Sulkhania

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For other villages see Sulkhaniya Chhota, Sulkhaniya Bara
Location of Ratangarh in Churu district

Sulkhania or Sulkhaniya (सुलखनिया) is an old historical village in Ratangarh tehsil[1] of Churu district in Rajasthan. Sulkhania is known for Sulkhania variety of Bajra grown in Sulkhania village only.

Location

It is located in west direction at a distance of about 15 km from Fatehpur, Sikar(Rajasthan).

The founders

Sulkhania was founded by Dahiya Jats in 1350 AD.

History

In 1350 Sulkhaniya village was founded by three Dahiya brothers namely (1) Asso Dahiya (2) Chokho Dahiya & (3) Binjo Dahiya, who came from Nagaur side. These three brothers met over there Lal Guru Baba who suggested them to found village by name ‘Sulkhaniya’. While majority majority of Dahiya Jats were already got settled in Haryana by that time.[2]

The village was named Sulakhania due to good natural qualities of the land. Sulakhania is a sanskrit word meaning ‘with good symptoms’. British time police station is also used to be in Sulkhaniya village and a big Sikarband (temple/math) constructed with white marble of Nath sect is also situated at village, and Lal Guruji is village saint for whom all villagers have great respect and devotion.[3]

In 1425 Mala Ram Dahiya left Sulkhaniya village and founded a new village Namely Malasi near Salasar. It is said that all three brothers took ‘Jivant samadhi’. In the name of all three brothers still there are three Johdas (natural water reservoir) namely Asani Johdo, Chokhani johdo and Binjani Johdo. Punia and other Jats came later.[4]

Religious shrines : Temples were built in the village by saint named Lalguru around 200 years back.

Jat Gotras

Total number of families in village is about 300. Jat gotras in village with number of families are: Dahiya (40), Burdak (20), Punia (15), Kaswan (15), Bhadial (10), Bijarnia (10), Jhuria (10), Khalia (5), Muhal (3), Takaria (3), Dhaka (3), Bhinchar (1).

Burdak came from Palthana.

Other castes living in village are Balai (40), Rajput - Parihar (10), Dhadhi (30), Kaimkhani (20), Naik (20), Brahman (1).

सुलखणिया गाँव का इतिहास

सुलखणिया गाँव सन 1350 में तीन दहिया भाइयों (1) आसो दहिया (2) चोखो दहिया एवं (3) बिंजो दहिया द्वारा बसाया गया था। सुलखणिया शब्द एक संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका मतलब है "विशेष प्रकार के लक्षणों वाला"।


गाँव बसने की कहानी कुछ इस तरह है कि नागौर की तरफ से दहिया जाट उपजाऊ ज़मीन के लिए हरियाणा की और जा रहे थे तभी दोपहर को आराम करने वहाँ डेरा डाला और तीनों भाई पानी की तलाश में निकल गये। जहाँ उनका परिचय एक साधु, जो वहाँ तपस्या कर रहे थे, से हुआ। साधु ने पास में चर रही गाय का दूध निकालने के लिये कहा। गाय की सूखी हुई उसटी देख के दहिया भाई बोले - साधु महाराज क्यों मस्करी करो हो, कधे टलेड़ी गाय दूध थोड़ी दिया कर है। साधु महाराज बोले - तू काढ़ दूध और पी इसे। और सचमुच दूध निकला देख उन्होंने साधु महाराज के पांव पकड़ लिये और क्षमा याचना की। साधु महाराज ने वहाँ से थोड़ी दूर "सुलखणिया" नाम से गाँव बसाने के लिये कहा और अंतर्धान हो गये, इस घटना के बाद तीनों भाई साधु महाराज के बताए अनुसार वहां बस गए और वो साधु महाराज आज भी गाँव में लाल गुरुजी के नाम से श्रद्धा से पूजे जाते हैं।


जैसाकि तीनों भाइयों ने चमत्कारी दूध पिया था जिससे वो बहुत लंबे समय तक जीवित रहे, जिसके बाद उन्होंने भी जीवंत समाधि ले ली थी जिसका प्रमाण आज भी गाँव की तीन दिशाओं में मौजूद तीन जोहड़ी (1) चोखाणी जोहड़ी (2) बींजाणी जोहड़ी और (3) ओसाणी जोहड़ी हैं, जहां उनकी समाधि आज भी मौजूद है।

