Suhag

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Suhag (सुहाग)[1] [2] is gotra of Jats found in Rajasthan and Haryana in India. They were supporters of Chauhan Confederacy. Sihag and Suhag are considered same gotra.

Origin

History

They were chieftains of a place called ‘Kod Khokhar’ (कोड खोखर) in Mewar region of Rajasthan. After some time they reached Marwar and constructed fort at Pahalkot (Pallukot) in memory of their chieftain named Pallu. They occupied Pallukot and Dadrewa areas. Pahalu or Pall was title of Rana. Their ancestors were Vira Rana and Dhira Rana had ruled over the land of Medapat prior to this.[4]

Note- According to editor of this page, Suhag jats ruled over pallu or pallukot but ironically it it is known that before rathore's rule, only Sihag jats rule was in Pallu for centuries.

Ram Swarup Joon [5] considers Suhag to be same as Sihag and writes that Kot Khokhar in Mewar has been the capital of the Sihag rulers. Pahulkot has also been their capital. Some names of these Sihag rulers were Vir Rana, Dhir Rana etc. They are mentioned in the manuscript of genealogical tables in the possession of Gorakh Singh. Sihags are found in a large number in Bikaner, Bahawalpur and in Haryana 25 villages are inhabited by them in one compact group in district Rohtak.

Villages founded by Suhag clan

सुहाग गोत्र का इतिहास

पंडित अमीचन्द्र शर्मा[8]ने लिखा है - सुहाग गोत्र - [p.33]: कोड खोखर नामका सरदार उदयपुर रियासत में रहता था। वह चौहान संघ में था और वहाँ से चलकर ददरेड़े नामक गाँव में आ बसा। बाद में वह पल्लूकोट में आ बसा। पल्लूकोट और ददरेड़ा दोनों मारवाड़ में हैं।


[p.34]: कोड खोखर की वंशावली निम्नानुसार है:

1 वीर राणा (1300 ई.), 2 धीर राणा (1325 ई.), 3 पल्लू राणा (1350 ई.), 4 कोड खोखर राणा (1375 ई.)

कोड खोखर के 4 पुत्र हुये – 1. मान, 2. सुहाग, 3. देसा, 4. दलाल

  • 1.मान की संतान मान गोत्र के जाट कहलाए,
  • 2.सुहाग की संतान सुहाग गोत्र के जाट कहलाए,
  • 3.देसा से देसवाल गोत्र के जाट कहलाए,
  • 4. दलाल से दलाल जाट गोत्र प्रचलित हुआ।

सुहाग गोत्र के विख्यात जाट ने मातनहेल गाँव बसाया। जो अब जिला झज्जर में है। मातनहेल गाँव के सुहाग गोत्री जाटों की वंशावली निम्नानुसार है:

यह मानकर की रतिया लेखक का समकालीन होने से वर्ष 1900 ई. से एक पीढ़ी का काल 25 वर्ष मानते हुये उपरोक्त पीढ़ियों की काल गणना की जावे तो वीर राणा का काल लगभग 1300 ई. आता है।

ठाकुर देशराज लिखते हैं

ठाकुर देशराज लिखते हैं कि सुहाग वंश के लोग पहले मेवाड़ कोडखोखर नामक स्थान पर सरदारी करते थे। [9] कुछ समय के पश्चात् मारवाड में पहुंचकर एक किला बनवाया उसका नाम अपने सरदार पहलू के नाम पर पहलूकोट (पल्लूकोट) रखा। पल्लूकोट और ददरेड़े के आस-पास कुल भूमि पर आधिपत्य जमा लिया। सरदार पहलू अथवा पल्लू राणा की उपाधि थी। उससे पहले इसी वंश के वीर राणा और वीर राणाओं ने मेदपाट की भूमि पर राज किया था।[10] [11]

Distribution in Punjab

Villages in Fatehgarh Sahib district

Sohag Heri (t.Fatehgarh Sahib),

Distribution in Haryana

Villages in Jhajjar district

Matanhail (मातनहेल), Chhudani (छुडाणी)

Villages in Bhiwani district

Bilawal,

Notable persons

See also

Sihag - Sihag and Suhag are considered same gotra.

References

  1. B S Dahiya:Jats the Ancient Rulers (A clan study), p.243, s.n.226
  2. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. स-70
  3. Jat Varna Mimansa (1910) by Pandit Amichandra Sharma, p.34
  4. Thakur Deshraj: Jat Itihas, pp. 596-97
  5. Ram Swarup Joon:History of the Jats/Chapter V,p. 102
  6. Jat Varna Mimansa (1910) by Pandit Amichandra Sharma, p.34
  7. Thakur Deshraj: Jat Itihas, pp. 596-97
  8. Jat Varna Mimansa (1910) by Pandit Amichandra Sharma, p.33-34
  9. जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठ-596
  10. जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठ-597
  11. ‘चौधरी गौरव’ नामक हस्त लिखित पुस्तिका से।