Lada Singh

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Lada Singh (लाड़ासिंह) was Jakhar clan Chieftain who founded Ladan village in Matanhail tahsil of Jhajjar district in Haryana. [1] When Jakhars lost kingdom in Rajasthan, Lada Singh brought some Jakhar warriors from Rajasthan to Haryana.

History

Ram Sarup Joon[2] writes that Jakhars are mostly Muslims of the Western undivided Punjab. According to the 'Ain-I Akbari ', Ladh Singh, the Jakhar leader of Haryana, fought with the Mughals and the Pathans. They have 12 villages in district Rohtak and they are found in large numbers in Rajasthan, Bhawalpur, Bikaner and Pakistan.

इतिहास

कैप्टन दलीपसिंह अहलावत [3]लिखते हैं कि जाखड़ जाटों के बीकानेर में भी कई छोटे-छोटे राज्य थे[4]। जब राजस्थान में राजपूतों के राज्य स्थापित हो गये तब जाखड़ जाटों का एक दल रोहतक जिला (हरयाणा) में आ गया। इनका नेता लाढसिंह था। यहां पर जाखड़ों ने साहलावास, लडान आदि बहुत गांव बसाये। लाढसिंह बहादुर ने एक बड़े क्षेत्र पर जाखड़ जाटों का राज्य स्थापित किया जिसकी राजधानी लडान थी। दिल्ली के बादशाह की ओर से बहू झोलरी पर एक मुसलमान नवाब का शासन था। उसने बड़ी शक्तिशाली सेना के साथ जाखड़ों पर आक्रमण कर दिया और लडान पर अधिकार कर लिया। नवाब की सेना ने जाखड़ों के गांव को लूटना शुरु कर दिया और उन पर हर प्रकार के अत्याचार करने आरम्भ कर दिये। जाखड़ों के बुलावे पर डीघल गांव के जाट वीर योद्धा बिन्दरा के नेतृत्व में अहलावत जाटों का एक दल जाखड़ों से आ मिला। इन दोनों वंशों के जाटवीरों ने मुसलमान सेना एवं नवाब* को मौत के घाट उतार दिया और बहू-झोलरी के किले पर अधिकार कर लिया। एक पठान सैनिक की गोली लगने से बिन्दरा वहीं पर शहीद हो गया। इस तरह से जाखड़ वीरों ने लडान का अपना राज्य फिर वापिस ले लिया और इनके बहुत से गांव आराम से बस गये थे। जाटों की शक्ति से डरकर दिल्ली का बादशाह जाखड़ों पर आक्रमण करने का साहस न कर सका।

आई-ने-अकबरी में लिखा है कि जाखड़ों के नेता वीर लाढसिंह ने पठानों और दिल्ली के बादशाहों से युद्ध करके अपनी वीरता का प्रमाण दिया[5]

इस तरह जाखड़ों के कई सरदारों ने औरंगजेब के समय तक राजस्थान और पंजाब के अनेक स्थानों पर राज किया। अन्तिम समय में इनके सरदारों के पास केवल चार-चार अथवा पांच-पांच गांव के राज्य रह गये थे[6]


* - जब नवाब की सेना युद्ध क्षेत्र से भागकर किले में जा घुसी तो सबसे पहले वीर बिन्दरा अपने अहलावतों की एक टोली के साथ किले की दीवार लांघकर अन्दर गये। फिर तो सभी जाट अन्दर घुस गये। बिन्दरा ने स्वयं अपनी तलवार से नवाब का सिर उतार दिया।

References

  1. Jat History Thakur Deshraj/Chapter IX,p.595
  2. History of the Jats/Chapter V,p.88
  3. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III,प.217-219
  4. जाट इतिहास उर्दू पृ० 368, लेखक ठा० संसारसिंह।
  5. जाट इतिहास पृ० 84 एवं अंग्रेजी अनुवाद पृ० 88 लेखक ले० रामसरूप जून।
  6. जाट इतिहास पृ० 591 लेखक ठा० देशराज।

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