देव, जगदेव तथा एक पुत्री श्यामल देवी थी उदयादित्य राजा भोज का भाई था जो जयसिंह के बाद धारा नगरी पर शासक हुआ।महाराजा जगदेव "जाट " जाति मे सुप्रसिद्ध राजा हूआ, जैनाड (अदिलाबाद तेलंगना) से प्राप्त अभिलेखानुसार-

"यशोदयादित्य नृप: पितासिदैव पितृव्यस्त च: भोजराज:। विरेजंतुयों वसुंधिपत्य प्राप्तप्रतिष्ठाविद पुष्पदंतो।।६

तेलंगना के आदिलाबाद समीप जैनड से प्राप्त अभीलेख मे जगदेव के सेनापती दहिया आमात्य लोकार्क का विवरन मिलता है। श्लोक ७ से १२ मे जगदेव द्वारा क्रमश् आंध्र प्रदेश, चक्रदुर्ग (बस्तर) दोरसमुद्र (मैसुर- हलेविद) पाटन (गुजरात) त्रिपुरी चेदी नरेश (जबलपुर) इत्यादी पर विजय संग्रामो का उल्लेख मिलता है। परमार नरेश अर्जुन वर्मन रचित "रासिक संजिवनी" पृष्ठ ८ पर पाया जाता है की जगदेव अत्यंत रुपवान था। महाविर था। सद्गुणी, सदाचारी, धर्मपरायन, तथा स्वामीभक्त था। जगदेव ने अपने राज्यकाल मे ७ प्रकार के सोने के सिक्के प्रचलन मे लाए थे जो नागपूर और हैदराबाद के संग्रहालय मे रखे हूए है। जगदेव पंवार सोलंकी /सोरोत जाट राजा की कन्या से हुआ राजा जगदेव के बाद उसके गादी पर उसका जेष्ठ पुत्र जगधवल बैठा राजा जगदेव का क्षेत्र उत्तर, पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत तक फैला हुआ था, इतिहासकारो में भले ही मतभेद हो पर राजा भोज के भतीजे महराज जगदेव को आज भी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छतीसगृह, गुजरात, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचलप्रदेश आदि राज्यों में आज भी पूजा जाता है. इनका कार्यक्षेत्र पुरे भारत में फैला था और वे किसी एक जगह पर स्थिर नहीं थे Iराजा जगदेव की मर्त्यु ११५१ ईशवी के आसपास माना जाता है जगदेव पंवार के सूजन सिंह और अरिया सिंह के वंशज आजकल मथुरा में पचहेरा पंवार कहलाते है जबकि चौधरी हेमराज पँवार के वंशज शबगा में निवास करते है बिजनौर के कुछ जाट अपने को धारा नगर के महाराज जगदेव पंवार की संतान बताते हैं, जो कि वहां से महमूद गजनवी के आक्रमण के समय यू० पी० की ओर बढ़ गए थे

पंवार गोत्र का इतिहास

लेकखक : मानवेन्द्र सिंह तोमर

पंवार गोत्र परमार गोत्र का भाषीय रूपांतर है जो एक चन्द्रवंशी जाट गोत्र है इस गोत्र कि उप गोत्र शाखा निम्न है मोहन , खड़वान ,मौण पंवार , पचार, लोहचब पंवार , पंवार जाट गोत्र का इतिहास भोज पंवार जाट थे, इसके प्रमाण -

(i) सिंध और राजस्थान के मध्य में उमरकोट एक स्थान है। इस पर बादशाह हुमायूं के समय तक पंवार गोत्री जाटों का राज्य था। वे लोग धारा नगर के जाट पंवार या परमारों से सम्बन्धित थे। पंवार शब्द के कारण कर्नल टॉड ने उमरकोट के राज्य को राजपूतों का राज्य बताया है। किन्तु जनरल कनिंघम ने “हुमायूं नामा” के लेखक के कथन का हवाला देकर उसे जाट पंवार लिखा है। टॉड राजस्थान के कथन का प्रतिवाद करते हुए जनरल कनिंघम साहब लिखते हैं - “किन्तु हुमायूं की जीवनी लिखने वाले ने परमार राजा और उनके अनुचरों का जाट के नाम से परिचय दिया है।” (Memoirs of Humayoon, P. 45)। (ii) धारा नगर में जगदेव नाम का जाट राजा राज्य करता था जो कि परमार जाट था। बिजनौर के कुछ जाट अपने को धारा नगर के महाराज जगदेव पंवार की संतान बताते हैं। (ट्राइब्स एण्ड कास्ट्स आफ़ दी नार्थ वेस्टर्न प्रोविन्सेज एण्ड अवध)। (३ ) इतिहासकारो के अनुसार पंवार जाट लोग आबू पर हुए अग्निकुंड यज्ञ से राजपूत संघ में मिले इसलिए राजपूतो में इनको अग्निकुण्डी राजपूत बोलै जाता है भलेराम बेनीवाल के अनुसार पंवार चन्द्रवंशी गोत्र है। पंवारो का प्रथम राज्य मालवा में माना गया है तथा राजा भोज इस कुल के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा हुये हैं।कुछ इतिहासकार जगदेव पंवार को महत्वपूर्ण मानते हैं। इसने ५० वर्ष तक राज्य किया था।. इस वंश के कुछ लोग अग्नि कुण्ड के बाद राजपूत संघ में मिल गये और राजपूत कहलाने लगे. पंवार वंश का आरम्भ ईशा पूर्व माना गया है. राजा भोज का मालवा में शासन रहा. वह बहुत दानी और पराक्रमी थे। इस वंश का मालवा में ५०० वर्ष तक राज्य रहा। पंवार गोत्र का पहला महान राजा मुंज देव को माना गया है।कुछ इतिहासकार इस गोत्र का इलाका खैबर घाटी को मानते हैं। कर्नल टाड उमरकोट को राजपूतों का राज्य मानते हैं जबकि जनरल कनिंघम हुमायूंनामा के लेखक के हवाले से उमरकोट को पंवार जाटों का राज्य लिखते हैं.

