Ramala

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Sugancane growing farmer of Ramal

Ramala (रमाला) Village in Baghpat district in Uttar Pradesh is known for a sugar factory in the village.

Location

The founders

History

Kharkhari village of Chauhans is a newly founded village and traces back history to Ramala Village. Most of the families till 20-30 yrs back were in touch with Ramalias due to their close relations between same families.


Rajatarangini[1] tells ....Then came one versed in intrigue ; his trade was that of an assistant cook, and he said that he was the son of Malla and his name was Ramala (Rāmala), and that he had been travelling in foreign countries. Many foolish kings who loved revolt assisted him with wealth and rank as he passed through their countries. He entered Kashmira alone, perspiring with heat. The king's servants know him and cut off his nose. And again men saw him following the profession of his caste, walking about as he sold food to the king's soldiers, and they smiled. (p.19-20)

Jat Gotras

इब्राहीम लोदी और सर्वखाप पंचायत

सिकंदर लोदी की मृत्यु के बाद उसका लड़का इब्राहीम लोदी गद्दी पर बैठा, परन्तु उसके छोटे भाई जलालुद्दीन ने विद्रोह कर दिया. इब्राहीम लोदी ने सर्वखाप पंचायत की सहायता मांगी. सर्वखाप के मल्ल योद्धाओं ने जलालुद्दीन और उसके हजारों सैनिकों को रमाला (बागपत) के जंगलों में घेर लिया और आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया. [2]

१८५७ में रमाला गाँव

२३ अप्रेल १८५७ को मेरठ छावनी में सैनिक विद्रोह हुआ और १० मई १८५७ को सर्वखाप पंचायत के वीरों ने अंग्रेजों को गोली से उड़ा दिया. ११ मई १८५७ को चौरासी खाप तोमर के चौधरी शाहमल गाँव बिजरोल (बागपत) के नेतृत्व में पंचायती सेना के ५००० मल्ल योद्धाओं ने दिल्ली पर आक्रमण किया. शामली के मोहर सिंह ने आस-पास के क्षेत्रों पर काबिज अंग्रेजों को ख़त्म कर दिया. सर्वखाप पंचायत ने चौधरी शाहमल और मोहर सिंह की सहायता के लिए जनता से अपील की. इस जन समर्थन से मोहर सिंह ने शामली, थाना भवन, पड़ासौली को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया गया. बनत के जंगलों में पंचायती सेना और हथियार बंद अंग्रेजी सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ जिसमें मोहर सिंह वीर गति को प्राप्त हुए परन्तु अंग्रेज एक भी नहीं बचा. चौहानों, पंवारों, और तोमरों ने रमाला छावनी का नामोनिशान मिटा दिया. सर्वखाप पंचायत के मल्ल योद्धाओं ने अंततः दिल्ली से अंग्रेजी राज ख़त्म कर बहादुर शाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठा दिया. [3] ३० और ३१ मई १८५७ को मारे गए कुछ अंग्रेज सिपाहियों और अधिकारीयों की कब्रें गाजियाबाद जिले में मेरठ मार्ग पर हिंडोन नदी के तट पर देखी जा सकती हैं.

Population

Notable persons

  • Jatin Chauhan - From Ramala, Became Flying Officer on 3.6.2016 in Passing Out Parade. चौधरी जतिन चौहान बने एयर फ़ोर्स मे ‪फ्लाइंग ऑफिसर‬, बागपत के रमाला गाव के चौधरी जतिन सिंह चौहान ने 3 जून को बेंगलुरु मे पासआउट परेड की। जतिन लाकड़ा चौहान ‪खाप‬ के चौधरी स्व जिले सिंह के पोत्र है। जतिन ने धोंगरा स्कूल से इंटर करने के बाद बी टेक किया है। उनके पिताजी चौधरी वीरेंदर सिंह चौहान भी सेना मे हवलदार है।

Gallery

External links

References

  1. Kings of Kashmira Vol 2 (Rajatarangini of Kalhana)/Book VIII,p.19-20
  2. डॉ ओमपाल सिंह तुगानिया : जाट समाज की प्रमुख व्यवस्थाएं , आगरा , 2004, पृ . 23
  3. डॉ ओमपाल सिंह तुगानिया : जाट समुदाय के प्रमुख आधार बिंदु , आगरा , 2004, पृ . 30

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