Kumar Singh Sogarwal

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Vir Chakra.JPG

Havildar Kumar Singh Sogarwal - Vir Chakra in Kargil war is from village Baseri Kaji in district Agra in Uttar Pradesh was a martyr of Kargil War who died on 07 July 1999. He was in Unit-17 Jat Regiment of the Indian Army. He was awarded Vir Chakra for his daring actions of bravery on July 6-7, 1999 in recapturing Pinpal-1 and Pinpal- hills in Dras sector of Jammu and Kashmir.

वीर-चक्र विजेता हवलदार कुमर सिंह सोगरवल

आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी के पास तेरह मोरी बाँध से करीब तीन किमी दूर स्थित गाँव बसैरी काजी निवासी श्री रघुवीर सिंह सोगरवल के सुपुत्र १७ जाट रेजिमेंट के ४० वर्षीय हवलदार कुमर सिंह ने ६ एवं ७ जुलाई १९९९ की रात सुबह कश्मीर के द्रास सेक्टर में मुश्कोह घाटी की पिम्पल -एक और पिंपल-२ नामक पहाडियों से जो कारनामा कर दिखाया वह विस्मित कर देने वाला है. हवलदार कुमर सिंह की इस बहादुरी पर उनको मरणोपरांत वीर-चक्र के पुरस्कार से नवाजा गया है.

जीवन परिचय

आठवीं पास हवलदार कुमर सिंह सोगरवल १७ जाट रेजिमेंट में १९७८ में भरती हुए थे. सिपाही से हवलदार बनने के पीछे उनकी सेवा भावना और मेहनत थी. आपका विवाह १९७७ में नगला धनी के चौधरी साहब सिंह की सुपुत्री बलबिरी के साथ हुआ था. हवलदार कुमर सिंह के दो सुपुत्र और दो सुपुत्रियाँ हैं.

हवलदार कुमर सिंह की शहादत रंग लाई और दुश्मन को जान-माल की भारी क्षति उठाते हुए दुम दबाकर भागना पड़ा. शून्य से कम तापमान में हथियार बर्फ में चलाने और बचने के सामान समेत ४० किलो वजन के साथ १८००० फीट ऊँची चोटी पर १० घंटे चढ़ कर आधा सफर तय करने के बाद ख़ुद को दिन भर पत्थरों में समेटे रहना कितना दुष्कर है. दिन ढलने के समय ही फ़िर चढाई करके दुश्मन से करीब २० मीटर दूर पहुँचने के बाद हवलदार कुमर सिंह की टुकड़ी ने धावा बोल कर १६ घुसपेठियों को मार भगाया. इसके बाद पहाडियों को पुरी तरह मुक्त कराने के लिए १० घंटे तक घमासान युद्ध हुआ और पिंपल-१ और पिंपल-२ पर फतह पा ली गई, परन्तु जांबाज हवलदार कुमर सिंह की कीमत पर.

हवलदार कुमर सिंह की शहादत का मलाल है, तो उनके पराक्रम के कारण मिली फतह पर हर किसी को गर्व है. सेना के बख्तरबंद वाहन से तिरंगे में लिप्त हवलदार कुमर सिंह का शव तब गाँव में उतरा तो जमीं आसमान भी जैसे उदास थे. सैंकडों वृद्ध महिलाओं के हिलोरे लेते वात्सल्य ने खामोसी को करूण क्रंदन में बदल दिया. हवलदार कुमर सिंह के परिजनों के अलावा रिश्तेदार नातेदार, साथी सैनिकों के परिजनों और शुभ चिंतकों की लम्बी कतार ने श्रधा सुमन अर्पित किए.

सन्दर्भ

  • जाट समाज पत्रिका आगरा, सितम्बर-अक्टूबर 1999, p.81

बाहरी कड़ियाँ


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