Pisawa

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Location of Gabhana in Aligarh district

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Pisawa (पिसावा) is a village in tahsil Gabhana of Aligarh district in Uttar Pradesh. Pisawa was a Tomar Riyasat. The Tomars of Pisawa were originally from village Prithla (Palwal) Haryana. Chiefs of Pisawa belong to Chabuk Tanwar Gotra.[1]

Location

It is located 20 km from Khurja and 10 km from Jattari. Pisava is a Village in Chandaus Block in Aligarh District of Uttar Pradesh State, India. It belongs to Aligarh Division . It is located 46 KM towards west from District head quarters Aligarh, 15 KM from Chandaus, 403 KM from State capital Lucknow. Pisava Pin code is 202155 and postal head office is Pisawah . Jalokhari (2 KM ), Marha Habibpur (2 KM) , Shahpur (3 KM) , Bhojaka ( 4 KM ) , Detakhurd (4 KM) are the nearby Villages to Pisava. Pisava is surrounded by Khurja Block towards North , Tappal Block towards west , Jewar Block towards west , Khair Block towards South . This Place is in the border of the Aligarh District and Bulandshahr District. Bulandshahr District Araniya is East towards this place . [2]

Jat Gotras

History

Ram Sarup Joon[3] writes that the Chiefs of Pisawa belong to Chabuk Tanwar Gotra and chiefs of Nogaja in district Jullundur also belong to this gotra. According to "Todd's Rajasthan" residents of Bhan were called Bhind.

Pisawa in district Aligarh was a Tomar state. They came from village Prathala now in district Palwal (old district Faridabad and Gurgaon). The Pisawa fort is related with Sardar Mukhram (Tomar), his son Bhagat Singh in year 1883 was given in settlement for 20 years by the Aligarh Collector Starling. Shivdhyan Singh (Shyodan Singh), Giriraj Singh, Vikram Singh, Guljar Singh and Gulbir Singh were brothers.

Shivdhyan Singh had two sons, 1. Rajendra Singh, 2. Ramkishan Singh. It is here to mention that sister of Shivdhyan Singh was married to Baba Sawan Singh (Grewal), the second GURU (1903-1948)of Radha Swami Satang Beas (RSSB), who was an engineer from Thomson college (now IIT Roorkee) and joined MES. Later he became Guru of RSSB.

Giriraj Singh had two sons, 1. Ramkumar Singh, 2. Krashan Kumar Singh (KK Singh ex.IAS UP Cadre).

Vikram Singh had two sons, 1. Surendrapal Singh, 2. Devendrapal Singh. Devendrapal Singh was a politician and remained Chairman of Co Operative Bank & M.L.C. His wife Usharani Tomar was M.P (Aligarh Loksabha, 1984-1989)

Guljar Singh has one son, Mahendra Singh. Mahendra Singh was married (11-12-1969) with Smt.Renuka Kaur d/o Maharaja Brijendra Singh of Bharatpur, Rajasthan.

Gulbir Singh has one son, Brajraj Singh (MBBS), who has two sons, 1. Chadrraj Singh, 2. Inderraj Singh (MBBS out of India).

Presently Chandrraj is living in Pisawa.

Shivdhyan Singh, Vikram Singh were awarded the title of Ray Sahab, Roy Bahadur by British Govt. Locally all were popularly called as Kunwar Sahab and Chabuk was their gotra, while in writing use as Tomar or Tanwar as surname.

At the time of Shivdhyan Singh and Vikram Singh common facilities were available in Pisawa, like Govt.Junior high school, Vikram Seva Sadan Inter college, Primary health centre, Veterinary hospital, co operative seed store, Post office, electricity, telephone, roadways bus service Pisawa Aligarh and Private bus service Pisawa-Khurja.

Weekly market called Penth or bazar on every Wednesday and Saturday and on Sunday there held animal market. After that two facilities have been added,Bank and Police Station in Pisawa.

Radha Swami Satsang Ashram where every Sunday Satsang organised. Expect agriculture work , horse businesses,horticulture(Bag) were main.

Pisawa is a town and big Panchayat, it covers the villages Pisawa, Jalalpur, Sherpur,Nagala Postika (Faridpur), Nagala Bhupsingh and Sujabalgarh.

Source - Ranvir Singh Tomar (Mob:9425137463)

Jat Monuments

पिसावा जाट रियासत

तोमर जाट रियासत का किला पिसावा

पिसावा जाट रियासत है यह पर तोमर गोत्र के जाटों का राज था। पिसावा के तोमर राजाओं का मूल निकास पृथला गांव पलवल हरियाणा से है। पृथला गाम के दो सगे भाई आवे (आदे) और बावे (बादे)थे| जो किसी कारणवश पृथला को छोड़ कर आधुनिक अलीगढ जिले की खैर तहसील में पिसावा रियासत बनाई । बाद में बादे गंगा पार चला गया और एक अलग राज बनाया उसने राजपूत लड़की से शादी कर ली। उसके वंशज राजपूत तोमर हो गये आज भी बादे के वंशज पिसावा के तोमरों से भाई बंदी रखते हैं। उस इलाके (बदायूं) में जाट जाति कम ही है।