डॉ मोहन लाल गुप्ता प्रबंध चिंतामणी के हवाले से लिखते हैं कि परमार राजा सीयक द्वितीय के कोइ पुत्र न था।एक दिन उसे एक बालक मु्ंज घास पर पड़ा मिला।राजा बालक को महल ले आया तथा उसका लालन-पालन पुत्र की भांति किया।मुंज घास पर मिलने के कारण उसका नाम मुंज रखा गया।मुंज को गोद लिये जाने के बाद राजा सीयक की रानी ने सिंधुराज नामक पुत्र को जन्म दिया।किन्तु सीयक मुंज को इतना प्रेम करता था कि उसने मुंज को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।

पंवार रियासत के बारे में ठाकुर देशराज लिखते हैं -

सिन्ध और राजपूताना के मध्य में यह स्थान है। इस पर हुमायूं के समय तक पंवार गोत्री जाटों का राज्य था। पंवार शब्द के कारण कर्नल टाड ने उसे राजपूतों का राज्य बताया है। किन्तु जनरल कनिंघम ने 'हुमायूं नामा' के लेखक के कथन का हवाला देकर उसे जाट पंवार लिखा है। टाड राजस्थान के कथन का प्रतिवाद करते हुए जनरल कनिंघम लिखते हैं - “किन्तु हुमायूं की जीवनी लिखने वाले ने परमार (पंवार ) के राजा और उनके अनुचरों का 'जाट' के नाम से परिचय दिया है।”यह वंश धारा नगर के जाट-परमारों से सम्बन्धित रहा होगा। क्योंकि धारा नगर में जगदेव नाम का जाट राजा राज्य करता था और प्रमार जाट था। ।

पंवार गोत्र के उपगोत्रा शाखाए

मोहन पंवार उप गोत्र - यह शाखा पंजाब के कुछ गॉवो में निवास करते है जो मुख्य रूप से पंवार ही है और पंवारो विवाह सम्बन्ध नहीं करते है

मौण पंवार- मौण गोत्र पंवार की एक उप-शाखा है. काफ़ी समय पहले शेरखां खेड़ी गांव की मौणी देवी सत्ती हो गयी थी. इस कारण यहां के लोगों ने अपने आप को मौण लिखना शुरु कर दिया. इनका मूल गोत्र पंवार है. शेरखां खेड़ी और मटौर गॉव - जिला कैथल में मौण गोत्र के जाट आबाद हैं खड़वान पंवार -यह पंवार गोत्र कि उप शाखा है जो खड़क सिंह के नाम पाए खड़वान कहलाते है यह गोत्र खंडार तहसील जिला सवाई माधोपुर और कोटा जिले में निवास करता है

लोह्चब पंवार - यह गोत्र अब कुछ जगहो पर अलग गोत्र बन चूका है और पंवार गोत्र में शादी करने लगा है मुग़ल काल में पंवार जाट अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे वो दुश्मन को लोहे के चने चबा देते थे यानि वो दुश्मन को युद्ध में हरा देने में माहिर थे इसलिए उनको लोहचब उपाधि मिली जो बाद में एक गोत्र बन गया है यह लोहचब पंवार दिल्ली में बामड़ौली ,औचंदी गॉव में और हरियाणा में सोनीपत के झिंझोली,कतलुपुर और झज्जर के बुपणियां ,शाहपुर में निवास करता है राजस्थान के नागौर और सीकर में भी लोहचब पंवार निवास करते है