सन् 1425 में मालाराम दहिया ने पास में ही एक नया गाँव "मालासी" बसाया जो सालासर बालाजी के पास है। जिसका मालासी नाम उनके नाम पर ही रखा गया।

1900 के शुरूआती दौर में चौधरी तिलोकाराम दहिया सामंती-उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने एवं संघर्ष करने वालों में अग्रणी माने जाते हैं, उनका कई बार सामंती ठिकानेदारों से संघर्ष हुआ। पास के ही सामंती गाँव की उपजाऊ कृषि-भूमि उन्होंने सामन्तों से छीनकर अपने गाँव में और आस-पास के गांवों में बांट दिया। उन्होंने हमेशा गरीब और जरूरतमंद की मदद की। उनकी बहन का विवाह पलथाना के बुरडक परिवार में हुआ था पर कुछ राजनीतिक कारणों से और वहाँ के सामंती लोगों से खतरे के कारण उन्होंने अपनी बहन के परिवार को सुलखणिया गाँव में बसा लिया था। उनके बाद चौधरी रूपाराम दहिया ने उनकी मुहिम को जारी रखा और आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़ के हिस्सा लिया।


सुलखणिया बाजरा: सुलखणिया गाँव का बाजरा सदियों से प्रसिद्ध रहा है, दूर-दूर तक लोग यहाँ बाज़रे के बीज़ के लिए आया करते थे। यहाँ के बाजरे का दाणा मोटा और स्वादिष्ट होता है, बाजरे का शिटा और उसकी कड़बी दोनों ही खूब लंबे होते हैं, लंबाई के लिये ये कहा जाता है कि एक बड़ा सांड अगर कड़बी में घुस जाए तो दिखाई नहीं देता।

सुलखणिया गाँव में कालांतर में ओर जाट पूनियां, बुरड़क, कस्वां, बिजारणियां, झुरिया, ख्यालिया, मुहाल, ढाका, भींचर, भड़िया, टाकरिया भी आकर बस गये। समय के साथ गाँव में ढाढ़ी, कायमखानी, बलाई, नाईक, राजपूत और ब्राह्मण भी आकर रहने लग गए।

सुलखणिया गाँव बीकानेर-जयपुर रियासत के बॉर्डर पर बीकानेर रियासत में पड़ता था। इसमें अंग्रजों के जमाने का पुलिस थाना हुआ करता था। इसमें एक सफेद मार्बल का नाथ समुदाय का सिकरबन्द भी बना हुआ है।

कई सौ साल पुराना कुआ भी बना बुआ है। एक लाल गुरुजी का छोटा सा मंदिर भी बना हुआ है।

सुलखनिया बाजरा: पारंपरिक बाजरा की संशोधित किस्म

सुलखनिया बाजरा जल्द बोई जाने वाली बाजरे की किस्म है। यह शुष्क और अर्ध-शुष्क दोनों क्षेत्रों के लिए बेहतर है। यह किस्म सूखा-सहिष्णु है और शुष्क मौसम का लंबे समय तक सामना कर सकती है। इसमें सामान्य रूप से बोई जाने वाली अन्य क़िस्मों से अधिक पैदावार होती है। उच्चतम पैदावार (20-25 कुंटल/हेकटर) वाली इस किस्म में सघन बीज के साथ लंबी बालियाँ होती हैं। इसका अनाज पौषक तत्वों से भरपूर, गुणवता युक्त व मीठा होता है। इसमें प्रति पौधा में करीब 6-10 बलियाँ होती हैं जिसमें पैदावार 90-100 प्रतिशत होती है। यह फसल 90 दिनों में पककर तैयार होती है। इसमें चारे की कुल पैदावार 40 कुंटल/हेकटर तक होती है। सुलखनिया बाजरा खाने में अन्य बाजरा प्रजातियों से स्वादिष्ट होता है। बाजरा पुष्प गुच्छ (सीटा) 60-90 सेमी तक लंबा होता है।

