Sigdola Bara

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Location of Sigdola Barah in Sikar district

Sigdola Bara or Sigdola Bada (सिगड़ोला बड़ा) is a village in Laxmangarh tahsil of Sikar district, Rajasthan.

Location

The neighbouring village is Bathoth.

The Founders

Jat Gotras

History

सीकर किसान आंदोलन की शुरुआत

ठाकुर देशराज[1] ने लिखा है ....सन् 1931 के अक्टूबर महीने में जाट महासभा का


[पृ.223]: डेपुटेशन झूंझावाटी का दौरा करके सीकर में घुसा तो उसका प्रथम मुकाम कूदन में हुआ। डेपुटेशन में ठाकुर झम्मन सिंह जी एडवोकेट मंत्री जाट महासभा, ठाकुर देशराज जी मंत्री राजस्थान जाट सभा और महासभा के दोनों उपदेश ठाकुर भोला सिंह और हुकुम सिंह थे। गांव के किसी प्रतिष्ठित आदमी ने उनकी बात तक नहीं सुनी। यदि उस समय वहां मास्टर चंद्रभान सिंह जी (अध्यापक कार्य पर) न होते तो रात को ठहरना भी मुश्किल हो जाता। यह हालत थी उस समय सीकर के जाटों की हिम्मत और जाति प्रेम की।

हां उस समय भी एक जाट घराना सीकर में शेर की भांति ही निर्भर था वह था चौधरी रामबक्स जी भूकर, गोठड़ा का। चौधरी रामबक्स जी के लड़के चौधरी पृथ्वी सिंह को उस समय का सीकर का सिंह शावक कहें तो कुछ भी अयुक्ति नहीं होगी। उसके दिल में एक तिलमिलाहट थी और वह जल्द से जल्द अपनी कौम को बंधन मुक्त कराने की उत्कंठा में था। वही सिंह शावक अपने दूसरे साथियों श्री हरदेव सिंह पलथाना आदि के साथ झुंझुनू के महान जाट महोत्सव में पहुंचा और तमाम बाहरी जाट लीडर को उसने अपने इलाके के जाटों की दयनीय स्थिति से परिचित कराया।

जयपुर ने सीकर को आंतरिक अमन बनाये रखने की आजादी दे रखी थी। इसलिए यह सीकर का अपना आंतरिक मामला था कि कोई सभा-सोसाइटी अपने यहाँ होने दे या नहीं।

एक बार ठाकुर भोला सिंह जी महोपदेशक जाट महासभा सीकर में जा पहुंचे। CID ने पुलिस में इतला दी और पुलिस ने बैरंग उन्हें सीकर से वापस कर दिया। अतः यह एकदम कठिन था कि वहां जाट महासभा या उसकी किसी


[पृ.224]: शाखा सभा का वहां अधिवेशन हो जाने दिया जाता या प्रचारको को प्रचार की आजादी रहती। ऐसी कठिन परिस्थितियों में वहां जलसा करना था। यह वचन ठाकुर देशराज, कुँवर पृथ्वी सिंह जी को दे चुके थे।

पलथना में मीटिंग: बहुत सोचने विचारने के बाद उनके दिमाग में सीकर में एक यज्ञ कराने की आई और इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने सन् 1933 के अक्टूबर महीने में पलथना में एक मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में सीकर के 500 गांवों में से एक एक आदमी बुलाया गया लेकिन 5,000 आदमी इकट्ठे हुए। मीटिंग को भंग करने के लिए सीकर की पुलिस दल बल सहित मौके पर पहुंची किंतु मीटिंग सफल हुई और वक्ताओं के ओजस्वी भाषण से लोगों में जीवन की लहर पैदा कर दी। इस समय तक कुँवर पन्ने सिंह जी मर चुके थे। उनके बड़े भाई कुंवर भूर सिंह, चौधरी घासी राम, सरदार हरलाल सिंह, चौधरी रामसिंह कुँवरपुरा आदि सभी प्रतिष्ठित कार्यकर्ता शामिल हुए। मा. रतन सिंह जी बीए जो उस समय पिलानी में अध्यापक थे उनका भी भाषण हुआ।

इसी दिन सीकर बसंत पर जाट प्रजापति महायज्ञ करने का एलान किया गया और उसके लिए तय हुआ कि हर घर से घी व पैसा उगाया या जाए। श्री मास्टर चंद्रभान जी को यज्ञ कमेटी का मंत्री और चौधरी हरी सिंह जी बुरड़क पलथाना को अध्यक्ष चुना गया। श्री देवी सिंह बोचल्य और ठाकुर हुकुम सिंह, भोला सिंह जी को प्रचार विभाग सौंपा गया।


डेपुटेशन उपदेशकों के गांवों में पहुंचने से सीकर के कर्मचारियों के कान खड़े हुए और उन्होंने छेड़खानी आरंभ कर दी। तारीख 6 दिसंबर 1932 को जबकि नेछूआ तहसील के सिगड़ोला गांव में प्रचार हो रहा था, रात के समय लावर्दीखां


[पृ.225]: नाम का सवार तहसील की ओर से पहुंचा और ठाकुर हुकुम सिंह जी उपदेशक महासभा को पकड़ ले गया और तहसील में ले जाकर रात भर के लिए काठ में दे दिया। दूसरे दिन काफी डरा धमका कर उन्हें छोड़ दिया गया।

इसके विरोध में ठाकुर देशराज जी मंत्री राजस्थान आदेशिक जाटसभा ने राव राजा साहब सीकर को एक पत्र भेजा और मांग की कि लावर्दी खां को उसके गैरकानूनी कृत्य पर दंड दिया जाए किंतु ठिकाने ने उस पत्र का कोई उत्तर तक नहीं दिया।

जाट महायज्ञ की प्रबंधकारिणी का आफिस पहले तो पलथना, पोस्ट लक्ष्मणगढ़ में रहा इसके बाद दिसंबर के आरंभ में सीकर में आ गया और वहीं से कार्य संचालन होने लगा।

Population

As per Census-2011 statistics, Sigdola Bara village has the total population of 1168 (of which 580 are males while 588 are females).[2]

Notable persons

External Links

References


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