Baggar Jhunjhunu

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Location of villages around Jhunjhunun in north

Baggar (बगड़) (Bagar) is village in Jhunjhunu tahsil and district in Rajasthan.

Founder

Baggar village was founded by Chahar Jats who came from Charawas.[1]

Location

It is located midway on Chirawa-Jhunjhunu Road.

Jat Gotras

History

It was founded by Bagaria Jats.

बगड़ में सभा 1922

गाँवों में प्रचार करने के पश्चात 1922 में भूदाराम, रामसिंह, गोविन्दराम आदि ने बगड़ में एक सार्वजनिक सभा करने की योजना बनाई. गाँवों में इसका प्रचार होने लगा. ठाकुरों के कान खड़े हो गए. शांति भंग होने के नाम पर ठाकुरों ने इनको गिरफ्तार करवा दिया और सभा टल गयी. पुलिस ने नाजिम झुंझुनू के समक्ष पेश किया. गोविन्दराम ने जवाब दिया - 'हम अपनी जाति में सुधार के लिए प्रचार कर रहे हैं. हमें यह हक है. हम सरकार के विरुद्ध कुछ नहीं कह रहे हैं.' नाजिम इस जवाब से प्रभावित हुआ और उसने सबको रिहा कर दिया. अब तो किसान नेताओं का हौसला बढ़ गया. वे पुन: बगड़ में ही सभा करने के लिए जुट गए. जागीरदारों ने बगड़ कसबे में आतंक और भय फैला दिया. ठाकुरों ने हुक्म फ़रमाया, 'सभा के लिए स्थान देना तो अपराध होगा ही, जो व्यक्ति सभा में भाग लेगा, उस पर जुर्माना किया जायेगा.'आम जन भयभीत हो गया. कोई भी सभा के लिए स्थान देने को तैयार नहीं हुआ. आखिर , बगड़ का पठान अमीर खां आगे आया. उसने अपने गढ़ में सार्वजनिक सभा करने की अनुमति दे दी. गढ़ में एक बड़ा हाल था. इसमें पांचसौ से अधिक व्यक्ति बैठ सकते थे. आसपास के गाँवों के प्रमुख किसान बगड़ पहुंचे. भूदाराम के साहस के कारण उन्हें राजा की पदवी दी गयी. समाज को संगठित होने और सामंती जुल्मों के विरुद्ध संघर्ष छेड़ने का आव्हान किया गया. प्रकट में भविष में भी होने वाली सभाओं को समाज सुधार की सभाएं कहने का निश्चय किया. अंग्रेज अधिकारीयों को भी इससे कोई परेशानी नहीं थी. [2]

राजस्थान की जाट जागृति में योगदान

ठाकुर देशराज[3] ने लिखा है ....उत्तर और मध्य भारत की रियासतों में जो भी जागृति दिखाई देती है और जाट कौम पर से जितने भी संकट के बादल हट गए हैं, इसका श्रेय समूहिक रूप से अखिल भारतीय जाट महासभा और व्यक्तिगत रूप से मास्टर भजन लाल अजमेर, ठाकुर देशराज और कुँवर रत्न सिंह भरतपुर को जाता है।


[पृ.4]: अगस्त का महिना था। झूंझुनू में एक मीटिंग जलसे की तारीख तय करने के लिए बुलाई थी। रात के 11 बजे मीटिंग चल रही थी तब पुलिसवाले आ गए। और मीटिंग भंग करना चाहा। देखते ही देखते लोग इधर-उधर हो गए। कुछ ने बहाना बनाया – ईंधन लेकर आए थे, रात को यहीं रुक गए। ठाकुर देशराज को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होने कहा – जनाब यह मीटिंग है। हम 2-4 महीने में जाट महासभा का जलसा करने वाले हैं। उसके लिए विचार-विमर्श हेतु यह बैठक बुलाई गई है। आपको हमारी कार्यवाही लिखनी हो तो लिखलो, हमें पकड़ना है तो पकड़लो, मीटिंग नहीं होने देना चाहते तो ऐसा लिख कर देदो। पुलिसवाले चले गए और मीटिंग हो गई।

इसके दो महीने बाद बगड़ में मीटिंग बुलाई गई। बगड़ में कुछ जाटों ने पुलिस के बहकावे में आकार कुछ गड़बड़ करने की कोशिश की। किन्तु ठाकुर देशराज ने बड़ी बुद्धिमानी और हिम्मत से इसे पूरा किया। इसी मीटिंग में जलसे के लिए धनसंग्रह करने वाली कमिटियाँ बनाई।