सीकर के सोये हुये किसानों को जगाने का श्रेय

महावीर सिंह जाखड़[5] ने लिखा है कि सीकर के सोये हुये किसान शेरों को जगाने का श्रेय ठाकुर देशराज, जघीना (भरतपुर) को जाता है। पुष्कर के जाट अधिवेशन के बाद यह जागृति ज्यादा आई। इस आंदोलन में सबसे ज्यादा जुझारूपन पलथाना के बुरड़कों ने दिखाया। सूबेदार - चन्द्र सिंह (मदू), हरी सिंह, हरदेव सिंह, जेसा राम, भाना राम, गणपत राम, व पेमा राम आदि यहाँ के प्रमुख सेनानी थे। यहाँ के बुरड़क रतनगढ़ तहसिल के सुलखनिया गांव में बसे हैं। उन्होने भी मेघसिंह के नेतृत्व में ( 6 भाई - मेघ सिंह, धाला राम, अमरा राम, मुखा राम, माना राम व लिखमा राम) सामंती उत्पीड़न के विरुद्ध हर संघर्ष मे ताल ठोक कर भाग लिया तथा फतेह हासिल की। अमरा राम आजाद हिन्द फौज के सेनानी रहे। श्री मेघ सिंह एवं धाला राम ने मरू-भूमि में शिक्षा प्रसार हेतु स्वामी नित्यानंद से खिचिवाला जोहड़े में विद्यालय शुरू करवाया।

Notable persons

  • Choudhar Trilok Singh Dahiya - Freedom fighter, who struggled with local thikaners. He was known for his logical, witty and judgmental abilities in the nearby region. He was always helped poor and needy people & struggled against Samanti exploitation. Trilok Singh Dahiya's sister was married with Burdaks of Palthana Village, due to Political reasons Choudhary trilok Singh Dahiya brought his sister's family to Sulkhaniya Village and settled them at Sulkhaniya Village permanently, thus Burdaks came to Sulkaniya Village. He fought with Rajpoots on several occasions, in which most memorable he fought with adjoining Rajputs of Chachivad village and snached/took a huge fertile land in possession of Sulkhaniya Village which was distributed among Villagers.
  • Hanumana Ram Jhuria - Awarded by President of India for preserving local variety of Bajra seeds. Shri Hanmuna Ram Jhuria was awarded for Bazra Variety at 9th National Biennial Competition, held during festival of innovation (FION) 2017, at Rashtrapati Bhawan, New Delhi in March 2017. सुलखनिया के हनुमानाराम झूरिया को बाजरे की पारंपरिक बीज कोे संरक्षित करने सम्मानित किया गया। [6]
  • नारायण सिंह दहिया - सुलखनिया, एडवोकेट हाल फतेहपुर, खींचीवाला विद्यापीठ से शिक्षा प्राप्त करने वालों में प्रमुख
  • Amra Ram Burdak - INA village Sulkhania (Ratangarh Churu)
  • धाला राम बुरडक - सुलखनिया, खींचीवाला विद्यापीठ में सहयोग दिया और शिक्षा सुविधाओं का विकास किया
  • Shri Chand Burdak - Rajasthan Police
  • भूरा राम कस्वा - सुलखनिया, खींचीवाला विद्यापीठ में सहयोग दिया और शिक्षा सुविधाओं का विकास किया
  • बघा राम ख्यालिया - सुलखनिया, खींचीवाला विद्यापीठ में सहयोग दिया और शिक्षा सुविधाओं का विकास किया
  • Virendra Muhal s/o Ramchandra, Sulkhania, Meritorious Student in 12th Board Examination-2014 with marks 78.8%
  • Nirjan Kumar Muhal s/o Girdhari Lal, Sulkhania, Meritorious Student in 12th Board Examination-2014 with marks 78%
  • Km Mamta Dahiya d/o Ramawtar, Sulkhania, Meritorious Student in 10th Board Examination-2014 with marks 80.83%
  • Vikas Dahiya - Great great Grandson of Choudhary Trilok Singh Dahiya. He studied at Kirori Mal College, Delhi University and presently Lawyer at Supreme Court of India, High Court and Delhi District Courts, New Delhi. Mob:9818093928
  • Tarachand Dahiya - Businessman Delhi,

Gallery

External links

References

  1. Villages in the Ratangarh tehsil, Churu district, RAJASTHAN
  2. Source: Vikas Dahiya through Email: <adv.vikasdahiya@gmail.com>
  3. Source: Vikas Dahiya through Email: <adv.vikasdahiya@gmail.com>
  4. Source: Vikas Dahiya through Email: <adv.vikasdahiya@gmail.com>
  5. Jaton Ke Vishva Samrajya aur Unake Yug Purush Part 1/Chapter 10, p.93
  6. Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2017

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