Meham

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Location of Meham in Rohtak District

Meham (मेहम) is a town and tehsil in Rohtak district in Haryana. It is also a constituency of Haryana Vidhan Sabha.

History

Meham is an ancient, historical town. Mahabharata Sabha Parva in Sanskrit mentions about the city Meham along with Sirsa and Rohtak which Nakula won:

शैरीषकं महेच्छं (महेत्थं) च वशे चक्रे महाद्युतिः
शिबींस तरिगर्तान अम्बष्ठान मालवान पञ्च कर्पटान || 6 ||

Means : इस प्रदेश के मध्य स्थान शैरीषक (सिरसा) और महेत्थं (महम) आदि को उस तेजस्वी नकुल ने जीता । शैरीषक = सिरसा, महेत्थं = महम महम और सिरसा भी महाभारत के जमाने से पहले के बसे हुए नगर हैं ।

Villages in Maham tahsil

Ajaib, Balhemba, Bainsi, Bedwa, Bhaini Bharon, Bhaini Chanderpal, Bhaini Maharajpur, Bhaini Surjan, Bharan, Chandi, Farmana Badshahpur, Farmana Khas, Gugaheri, Gurawar, Kharak Jatan, Kharkhra, Kherainti, Kheri Maham, Lakhan Majra, Madina, Madina Gindhran, Madina Kaursan, Maham(MC), Mokhra Khas, Mokhra Kheri Rojh, Mokhra Kheri, Muradpur Tekna, Nidana, Nindana, Seman, Shekhupur Titri, Sisar Khas,

महम चौबीसी खाप

यह खाप अपने जुझारूपन के लिए प्रसिद्द है. इसमें मलिक, दलाल, राठी, बूरा गोत्रीय जाटों के गाँव सामिल हैं. यह वाही खाप है जिसने कलानौर के जालिम नवाब को समूल उखाड़ फेंका था और आज भी राजनेताओं का समय समय पर मार्ग-दर्शन करती रहती है. महम चौबीसी का चबूतरा विश्व प्रसिद्द है. यहाँ के दौलत राम को अंग्रेजों ने फांसी दी थी. मदीना , महम, मोखरा, आदि इस खप के प्रमुख गाँव हैं. यह खाप हरियाणा के रोहतक जिले में है. आनंद सिंह दांगी के अतिरिक्त अनेक राजनेताओं ने इस खाप के चबूतरे पर माथा टेक कर अपनी राजनैतिक यात्रा शुरू की है. [1]

Maham's role in the 1857 AD War of Independence

दलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

.....उस समय रोहतक बंगाल के गवर्नर के मातहत था, तथा कमिश्नरी का हैड क्वार्टर आगरा था। रोहतक का डिप्टी कमिश्नर जोहन एडमलौक था। 23 मई को क्रान्तिकारी सेना ने बहादुरगढ़ में प्रवेश किया और 24 मई को रोहतक पहुंची। डिप्टी कमिश्नर गोहाना के रास्ते करनाल भाग गया। रहे हुए अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया गया। जेल के दरवाजे खोल दिये गए, कचहरी को आग लगा दी गयी। क्रान्तिकारी सेना ने शहर के हिन्दुओं को लूटना चाहा परन्तु जाटों ने ऐसा न करने दिया। क्रान्तिकारियों ने खजाने से दो लाख रुपया निकाल लिया। मांडौठी, मदीना, महम की चौकियां लूट ली गईं। सांपला तहसील को आग लगा दी गई। सभी अंग्रेज स्त्रियों को जाटों ने, मुस्लिम राजपूत (रांघड़ों) के विरोध के बावजूद, सही सलामत उनके ठिकानों पर पहुंचा दिया। गोहाना पर गठवाला मलिक जाटों ने कब्जा जमा लिया। अंग्रेजी सेना 30 मई को अम्बाला से रोहतक को चली, परन्तु देशी सेना ने उसे श्यामड़ी (सामड़ी) के जंगल में युद्ध करके हरा दिया। [2]

Archaeological explorations at Meham

Archaeologists exploring the ruins - found under three metres of a mud hillock in the Meham area of Rohtak district - said that an ancient city dating back to the 5,000-year-old Harappan civilisation was being traced. It could be of the Rig Veda era, one official said. Further exploration at the site - referred to as Daksh Khera and located about 100 km from New Delhi - is on. So far only towns and villages - namely Banawali, Bhirdana, Rakhigarhi and Kunal - dating back to the Harappan civilisation had been found in Haryana. No ancient city had been discovered. Archaeologists made the discovery following a media report that a very old skeleton had been found near Farmana Khas village, 12 km from Meham town.[3]

Jat Gotras

Notable persons

External links

References

  1. Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.20
  2. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter VII (Page 612)
  3. [1]

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