जलसे के लिए एक अच्छी जागृति उस डेपुटेशन के दौरे से हुई जो शेखावाटी के विभिन्न भागों में घूमा। इस डेपुटेशन में राय साहब चौधरी हरीराम सिंह रईस कुरमाली जिला मुजफ्फरनगर, ठाकुर झुममन सिंह मंत्री महासभा अलीगढ़, ठाकुर देशराज, हुक्म सिंह जी थे। देवरोड़ से आरंभ करके यह डेपुटेशन नरहड़, ककड़ेऊ, बख्तावरपुरा, झुंझुनू, हनुमानपुरा, सांगासी, कूदन, गोठड़ा


[पृ.5]: आदि पचासों गांवों में प्रचार करता गया। इससे लोगों में बड़ा जीवन पैदा हुआ। धनसंग्रह करने वाली कमिटियों ने तत्परता से कार्य किया और 11,12, 13 फरवरी 1932 को झुंझुनू में जाट महासभा का इतना शानदार जलसा हुआ जैसा सिवाय पुष्कर के कहीं भी नहीं हुआ। इस जलसे में लगभग 60000 जाटों ने हिस्सा लिया। इसे सफल बनाने के लिए ठाकुर देशराज ने 15 दिन पहले ही झुंझुनू में डेरा डाल दिया था। भारत के हर हिस्से के लोग इस जलसे में शामिल हुये। दिल्ली पहाड़ी धीरज के स्वनामधन्य रावसाहिब चौधरी रिशाल सिंह रईस आजम इसके प्रधान हुये। जिंका स्टेशन से ही ऊंटों की लंबी कतार के साथ हाथी पर जुलूस निकाला गया।

कहना नहीं होगा कि यह जलसा जयपुर दरबार की स्वीकृति लेकर किया गया था और जो डेपुटेशन स्वीकृति लेने गया था उससे उस समय के आईजी एफ़.एस. यंग ने यह वादा करा लिया था कि ठाकुर देशराज की स्पीच पर पाबंदी रहेगी। वे कुछ भी नहीं बोल सकेंगे।

यह जलसा शेखावाटी की जागृति का प्रथम सुनहरा प्रभात था। इस जलसे ने ठिकानेदारों की आँखों के सामने चकाचौंध पैदा कर दिया और उन ब्राह्मण बनियों के अंदर कशिश पैदा करदी जो अबतक जाटों को अवहेलना की दृष्टि से देखा करते थे। शेखावाटी में सबसे अधिक परिश्रम और ज़िम्मेदारी का बौझ कुँवर पन्ने सिंह ने उठाया। इस दिन से शेखावाटी के लोगों ने मन ही मन अपना नेता मान लिया। हरलाल सिंह अबतक उनके लेफ्टिनेंट समझे जाते थे। चौधरी घासी राम, कुँवर नेतराम भी


[पृ.6]: उस समय तक इतने प्रसिद्ध नहीं थे। जनता की निगाह उनकी तरफ थी। इस जलसे की समाप्ती पर सीकर के जाटों का एक डेपुटेशन कुँवर पृथ्वी सिंह के नेतृत्व में ठाकुर देशराज से मिला और उनसे ऐसा ही चमत्कार सीकर में करने की प्रार्थना की।

Notable persons

  • उमादत्त महाजन बगड़/ राजू राम माली बगड़ / लक्ष्मण सिंह बगड़- माम चंद माली बगड़ - 15 जून 1946 को झुंझुनू में किसान कार्यकर्ताओं की एक बैठक चौधरी घासी राम ने बुलाई. शेखावाटी के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया. अध्यक्षता विद्याधर कुलहरी ने की. इसमें यह उभर कर आया कि भविष्य में समाजवादी विचारधारा को अपनाया जाये. जिन व्यक्तियों ने किसान सभा का अनुमादन किया उनमें आप भी सम्मिलित थे. (राजेन्द्र कसवा, p. 201-03).
  • Ch. Hari Singh Dangi Retd. Teacher and ex-serviceman, social activist.

External links

References

  1. 1. जागा सुरेन्द्र सिंह, ग्राम दादिया, तहसील - किशनगढ़, अजमेर, 2. राम चन्द्र चाहर, लाडनू, नागौर
  2. राजेन्द्र कसवा: मेरा गाँव मेरा देश (वाया शेखावाटी), कल्पना पब्लिकेशन, जयपुर, 2012, ISBN 978-81-89681-21-0, P. 96-97
  3. ठाकुर देशराज:Jat Jan Sewak, p.1, 4-6

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