Ratangarh

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Location of Ratangarh in Churu district

Ratangarh (रतनगढ) is a town and tahsil of Churu district in Rajasthan, India. Ratangarh is famous for grand havelis with frescoes, which is specialty of the Shekhawati region. Ratangarh is also famous for its handicraft work. Its old name was Kolasar, which was converted to present name by Raja Surat Singh in name of his son Kunwar Ratan Singh in 1803.[1] It was part of ancient Jangladesh region.

Contents

Demographics

As of 2001 Census India , Ratangarh had a population of 63,463. Males constitute 51% of the population and females 49%. Ratangarh has an average literacy rate of 63%, higher than the national average of 59.5%: male literacy is 72%, and female literacy is 53%. In Ratangarh, 17% of the population is under 6 years of age.

Geography

Ratangarh is located at 28.08|N|74.6|E[2]. It has an average elevation of 312 metres (1023 feet). It is midway between Jaipur and Bikaner on National Highway-11.

Ratangarh is situated in the Thar Desert. There are so many Temples in Ratangarh, That's why Ratangarh is called "Kashi" of Rajasthan. Ratangarh is not situated in planes but on the "Dhora's" (Big sand dunes). Even the colonies in town are named after these "Dhoras" like "Holi dhora".

Jat Gotras

List of Villages in Ratangarh tehsil

Location of Ratangarh in Churu district

Abadsar, Alsar, Alsar Bas, Bachharara Bara, Bachharara Chhota, Badhan Ki Dhani, Balrampura, Bandwa, Barjangsar, Biramsar, Bhanuda Bidawatan, Bhanuda Charan, Bharpalsar Bidawatan, Bharpalsar Charan, Bharpalsar Ladkhaniyan, Bhawandesar, Bhinchari, Bhojasar, Bhukhredi, Binadesar Bidawatan, Binadesar Siddhan, Budhwali, Chainpura, Chak Jaleu, Chak Ratangarh, Champawa, Charanwasi, Chhabri Khari, Chhabri Meethi, Chhajusar, Chhotriya, Dassusar, Daudsar, Dipsar, Derajsar, Devipura, Fransa, Ghumanda, Gogasar, Golsar, Gopalpuriya, Gorisar, Gusainsar, Hamusar, Hansasar, Hanumanpura, Hardesar, Haripura, Hudera Agoona, Hudera Athoona, Hudera Siddhan, Jaitsar, Jaleu Bari, Jaleu Chhoti, Jaleu Ratangarh, Jandwa, Jegniya Bidawatan, Jegniya Bikan, Jorawarpura, Kadiya, Kangar, Kanwari, Khariya, Kothdi, Khudera Beekan, Khudera Bidawatan, Khudera Charan, Kusumdesar, Lachhasar, Ladhasar, Loha, Lunsar, Lunch, Malasar, Malpur, Melusar, Manasar, Molisar Chhota, Nausariya, Nunwa, Pabusar, Parihara, Parihari, Parsneu, Payli, Prem Nagar, Raghunathpura Ratangarh, Rajaldesar, Ratangarh, Ratansara, Ratnadesar, Rukhasar, Sangasar, Sanwatiya, Sathro, Sitsar, Sehla, Sikrali, Simsiya Bidawatan, Simsiya Purohitan, Sulkhaniya, Thathawata, Tidiyasar,

History

Ram Sarup Joon[3] writes that this area was ruled by Kaswan Jats.

61. Kushan, Kasva: This appears to be a distorted form of Kushana. They have 350 villages in a compact group in Bikaner. Previously Sidmukh was their capital which was occupied by the Bika and the Godara Jats. Ratangarh and Churu were their territories. They had 2000 camel riders in their army.

रतनगढ़ तहसील की संस्कृति

रतनगढ़ तहसील की संस्कृति अति प्राचीन है | बीकानेर संग्रहालय में रखा हुआ रतनगढ़ क्षेत्र में प्राप्त 11 वीं सदी का प्रस्तर फलक (नृत्यलीला) एवम् संवत 1309 अंकित सती देवली जो गाँव हुडेरा में है इसके जीवन्त प्रमाण है | रतनगढ़ नगर की स्थापना संवत 1955 से 1970 (सन 1719 से 1913) को मध्य बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराज सुरतसिंह ने अपने पुत्र रतनसिंह के नाम पर की थी | इसके पहले यहाँ कोलासरराजीया की ढाणीयाँ थी | मठ्ठाधीश शिवालय (16 वीं शताब्दी - कोलासर) साधुओं की बगीची, माता करणी मन्दिर के पिछाड़ी की सराफों की हवेली की आज भी कोलासरराजीयों की ढा़णी की सौगात के रुप में दो शताब्दियों के बाद भी मौजूद है | क्षेत्र की भाषा डिंगलयुक्त राजस्थानी है |[4]

