Jat Ganga

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Location of Bhaironghati
Map of Uttarkashi district

Jat Ganga (जाटगंगा) or Neel Ganga (नीलगंगा) is the name of tributary of Ganges River near Gangotri in Uttarkashi district of Uttarakhand. The valley of the Jat-Ganga is claimed by China and controlled by India.

Variants

Tributary of Bhagirathi

The headwaters of the Bhagirathi are formed at Gaumukh (elevation 3,892 metres), at the foot of the Gangotri glacier and Khatling glaciers in the Garhwal Himalaya. It is then joined by its tributaries; these are, in order from the source:

The river flows from its source for 205 km before meeting the Alaknanda River at an elevation of 475 m in the town of Devprayag. Downstream of this confluence, considered holy by Hindus, the river is known as the Ganga, or Ganges River by westerners. Chaukhamba I is the highest point of the Bhagirathi basin.

Nellang and Jadhang

Nelang or Congsa (Congsha) is a small hilly village which lies in one of the areas subject to territorial disputes between India and China. Congsa is now controlled by Uttarkashi District, Uttarakhand, India and claimed by Zanda County, Ngari Prefecture, TibetChina. Jadh Ganga, an important tributary of the Bhagirathi River, flows through this place. Some of the nearby villages are JadhangSang and Pulam Sumda, which all lie in the valley of the Jadh Ganga. The valley of the Jadh Ganga is claimed by China and controlled by India.

Zanda County

Zanda County (Tibetan: རྩ་མདའ་རྫོང་ wylie: rtsa mda' rdzong; Chinese: 札达县; Pinyin: Zhádá Xiàn) is a county in the Ngari Prefecture to the extreme west of the Tibet Autonomous Region of China.

जाटगंगा

कैप्टन दलीप सिंह अहलावत[1] ने लिखा है.... भैरों घाटी जो कि गंगोत्री से 6 मील नीचे को है, यहां पर ऊपर पहाड़ों से भागीरथी गंगा उत्तर-पूर्व की ओर से और नीलगंगा (जाटगंगा) उत्तर पश्चिम की ओर से आकर दोनों मिलती हैं। इन दोनों के मिलाप के बीच के शुष्क स्थान को ही भैरों घाटी कहते हैं। जाटगंगा के दाहिने किनारे को 'लंका' कहते हैं। इस जाटगंगा का पानी इतना शुद्ध है कि इसमें रेत का कोई अणु नहीं है। भागीरथी का पानी मिट्टी वाला है। दोनों के मिलाप के बाद भी दोनों के पानी बहुत दूर तक अलग-अलग दिखाई देते हैं। जाटगंगा का पानी साफ व नीला है इसलिए इसको नीलगंगा कहते हैं। महात्माओं और साधुओं का कहना है कि भागीरथी गंगा तो सम्राट् भगीरथ ने खोदकर निकाली थी और इस नीलगंगा को जाट खोदकर लाये थे इसलिए इसका नाम जाटगंगा है। इसके उत्तरी भाग पर जाट रहते हैं। इस कारण भी इसको जाटगंगा कहते हैं। इस जाट बस्ती को, चीन के युद्ध के समय, भारत सरकार ने, वहां से उठाकर सेना डाल दी और जाटों को, हरसल गांव के पास, भूमि के बदले भूमि देकर आबाद किया। जाटों ने यहां गंगा के किनारे अपना गांव बसाया जिसका नाम बघौरी रखा। यह गांव गंगा के किनारे-किनारे लगभग 300 मीटर तक बसा हुआ है जिसमें लगभग 250 घर हैं। लोग बिल्कुल आर्य नस्ल के हैं। स्त्री-पुरुष और बच्चे बहुत सुन्दर हैं। ये लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं। इनके गांव में बौद्ध मन्दिर है। ये लोग भेड़ बकरियां पालते हैं। और तिब्बत से ऊन का व्यापार करते हैं। ये अपने घरों में ऊनी कपड़े बुनते हैं।

नोट - हरसल गांव दोनों गंगाओं के मिलाप से लगभग 7 मील नीचे को गंगा के दाहिने किनारे पर है। बघौरी गांव हरसल से लगा हुआ है।[2]

नील पर्वत

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है ... 2. नील पर्वत (AS, p.504): महाभारत, अनुशासनपर्व 25,13 में तीर्थों के प्रसंग में नील की पहाड़ी का तीर्थ रूप में वर्णन है। यह हरिद्वार के पास एक गिरि शिखर है, जो शिव के नील नामक गण का तपस्या स्थल माना जाता है। गंगा की नीलधारा इसी पर्वत के निकट से बहती है- 'गंगाद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नील पर्वते तथा कनखले स्नात्वा धूतपाप्मा दिवं व्रजेत' महाभारत, अनुशासनपर्व 25, 13.

External links

References