Raisal Beniwal

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Raisal Beniwal (रायसलजी बेनीवाल) was a Jat ruler of ancient Jangladesh region in Rajasthan.

History

According to James Todd the republic of Beniwal Jats in Jangladesh, whose chief was Raisal Beniwal having 150 villages in his state with capital at Raisalana. The districts included in his state were Bhukarkho, Sanduri, Manoharpur, Kooi, Bae [1]

रायसलजी बेनीवाल का इतिहास

चूरू जनपद के जाट इतिहास पर दौलतराम सारण डालमाण[2] ने अनुसन्धान किया है और लिखा है कि पाउलेट तथा अन्य लेखकों ने इस हाकडा नदी के बेल्ट में निम्नानुसार जाटों के जनपदीय शासन का उल्लेख किया है जो बीकानेर रियासत की स्थापना के समय था।

क्र.सं. जनपद क्षेत्रफल राजधानी मुखिया प्रमुख ठिकाने
5. बेनीवाल पट्टी 360 गाँव रायसलाना (रस्लान) रायसलजी बेनीवाल भूखरका , सुन्दरी, सोनडी, मनोहरपुरा, कूई, बाय

रायसलाणा के बेणीवाल

रायसलाणा चुरू से 50 मील उत्तर-पूर्व में और सारण जाटों के ठिकाने भाड़ंग से 18 मील उत्तर-पूर्व में स्थित है. यह बेणीवाल जाटों की राजधानी था.

रायसलाणा चुरू से 50 मील उत्तर-पूर्व में और सारण जाटों के ठिकाने भाड़ंग से 18 मील उत्तर-पूर्व में स्थित है. यह बेणीवाल जाटों की राजधानी था. बेणीवालों के कितने गाँव थे, इसके बारे में इतिहासकारों में बड़ा मतभेद है. ठाकुर देशराज ने बेणीवालों के गाँवों की संख्या 84, चारण रामनाथ रत्नू ने 40, और मुंशी ज्वालासहय ने वाकए राजपूताना में 150 दी है. दयालदास ने अपनी ख्यात में संख्या 360 गाँवों के होने का उल्लेख किया है. [3] राठोड़ों के आगमन के समय इनका सरदार रायसल था. रायसल की बेटी मलकी का विवाह भाड़ंग के सरदार पूला सारण के साथ हुआ था. इसी मलकी के अपहरण काण्ड को लेकर गोदारों का शेष सब जाटों से युद्ध हुआ था और अंत में सीधमुख के पास ढाका नमक स्थान पर जो लड़ाई हुई, उसमें गोदारों के सहायक राठोड़ों की विजय हुई थी, जिसके परिणाम स्वरूप रायसलाणा के ठिकाने पर भी राठोड़ों का अधिकार हो गया था. [4] [5]

जाट इतिहास:ठाकुर देशराज

ठाकुर देशराज[6] लिखते हैं कि राठौरों से, जिस समय अपने राज्य की रक्षा के लिए, बेणीवाल जाटवीरों का संघर्ष हुआ, उस समय उनके पास 84 गांव थे। राय सेलाणा नाम के स्थान में इनकी राजधानी थी। राजा का नाम रायसल्ल था जो कि बहादुर किन्तु सीधा सरदार था। गोदारा लोग राठौरों से मिल गये थे। इस कारण इनका युद्ध में बहुत लम्बे अर्से तक डटा रहना कठिन था, इसलिए इन्होंने भी अधीनता स्वीकार कर ली।


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-618


चारण रामरत्न ने बेणीवालों के अधिकार में चालीस गांव लिखे हैं, किन्तु ‘वाकए राजपूताना’ जिल्द दो में मुंशी ज्वालासहायजी ने 150 गांव लिखे हैं।

इनके राज्य में बूकरको, सोन्दरी, मनोहरपुर, कूई और बाई जैसे प्रसिद्ध नगर शामिल थे। पोनियां जिनका कि ऊपर वर्णन किया गया है, बेणीवालों से अधिक शक्तिशाली थे। भादरा, अजीतपुर, सीधमुख, राजगढ़, ददरेवा और सांखू किसी समय उनके अधिकार में रहे थे।

बेणीवाल भी पोनियों की भांति नागवंशी अथवा शिव-गोत्री हैं। बेणी सिर के बालों के गुच्छे को कहते हैं। महादेव की जटाओं से जाटों के पैदा होने की जो फिलासफी है, उसके अनुसार वे शिव-गोत्री अथवा नाग-वंशी ही हो सकते हैं। बीकानेर के सिवाय पंजाब और संयुक्त प्रदेश में भी उनकी आबादी पाई जाती है। बीकानेर राज की ओर से उनके मुखियाओं के लिए पोशाक, सालाना 500 रुपये और 75 रुपये की नदकार बंधी हुई बताई जाती है। बेणीवाल लोग जांगल के उस भाग के शासक थे, जो अन्य लोगों के राज्यों से कहीं अधिक उपजाऊ था। जाटों के ग्रन्थों में इनके दान की और ठाट-बाट की खूब प्रशंसा कही गई है।

References

  1. James Todd, Annals of Bikaner, p. 139
  2. 'धरती पुत्र : जाट बौधिक एवं प्रतिभा सम्मान समारोह, साहवा, स्मारिका दिनांक 30 दिसंबर 2012', पेज 8-10
  3. दयालदास ख्यात, देशदर्पण, पेज 20
  4. गोविन्द अग्रवाल, चुरू मंडल का शोधपूर्ण इतिहास, पेज 121
  5. Dr Pema Ram, The Jats Vol. 3, ed. Dr Vir Singh,Originals, Delhi, 2007 p. 206
  6. जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृ.-618-619

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