Utkala

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Utkala (उत्कल) was an ancient Kingdom located in the northern and eastern portion of the modern-day Indian state of Odisha and also included the districts of Bankura, Purulia and Midnapore districts of West Bengal.

Variants

Origin

The early medieval literature says in Sanskrit "उत्कृष्ट कलायाः देशः यः सः उत्कलः " Meaning the land having excellent opulence of artists and art is called Utkala(Kala=Art, Utkrishta=Excellent);land of Utkrishta=Excellent-Kala=Art.

History

This kingdom was mentioned in the epic Mahabharata, with the names Utkala, Utpala, and Okkala. It is mentioned in India's national anthem, Jana Gana Mana.

उत्कल

विजयेन्द्र कुमार माथुर[1] ने लेख किया है ...

1. उत्कल (AS, p.89): उत्तरी ओडिशा का प्राचीन नाम जिसे उत् (उत्तर) कलिंग का संक्षिप्त रूप माना जाता है। कुछ विद्वानों के मत में द्रविड़ भाषाओं में 'ओक्कल' किसान का पर्याय है और उत्कल इसी का रूपांतर है।[2] उत्कल का प्रथम उल्लेख सम्भवत: सूत्रकाल ( पूर्वबुद्धकाल) में मिलता है। कालिदास ने रघुवंश 4,38 में उत्कल निवासियों का उल्लेख रघु की दिग्विजय के प्रसंग में कलिंग विजय के पूर्व किया है- स तीर्त्वा कपिशां सैन्यैर्बद्धद्विरदसेतुभि:, उत्कलादर्शितपथ: कलिंगाभिमुखो ययौ'। इससे स्पष्ट है कि कालिदास के समय में अथवा स्थूलरूप से, पूर्व गुप्तकाल में उत्कल उत्तरी उड़ीसा और कलिंग दक्षिणी उड़ीसा को कहते थे।

उड्र, उड़ीसा के समग्र देश का सामान्य नाम था जो महाभारत में सभापर्व महाभारत 31,71 में उल्लिखित है। मध्यकाल में भी उत्कल नाम प्रचलित था। दिब्बिड़ दानपत्र[3] से सूचित होता है कि उत्कल नरेश जयत्सेन ने मत्स्यवंशीय राजा सत्यमार्तंड के साथ अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह किया था और उसे ओड्डवाडी का शासक नियुक्त किया था। इसकी 23 पीढ़ियों के पश्चात् 1269 ई. में उत्कल का राजा अर्जुन हुआ था जिसने यह दानपत्र प्रचलित किया था।

2. उत्कल (AS, p.89): उत्कल ब्रह्मदेश (बर्मा अब म्यांमार) में रंगून (अब यांगून) से लेकर पीगू तक के औपनिवेशिक प्रदेश को उत्कल कहते थे। यहाँ भारत के उत्कल देश के निवासियों ने आकर अनेक बस्तियाँ बसाई थीं। किवदंती है कि तपुस और भल्लूक नामक दो व्यापारी, जिन्होंने भारत जाकर गौतम बुद्ध से भेंट की थी तथा जो उनके शिष्य बनकर तथागत के आठ केशों को लेकर ब्रह्मदेश आए थे, इसी प्रदेश के निवासी थे।

In Mahabharata

Utkala (उत्कल) Mahabharata (VI.10.39),(VIII.17.20),


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Utkala (उत्कल) province is mentioned in Mahabharata (VI.10.39).[4].... the Chedi-Vatsas, the Karushas, the Bhojas, the Sindhu-Pulindakas, the Uttamojas, the Dasharnas, the Mekalas, the Utkalas;


Karna Parva/Mahabharata Book VIII Chapter 17 mentions Utkala (उत्कल) in Mahabharata verse (VIII.17.20). [5]....Utkalas were mentioned as taking part in the Kurukshetra War siding with the Kauravas. Many Mekalas and Utkalas, and Kalingas, and Nishadas, and Tamraliptakas, advanced against Nakula, showering their shafts and lances, desirous of slaying him (8:22).


The Utpalas, the Mekalas, the Paundras, the Kalingas, the Andhras, the Nishadas, the Trigartas, and the Valhikas, were all vanquished by Karna (7:4).

In Ramayana

Kishkindha Kanda Sarga 41 mentions Utkala in verse 4-41-9. [6]

...Sugreeva sends Vanara-s to southward which troop includes Hanuman, Jambavanta, Nila and others and Angada is its leader. Sugreeva gives a vivid picture of the southern side of Jambudvipa up to the south-most part of passable regions.... This troop is also given one month's time to find the whereabouts of Seetha.

8,9,10. "Search the thousand crested Vindhya mountains abounding with numerous tress and climbers, then the delightful Narmada river coursing a little southerly to that range, which is adored by great snakes, along with wonderful River Godavari, as well as River Krishnaveni and Maha Nadi, and then the greatly auspicious Varada River which is an adoration to great snakes. And the territories of Mekhala, Utkala, the cities of Dasharna, kingdoms of Abravanti, Avanti, and Vidarbha, also thus the charming kingdom of Mahihaka, are to be searched thoroughly.

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.89
  2. द हिस्ट्री ऑफ उड़ीसा; महताब, पृ. 1
  3. ऐपिग्राफिका इंडिका- जिल्द 5, 108
  4. चेदिवत्साः करूषाश च भॊजाः सिन्धुपुलिन्थकाः, उत्तमौजा दशार्णाश च मेकलाश चॊत्कलैः सह (VI.10.39)
  5. मेकलॊत्कल कालिङ्गा निषाथास ताम्रलिप्तकाः, शरतॊमर वर्षाणि विमुञ्चन्तॊ जिघांसवः
  6. ततो गोदावरीम् रम्याम् कृष्णावेणीम् महानदीम् । वरदाम् च महाभागाम् महोरग निषेविताम् । मेखलान् उत्कलाम् चैव दशार्ण नगराणि अपि ॥4-41-9॥