Chebuk

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Chebuk (चेबुक)[1] [2] Chabuk (चाबुक) Chavuk (चावुक) Chevku (चेवकु) is title of Tomar Jats in Aligarh district in Uttar Pradesh. Chiefs of Pisawa belong to Chabuk Tanwar Gotra.[3] It is branch of Chauhan. Chabuk or Chapotkat is the main section of Tomars.[4] They were supporters of Tomar Confederacy. [5]

Origin

It is Branch of Tomars which include - 1. Thenua 2. Chebuk, 3. Rawat, 4. Sahrawat 5. Rao 6. Salkalan, 7. Janghara, 8. Bhind Tomar, 9. Antil 10. Jaiswal, 11. Garhwal.[6]

History

Ram Sarup Joon[7] writes that the Chiefs of Pisawa belong to Chabuk Tanwar Gotra and chiefs of Nogaja in district Jullundur also belong to this gotra. According to "Todd's Rajasthan" residents of Bhan were called Bhind.

During Buddhist rule there was a struggle between Brahmanas and Jats. Jats had beaten Brahmans with Chabuk hence these people were known as Chabuk. Pulinda, China, Hunas mention about Chivuka vansha. At some time they were the rulers of Pisawa. It is said that Chabuk word is derived from Chapotkata.[8] Pargitar in his Markandeya Purana translation notes a people called Chibuka of Chivuka in the north of India. [9] They are the modern Chebuk Jats. They are mentioned in the Mahabharata. [10] [11]

According to B S Dahiya Pargitar in his Markanddeya Purana translation notes a people called Chibuka or Chivuka in the north of India. They are the modern Chebuk Jats. They are mentioned in the MBT.[12] [13]

Chabuk Khap

Chabuk Tomar khap has 12 villages in Uttar Pradesh in Aligarh district. Jat gotra is Chabuk Tomar. Pisawa (पिसावा) , Jalalpur (जलालपुर), Bhaiyaka (भैयाका), Deta (डेटा) are main villages. [14]

Thakur Deshraj writes in Jat Itihas (Chapter VIII) -

चाबुक का इतिहास

चाबुक शब्द किस शब्द का अपभ्रंश है, यह हमारी समझ में नहीं आता। मध्यकालीन राजवंशों में चापोत्कट वंश का नाम आता है। संभव है चाबुक गोत के जाट चापोत्कट ही हों। चापोत्कट राजपूत और गूजर दोनों में ही पाए जाते हैं। किन्तु वहां वे चावड़ा कहलाते हैं। इस गोत के जाटों का जहां तक प्रश्न है, ये चाबुक लोग एक समय पिसावा के मालिक थे। अलीगढ़ में मराठों की ओर से जिस समय जनरल पीरन हाकिम था, इस गोत्र के सरदार मुखरामजी ने पिसावा और दूसरे कई गांव परगना चंदौसी में पट्टे पर लिए थे। सन् 1809 ई. में मि. इलियट ने पिसावा के ताल्लुके को छोड़ कर सारे गांव इनसे वापस ले लिए। किन्तु सन् 1883 ई. में अलीगढ़ जिले के कलक्टर साहब स्टारलिंग ने मुखरामजी के सुपुत्र भरतसिंहजी को इस ताल्लुके का 20 साल के लिए बन्दोबस्त कर लिया। सन् 1857 ई. में विद्राहियों से भयभीत हुए अंग्रजों की भरतसिंहजी के वंशजों ने पूरी सहायता की थी। तब से पिसावा उन्हीं के वंशजों के हाथ में है। राव साहब शिवध्यानसिंह और कु. विक्रमसिंह एक समय पिसावा के नामी सरदार थे। किन्तु खेद है कि उसी साल कुं. विक्रमसिंह का देहान्त हो गया। आप राजा-प्रजा दोनो ही के प्रेम-भाजन थे। प्रान्तीय कौंसिल के मेम्बर भी थे। जातीय संस्थाओं से आपको खूब प्रेम था। शिवध्यानसिंहजी भी जाति-हितैषी थे। आप प्रान्तीय कौसिल के सदस्य और लोकप्रिय व्यक्ति थे। मिलनसारी आपका गुण था।[15]

Notable Persons

  • Vivek Kumar (Chabuk) - GM BHEL Haridwar, Address: N-114, Shiwalik Nagar, BHEL, Haridwar, originally from 126(300, Chau Mandi, Roorkee. Founder President of Jat Vikas Manch, BHEL, Haridwar. [16]

Population

References


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