Shivrav

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Shivrav (1335 AD) son of Sankatrao ruler of Sheoran clan is said to be founder of Shivran clan. He founded Buroli village in Rewari tahsil and district in Haryana.

इतिहास

पंडित अमीचन्द्र शर्मा[1]ने लिखा है: [p.18]: रियासत नीमराना का स्वामी अति विख्यात संकटराव (1310 ई.) चौहान वंशी क्षेत्रीय हुये। संकट राव ने 120 वर्ष (?) की आयु में दूसरा विवाह नावाँ और कादमा ग्राम के क्षेत्रीय की पुत्री पवन रेखा के साथ करवाया था। पवन रेखा ने संकटराव से यह वचन लिया था कि आप की मृत्यु के पश्चात राज्य के स्वामी उसकी संतान ही होंगी।

रानी पवन रेखा के 2 पुत्र हुये – 1 लाह , और 2 लौरे

बड़ी रानी के 19 पुत्र हुये – 1 हरसराज, 2 ग्रहराज, 3 बहराज, 4 नलदूदा, 5 सीर, 6 पीथे 7 त्रानचंद, 8 त्रिलोकचंद, 9 मान, 10 खैणसी, 11 मैणसी, 12 सैंसमल, 13 खैरा, 14 काहूड़ासी, 15 बुक्कणसी, 16 विजयराव, 17 शिवराव, 18 राधाकृष्ण, 19 परमानंद

संकट राव के देहांत के बाद दोनों रानियों की संतानों में राज्य के लिए संघर्ष हुआ। उस समय दिल्ली का बादशाह हुमायूँ (1508–1556)* था। उसकी आज्ञा से पवनरेखा के बड़े पुत्र


*नोट - एक पीढ़ी के 25 वर्ष मानकर गणना करने पर रावसंकट का समय 1910 - (24x25 = 600) = 1310 ई. के करीब आता है। परंतु यह समय दिल्ली बादशाह हुमायूँ (1508–1556) का नहीं है जैसा कि पंडित अमीचन्द्र शर्मा ने ऊपर लिखा है। अर्थात रावसंकट इससे पूर्व में हुये हैं। यह काल अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) का बनता है। इसमें अनुसंधान की आवश्यकता है। Laxman Burdak (talk) 12:38, 15 July 2017 (EDT)


[p.19]: लाह को राज्य मिला। पवनरेखा ने बादशाह हुमायूँ की आज्ञा पाकर बड़ी रानी के 19 पुत्रों को देश निकाला दे दिया और वे देश के विभिन्न भागों में चले गए और बस गए।

शिवराव ने बुड़ोली गाँव बसाया। वह राजपूत संघ छोडकर पुनः जाट संघ में सम्मिलित हो गया। राजपूत उससे घृणा करने लगे। शिवराव की संतान शिवराण कहलाई। तहसील दादरी चरखी रियासत जींद में शिवराण गोत्र के 25 ग्राम हैं। उनमे मुख्य ग्राम बेरला है। लुहारु रियासत में नवाब साहिब शासन कर रहे थे वहाँ इस गोत्र के 25 ग्राम हैं। शिवराण गोत्र के जाट चौहान वंशी हैं।

4 वर्ष के लगभग हुये कि बड़ी खोथ जिला हिसार में नंदराम और नानग भाट आए थे। उन्होने बड़ी खोथ के शिवराण गोत्र के जाटों की वंशावली सुनाई थी। बड़ी खोथ का सरस्वती राम नंबरदार शिवराव से 24 पीढ़ी पीछे हुआ है जिसकी वंशावली निम्नानुसार है:

1 राव संकट (1310 ई.), 2 शिवराव (1335 ई.), 3 पीथा, 4 बाला, 5 उमरा, 6 रातू, 7 पून, 8 अंचल, 9 ?, 10 राणा, 11 रंतपाल,


[p.20]: 12 अजनूपल्ल, 13 भालू, 14 मैनपाल, 15 जीतू, 16 सोभन, 17 मेघराज, 18 चंदू, 19 जगता, 20 फूल्लू, 21 सुखचंद, 22 उष्णाक, 23 रामलाल, 24 सरस्वतीराम (1910 ई.)

यह वंशावली नानग और नंदराम भाट की बही से लिखी गई है। ये ग्राम श्यामपुरा, थाना सतनाली, तहसील नारनौल रियासत पटियाला के हैं।

References

  1. Jat Varna Mimansa (1910), Author: Pandit Amichandra Sharma, Published by Lala Devidayaluji Khajanchi, pp.18-21

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