पचार - यह पंवार का बिगाड़ा रूप है जो मथुरा जिले में उधर,आयरा खेड़ा,दुलेटियाँ,खेरिया,बहावीन गॉव में निवास करता है इस गोत्र के गॉव राजस्थान में बहुत संख्या में है जो नागौर बाड़मेर , बीकानेर टोंक जिलो में है इस गोत्र कि शादी अब पंवारो में होती है

पंवार गोत्र के कुछ गॉव


उत्तर प्रदेश - मुज्जफ़रनगर,शामली सहारनपुर, जिलों में पंवार गोत्र के गांव टिकरौल(सहारनपुर),भनेड़ा, सबगा, दोघट, कान्घड़, नगौड़ी, जटौली, ककड़ीपुर, , एलम(आलम) , छासीपुर बेजलपुर ,बढेड़ी,नाला, भैसवाल, डोगर,गन्देवड़ा ,घासीपुरा ,, ककड़ीपुर , खेड़ीगंज , मादलपुर , नंगली महासिंह , ओलीमाजरा , पीनना,राजपुर छाजपुर, राझड़ , सबका ,मोलाहेड़ी ,पंवार खेड़ा ,

मेरठ जिले में सकौटी ,

बागपत जिले में भारसी ,सुनहेड़ा ,भगवानपुर ,बसी, पेंगा(ग़ाज़ियाबाद ),रोली कलां (ग़ाज़ियाबाद )

बुलंदशहर जिले में बुटाना,प्रानगढ़, बूटीना, रोड़ा,करीमपुर,

मुरादाबाद में कांठ के समीप रैली, पालनपुर, बिजनौर में मुगलवाला मथुरा जिले में पचहेरा पंवारो के 70 ग्राम है उधर ,आरया खेड़ा ,दुलेटिया ,बहावीन ,और पिपरामई मुख्य गाँव है

हरियाणा में लोहचब पंवार ,खुब्बड़ पंवार ,मौण पंवार के ग्राम चन्दौली(पानीपत ),बुपानिया ,शाहपुर ,डिमाना खचरौली(झज्जर ),चौधरी बास,खेरी लोहचब किरमरा,पनहारी (हिसार ),कैमला(करनाल ) .झिंझौली ,कतलूपुर ,सैदपुर (सोनीपत ),बळहम्बा ,कन्हेली (रोहतक ),पधाना ,गढ़ी मलाड (जींद ),इंद्री और कालियका ( नूह तहसील जिला मेवात ) , ,सालरपुर माज़रा ,सिवांका (गुड़गांव/गुरुग्राम ) दानीपुर ,जंधेड़ी ,कालवाड़ ,सोंटा (अम्बाला ),तंगोली (कुरुक्षेत्र ),कासनी ,बजीणा,किरावड,मंसरवास,खोरड़ा (भिवानी ) .टोटाहेडी ,बुढवाल (महेंद्रगढ़ )

मेवात जिले में कुछ पंवार मुस्लिम मेव भी है जो अपना पूर्वज जाट को मानते है जो पल्ला तहसील नूह जिला मेवात में है और झिरका(मेवात ) के नसीरबास ,राजाका में भी पंवार मुस्लिम है मानस ,शेरखां खेड़ी और मटौर गॉव - जिला कैथल में मौणपंवार गोत्र के जाट आबाद हैं अम्बाला छावनी के पास खुब्बड पंवार जाट के 5 गांम है। करधान, शाहपुर, मच्छौंडा, उगाडा, बाडा यमुनानगर में गुंडियाणा कनीपला दिल्ली में शाहपुर जाट ,नेब सराय ,बेर सराय

राजस्थान में गॉव लोहचब /लोमरोड़ पंवार ,मोगर पंवार सवाईमाधोपुर--गोकलपुरा ,बोरुंदा , नागौर--कचोलिया ,बड़गांव ,भड़ाना ,चंदा रूण ,डाबड़ा ,गोवा खुर्द ,खजवाना ,जोधा पालड़ी टहला ,पांचवा ,लोहछाब की ढाणी ,मामडोली ,नामडोली ,बेसरोली अलवर--खानपुर जाट

जोधपुर--बच कलां ,नाड़सर ,सियारा ,नानां ,लावड़ी ,कोसाना

टोंक --बड़ा मोजा ,छोटा मोजा बाड़मेर --गरल ,लोमरोडो का तला

पाली --फलका अजमेर --रूपाहेली

मध्यप्रदेश लोमरोड पंवार और मोगर पंवार श्योपुर --राडेप धार --- तलवंडी ,हरदा खुर्द रतलाम --- घटवास ,नारायणगढ़ ,सैलाना ,सीखेड़ी

देवास -- बोलोडा ,देवास हरदा --आदमपुर ,बिछापुर ,

उज्जैन --डंगवाड़ा

External links

References


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