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Diti-Aditi

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Author: Dayanand Deswal
Genealogy of Suryavansha

According to ancient Sanskrit texts, Diti (दिति) and Aditi (अदिति) were daughters of King Daksha Prajapati and sisters to Sati, Shiva's consort. Kashyapa received the earth, obtained by Parashurama's conquest of King Kartavirya Arjuna and henceforth, earth came to be known as "Kashyapi".

Both Diti and Aditi were married to Rishi Kashyapa (कश्यप), the ancient sage in Suryavansha, who was one of the Saptarshis in the present Manvantara; with others being Atri, Vashishtha, Vishvamitra, Gautama, Jamadagni, Bharadvaja .

The sons of Diti came to be known as Daityas (दैत्य) and of Aditi, as Adityas (आदित्य)

Variants

  • Aditya आदित्य (AS, p.62)

Mention by Panini

Aditya (आदित्य) is a term mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [1]


Diti (दिति) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [2]


Dityavah (दित्यवाह) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [3]

वंशावली

ब्रह्मा जी के पुत्र पुलक (पुलह) के शरभ, सिंह, किम्पुरुष, व्याघ्र, रींछ और ईहामृत (भेड़िया) जाति के पुत्र हुए।

ब्रह्मा जी के पुत्र क्रतु (यज्ञ) के पुत्र भी क्रतु के ही समान पवित्र, तीनों लोकों में विख्यात, सत्यवादी, व्रतपरायण तथा भगवान् सूर्य के आगे चलने वाले साठ हजार बालखिल्य ऋषि हुए।

ब्रह्मा जी के पुत्र अंगिरा के तीन पुत्र हुए, जो लोक में सर्वत्र विद्यमान हैं। उनके नाम ये हैं - 1. बृहस्पति 2. उतथ्य 3. संवर्त ।

ब्रह्मा जी के पुत्र भृगु के विद्वान् पुत्र कवि हुए और कवि के पुत्र शुक्राचार्य हुए जो ग्रह होकर तीनों लोकों के जीवन की रक्षा के लिए वृष्टि, अनावृष्टि तथा भय और अभय उत्पन्न करते थे। महाबुद्धिमान् शुक्र ही योग के आचार्य और दैत्यों के गुरु हुए।

भृगु के दूसरे पुत्र का नाम च्यवन था। च्यवन की पत्नी मनु की पुत्री आरुषी मनीषी थी जिसके गर्भ से और्व मुनि का जन्म हुआ। और्व के पुत्र ऋचीक तथा ऋचीक के पुत्र जमदग्नि हुए। जमदग्नि के चार पुत्र थे जिनमें परशुराम जी सबसे छोटे थे किन्तु गुणों में बड़े थे। और्व मुनि के जमदग्नि आदि सौ पुत्र थे। फिर उनके भी सहस्रों पुत्र हुए। इस प्रकार भृगुवंश का विस्तार हुआ।

ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष भी थे। उनकी पत्नी प्रसूति से दक्ष की 50 कन्यायें उत्पन्न हुईं। प्रजापति दक्ष के पुत्र जब नष्ट हो गये, तब उन्होंने अपनी कन्याओं को पुत्र के समान मान लिया। दक्ष ने 10 कन्यायें धर्म को, 27 कन्यायें चन्द्रमा को और 13 कन्यायें महर्षि कश्यप को दिव्य विधि के अनुसार समर्पित कर दीं। चन्द्रमा के वंश में प्रभास हुए जिनका विवाह बृहस्पति की बहिन से हुआ। विश्वकर्मा उन्हीं से पैदा हुए। वे सहस्रों शिल्पों के निर्माता देवताओं के बढई कहे जाते हैं। उन्होंने देवताओं के असंख्य दिव्य विमान बनाये।

सूर्य की धर्मपत्नी का नाम संज्ञा था जो त्वष्टा की पुत्री थी। उन्होंने दोनों अश्विनीकुमारों को जन्म दिया। यह त्वष्टा अदिति के 12 पुत्रों में से एक था। दक्ष की 13 कन्यायें जो महर्षि कश्यप की पत्नियां थीं, उनके नाम इस प्रकार हैं -

1. अदिति 2. दिति 3. दनु 4. काला 5. दनायु 6. सिंहिका 7. प्राधा 8. क्रोधा (क्रूरा) 9. विश्वा 10. विनता 11. कपिला 12. मुनि 13. कद्रु ।

इनके पुत्रों का वर्णन -

(1) अदिति से 12 पुत्र आदित्य (देव) उत्पन्न हुए - धाता, मित्र, अर्यमा, इन्द्र, वरुण, अंस, भग, विवस्वान्, पूषा, सविता, त्वष्टा, विष्णु । इन सब आदित्यों में विष्णु छोटे थे परन्तु गुणों में सबसे बढ़कर थे।

(2) दिति का वंश दैत्य (असुर) नाम से प्रसिद्ध हुआ। इन दैत्यों में प्रह्लाद देव माना जाता है।

दिति का एक पुत्र हुआ (हिरण्यकशिपु)
1. प्रह्लाद 2. संह्लाद 3. अनुह्लाद 4. शिवि 5. वाष्कल
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प्रह्लाद के तीन पुत्र
1. विरोचन 2. कुम्भ 3. निकुम्भ
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विरोचन
बलि (बल या बालान जाट वंश)
महाप्रतापी बाणासुर (महाकाल)
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(3) दनु के 34 पुत्र दानव कहलाए। उनमें दानवों का सुप्रसिद्ध और महायशस्वी प्रथम राजा विप्रचित्ति हुआ।

4 से 13 तक जो अन्य काला, दनायु आदि 9 कन्यायें हैं उनकी वंशावली भी महाभारत में अत्यन्त विस्तार से वर्णित है।

इस प्रकार देव और असुर वंश दोनों ही ब्रह्मा की संतान हैं। आज भी जिस प्रकार देव, विद्वान्, श्रेष्ठ और असुर, मूर्ख, दुष्ट प्रकृति की संतान एक ही पिता की देखने को मिलती है, इसी प्रकार देवयुग में और आदि सृष्टि से ही महर्षि ब्रह्मा के वंश में ही देव असुर उत्पन्न हुए। यक्ष और राक्षस भी इसी प्रकार ऋषिकुल में उत्पन्न हुए।[4]

Also see

Haryana Ke Vir Youdheya/तृतीय अध्याय

External Links

References


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