भूगोल

रतनगढ़ संभाग भारत गणराज्य के राजस्थान प्रान्त के चूरु मन्डल का उपमन्डल है जिसमें रतनगढ़ व सुजानगढ़ तहसीलें शामिल हैं| इसके उत्तर पूर्व में चूरु, उत्तर में सरदारशहर, दक्षिण में सुजानगढ (चूरु जिला) पश्चिम में श्री डूंगरगढ़ व दक्षिणपूर्व में फतेहपुर (लक्ष्मणगढ़) तहसील की सीमायें है| 27.5 डिग्री उत्तर अक्षांस व 34.37 डिग्री पूर्व देशान्तर में राजस्थान के उत्तरपूर्व भाग में रतनगढ़ की स्थिति समुद्रतल से औसतन उँचाई 308 मीटर है| तहसील का कुल क्षेत्रफल 169976 हेक्टर है जिसमें कृषी वा चरागाह की भूमि प्रायः 150000 हेक्टर है| पठार के नाम पर बिरमसर की डूंगरी है| भूमि बालुकामय है| सन् 2007 को जनगणना सर्देक्षण के अनुसार तहसील की जनसंख्या एकमात्रनगर रतनगढ़ के 63463, मात्र कस्बे राजलदेसर की 22736, उपकस्बा पड़िहारा व 101 गाँवों की 157030 यानि कुल जनसंख्या 244330 थी। तहसीलके मूलनिवासी बहुत बड़ी तादाद में प्रवासी बन गये है जो उपरोक्त गणना में शामिल नही है।[5]

जाट बौद्धिक मंच: जाट समाज की प्रतिभाओं का सम्मान 27.12.2012

जाट बौद्धिक मंच के तत्वावधान में 27 दिसंबर को किसान छात्रावास में समाज की प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा। मंच के सचिव मुकंदाराम नेहरा ने बताया कि 2011-12 में बोर्ड में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी व राजकीय सेवा में नवनियुक्त हुए अभ्यर्थी, सेवानिवृत कार्मिक, राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी तथा आईआईटी, एमबीबीएस में चयनित प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। नेहरा ने बताया कि पात्र अभ्यर्थी अपने प्रमाण पत्र मंच के पदाधिकारियों के पास जमा करवा सकते हैं। [6]

जाट बौद्धिक मंच के तत्वावधान में 27 दिसंबर को किसान छात्रावास में जाट समाज की प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा। मंच के सचिव मुकंदाराम नेहरा ने बताया कि सम्मान समारोह की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अजय चौधरी करेंगे। मुख्य अतिथि एसडीएम पीएल जाट, विशिष्ट अतिथि डॉ. घासीराम महिया, प्राचार्य एचआर ईशराण होंगे। समारोह में कक्षा 10, 12 में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त, आईआईटी, एमबीबीएस में चयनित विद्यार्थी, राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी व सिविल सेवाओं में नियुक्ति प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा।[7]

प्रतिभा सम्मान समारोह 19.10.2014 को

रतनगढ़|जाटबौद्धिक मंच की ओर से तहसीलस्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन 19 अक्टूबर को ग्रामीण किसान छात्रावास में होगा।

सेवानिवृत्त वन अिधकारी लक्ष्मणराम बुरड़क के मुख्य आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रम में तहसील के जाट समाज के 2013-14 में बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अिधक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां कर ली गई है। सम्मान समारोह को लेकर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। मुकंदाराम नेहरा ने बताया कि समारोह के अंतर्गत मेडिकल, आईआईटी में चयनित विद्यार्थी, राज्य केंद्र की सिविल सेवाओं में चयनित अभ्यर्थियों का भी सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सम्मानित होने वाले विद्यार्थी अपनी अंक तालिका प्रमाण पत्र मंच के पदाधिकारियों को जमा करवा सकते हैं। [8]

जाट बौद्धिक मंच और प्रतिभा सम्मान समारोह रतनगढ: दिनांक 19.10.2014

जाट बौद्धिकमंच और प्रतिभा सम्मान समारोह दिनांक 19.10.2014

रतनगढ में जाट बौद्धिकमंच और प्रतिभा सम्मान समारोह दिनांक 19.10.2014 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ में आयोजित किया गया. समारोह में 10 वीं और 12 वीं कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित किया गया.