राजा परिवार पिसावा की वंशावली

शिवसिंह राजा के के दो भाई कुंवर तेज सिंह और कुंवर गोविन्द सिंह थे | राजा शिवसिंह के एक पुत्र सुमेर सिंह थे और एक पुत्री जो मोलाहेडी जागीरी में ब्याही थी | जब राजा सुमेरसिंह का निधन हुआ उस समय शिवध्यानसिंह की अवस्था मात्र 4 वर्ष की थी | राजा शिवध्यान सिंह की माँ ने सुरक्षा की दृष्टि से उनको बुआ के घर मौलाहेडी भेज दिया. जब उनकी उम्र 18 साल थी उनको पढाई के लिए ऑक्सफ़ोर्ड भेजा गया इसके बाद उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया युद्ध की समाप्ति पर उनको राव राजा का खिताब मिला. राजा शिवध्यान सिंह का विवाह सहानपुर रियासत की राजकुमारी से हुआ. इनके दो पुत्र कुंवर रामकृष्ण सिंह और कुंवर राजेंद्र सिंह और एक पुत्री राजकुमारी शिवकुमारी कौर थी.|राजेंद्र सिंह का विवाह मुरादाबाद रियासत में हुआ था | इनके पुत्र कुंवर यादवेन्द्र सिंह जी है जिनका विवाह अकलकोट रियासत में हुआ है उनके एक पुत्र और पुत्री है[4]

शोयदान सिंह (शिवध्यानसिंहजी तोमर) वे पिसावा के मुखिया रहे हैं। वे घोड़ों के अंतरराष्ट्रीय व्यापारी रहे हैं। उनके एक पूर्वज स्वरुप सिंह ने इब्राहिमपुर (ख़ुर्जा) गांव में जागीरी प्राप्त की थी। उनके सात लड़के थे। इब्राहिमपुर पर तोमर जाटों से पहले अत्री जाटों का राज था । स्वरूपसिंह जी ने अत्री जाटों को युद्ध में हराकर इब्राहिमपुर और शेरपुर की रियासत पर कब्ज़ा कर लिया। तबसे अत्री जाट और शेरपुर व इब्राहिमपुर गांव के तोमरों में शादी नही होती है। कहा जाता है कि तोमर जाटों ने चाबुक से ब्राह्मण को पीटा था इसलिए इन लोगों को अलीगढ में चाबुक के रूप में जाना जाता है। तोमर लोग पिसावा के मालिक थे।

अलीगढ़ में मराठों की ओर से जिस समय जनरल पीरन हाकिम था, इस गोत्र के सरदार मुखरामजी तोमर ने पिसावा और दूसरे कई गांव परगना चंदौसी में पट्टे पर लिए थे। सन् 1809 ई. में मि. इलियट ने पिसावा के ताल्लुके को छोड़ कर सारे गांव इनसे वापस ले लिए। किन्तु सन् 1883 ई. में अलीगढ़ जिले के कलक्टर साहब स्टारलिंग ने मुखरामजी के सुपुत्र भगतसिंहजी को इस ताल्लुके का 20 साल के लिए बन्दोबस्त कर लिया। तब से पिसावा उन्हीं के वंशजों के हाथ में है। शिवध्यानसिंह और कु. विक्रमसिंह तोमर एक समय पिसावा के नामी सरदार थे। किन्तु खेद है कि उसी साल कुं. विक्रमसिंह का देहान्त हो गया। आप राजा-प्रजा दोनों ही के प्रेम-भाजन थे। प्रान्तीय कौंसिल के मेम्बर भी थे। शिवध्यानसिंहजी भी जाति-हितैषी थे।

गोठडा (सीकर) का जलसा सन 1938 जयपुर सीकर प्रकरण में शेखावाटी जाट किसान पंचायत ने जयपुर का साथ दिया था. विजयोत्सव के रूप में शेखावाटी जाट किसान पंचायत का वार्षिक जलसा गोठडा गाँव में 11 व 12 सितम्बर 1938 को शिवदानसिंह अलीगढ की अध्यक्षता में हुआ जिसमें 10-11 हजार किसान, जिनमें 500 स्त्रियाँ थी, शामिल हुए. [5]

Population

Pisava 2011 Census Details - Pisava Local Language is Hindi. Pisava Village Total population is 11960 and number of houses are 2047. Female Population is 46.7%. Village literacy rate is 63.1% and the Female Literacy rate is 24.1%.

External links

References

  1. History of the Jats/Chapter V by Ram Swarup Joon
  2. http://www.onefivenine.com/india/villages/Aligarh/Chandaus/Pisava
  3. History of the Jats/Chapter V,p.75
  4. पांडव गाथा पुस्तक - लेखक कंवरपाल सिंह
  5. डॉ पेमाराम, p. 162

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