समारोह में उपस्थित मुख्य महानुभाव थे -

लक्ष्मण राम बुरड़क - मुख्य अतिथि

दूला राम सहारण - विशिष्ठ अतिथि

ताराचंद पायल - अध्यक्ष

भंवर लाल डूडी - अध्यक्ष जाट बौद्धिक मंच

मुकंदा राम नेहरा - सचिव

पूरा राम गांधी - कार्यक्रम संचालक

कार्यक्रम में सम्मानित विद्यार्थी:

हेत राम धेतरवाल - आइ आइ टी में चयन

शुभम हुड्डा - एम बी बी एस में चयन

अनिता डूडी - एम बी बी एस में चयन

भानी राम सारण - एम बी बी एस में चयन

कमलेश खीचड़ - एम बी बी एस में चयन

पूनम खीचड़ - बी वी एस में चयन

राकेश बिजारणिया - राज्य सेवा में चयन

रुकमा नंद भींचर - राज्यपाल द्वारा सम्मानित शिक्षक

जाट बौद्धिक मंच और प्रतिभा सम्मान समारोह रतनगढ पर भास्कर समाचार

सन्दर्भ: भास्कर समाचार दिनांक 20.10.2014 [9]

मेहनत सफलता का मूलमंत्र : बुरड़क :

कड़ीमेहनत सफलता का मूलमंत्र है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे लगातार मेहनत करते रहे, निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। ये विचार सेवानिवृत वन अिधकारी लक्ष्मणराम बुरड़क ने रविवार को किसान छात्रावास में जाट बौद्धिक मंच के तत्वावधान में हुए प्रतिभा सम्मान समारोह में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जीवन में प्रयास करने पर कोई कोई देवदूत अवश्य मिलता है। सामाजिक कुरीतियों को त्यागने पर बल देते हुए कहा कि दहेज प्रथा, मृत्यु भोज, छूछक एवं नशा समाज की बुराइयों में से हैं, जिसे हमें मिटाना चाहिए। कार्यक्रम के अध्यक्ष ताराचंद पायल ने कहा कि शिक्षा से ही समाज का उन्नति करता है, विद्यार्थियों को चाहिए कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में अिधक से अिधक लाभ ले। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेती और मजदूरी से पेट नहीं भरता।हमें हमारे युवाओं को उच्च शिक्षा की ओर बढ़ाना चाहिए। उन्होंने अंग्रेजी के अध्ययन पर भी बल दिया।

साहित्यकार दूलाराम सहारण ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समाज के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव पर बोलते हुए कहा कि इतिहास के पन्नों में समाज से जुड़े प्रसंगों का कहीं भी उल्लेख नहीं है। उन्होंने आह्वान किया कि समाज के युवा लेखन पत्रकारिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़े। पूर्व एसीपी दुर्गादत्त सिहाग ने कहा कि इस तरह के आयोजन अन्य लोगों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम को सुगनचंद कटेवा, गिरधारीलाल खीचड़, नरेश गोदारा, महेंद्र, दौलतराम सहारण, रेवंतराम डूडी ने भी संबोधित किया।

जाट बौद्धिक मंच के अध्यक्ष भंवरलाल डूडी सचिव मुकंदाराम नेहरा ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। पूराराम गांधी के संचालन में हुए कार्यक्रम में इंद्राज खीचड़, रामलाल सिहाग, सज्जन बाटड़, नानूराम बिरड़ा, भंवरलाल बिजारणियां, महावीर सिहाग, शिवलाल ढ़ेवा, सोहनलाल चबरवाल, रामेश्वरलाल डूडी, हरफूल खीचड़, भंवरलाल सहारण, महेंद्रकुमार डूडी, हरलाल डूडी, रामचंद्र ऐचरा, सुरेंद्र हुड्‌डा, पवन सेवदा, बृजलाल खीचड़, खींवाराम ख्यालिया, चेतनराम ज्याणी, जैसराम दैया, मदनलाल कुल्हरि, रामेश्वर सुंडा, गिरधारीलाल बांगड़वा सहित समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

Notable persons

Notable Institutions

External links

References

  1. Churu Janpad Ka Jat Itihas by Daulat Ram Saran Dalman
  2. Falling Rain Genomics, Inc - Ratangarh
  3. History of the Jats/Chapter V,p.92
  4. http://www.ratangarhnagrikparishad.com/article/article1.htm.
  5. http://www.ratangarhnagrikparishad.com/article/article1.htm.
  6. Matrix News, Dec 10, 2012
  7. [http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-c-212-61308-NOR.html Matrix News, Dec 26, 2012
  8. Bhaskar News Network, Oct 09, 2014
  9. मेहनत सफलता का मूलमंत्र : बुरड़क Bhaskar News Network, Oct 20, 2014
  10. http://www.swamikeshwanand.com/Donors%20List.aspx sn 222
  11. http://www.swamikeshwanand.com/Donors%20List.aspx sn 222

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