Edda

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Edda (एड्डा) (Aidda) applies to the Old Norse Poetic Edda and Prose Edda, both of which were written down in Iceland during the 13th century in Icelandic, although they contain material from earlier traditional sources, reaching into the Viking Age. The books are the main sources of medieval skaldic tradition in Iceland and Norse mythology. The religious book of ScandinaviaEdda’ mentions that the ancient inhabitants of Scandinavia were Jats.

Jats in Edda

According to James Todd [1] In the Edda we are informed that the Getae, or Jats, who entered Scandinavia, were termed Asi, and their first settlement As-gard or Asirgarh, ' fortress of the Asi ' [IGI, vi. 12].


The Asiagh Jats were inhabitants of Asirgarh. One group of them migrated to Europe. Another group moved to Jangladesh which coincided with Bikaner princely state. The religious book Edda of the Scandinavia mentions of this place. It is mentioned that Aryans moved from Asirgarh to scandinavia. According to Bhim Singh Dahiya Asirgarh town in Malwa was founded by one Beeka Jat. Its corresponding town is called Asigord in Scandinavia.[2]

There is description of the Malwa in the religious book of Scandinavia- Edda, according to Thakur Deshraj. Thakur Deshraj has mentioned in his book on History of Jats “Jat Itihas” (Hindi) (1934) that the country Assyria gets its name from Asiagh gotra Jats. The origin of word Asiagh is from Sanskrit word ‘Asi’ meaning sword. According to Kautilya the people who depended on ‘Asi’ (sword) for their living were known as Asiagh. The Asiaghs moved from Asirgarh in Malwa to Europe. Those who settled in Jangladesh were called Asiagh and those who moved to Scandinavia were known as Asi.

ठाकुर देशराजलिखते हैं

ठाकुर देशराज[3] लिखते हैं जाट इतिहास में लिखते हैं कि स्कैण्डनेविया की धर्म पुस्तक ‘एड्डा’ में उल्लेख - स्कैण्डनेविया की धर्म पुस्तक ‘एड्डा’ में लिखा हुआ है कि - "यहां के आदि निवासी जटेस और जिटस पहले आर्य कहे जाते थे तथा वे अलीगढ़ के निवासी थे।" (जो कि मालवा के निमाड़ जिले में है। - लेखक) मिस्टर पिंकाटन का विचार है कि - ईसा से 500 वर्ष पूर्व डेरियस के समय में यहां (स्कैंडिनेविया) ओडन नाम का एक आदमी आया था जिसका उत्तराधिकारी गौतम था। इनके अतिरिक्त स्कैंडिनेविया की धारणाएं भी धार्मिक हिन्दू कथाओं से मिलती-जुलती हैं। इनके दिवस विभाग आदि सभी हिन्दुओं के ढंग पर हैं। अतः स्कैंडिनेविया निवासी काउण्ट जोर्नस्टर्न का कथन अक्षरशः सत्य प्राचीन होता है कि - हम लोग भारत से आये हैं।

स्कैण्डनेविया संस्कृत शब्द स्कंधनाभि का अपभ्रन्श हैं। स्कंधनाभि का अर्थ है - मुख्य सैनिक। इससे भी यही ध्वनि निकलती है कि इस देश को भारतवर्ष की सैनिक-जाति-क्षत्रियों ने बसाया। मि. रेम्यूसेट का दावा है कि - कुल मध्य ऐशिया ही यादवों की बस्ती है। प्रोफेसर पी. कॉ कहते हैं - फारस, कोल, कीच और आरमीनिया के प्राचीन नक्शे भारत वासियों के उपनिवेश होने के स्पष्ट और आशचर्यजनक सबूतों से भरे पड़े हैं। काउन्ट जोर्नस्टर्न कहते हैं - रोम की इट्रस्कन जाति भी हिन्दूओं में से है। कर्नल टाड कहते हैं - जैसलमेर के इतिहास से पता चलता है कि हिन्दू जाति के बाल्हीक खानदान ने महाभारत के पश्चात् खुरासान में राज्य किया। मि.पी. कॉक का मत है कि - महाभारत का युद्ध समाप्त होते ही कुछ लोग यहां से निकाल दिए गए तथा कुछ लोग प्राण-रक्षा के कारण जान लेकर भागे थे। उनमें से कतिपय आदि सभ्यता के पटु थे और कुछ व्यवसायी योद्धा थे।..... अधिकतर लोग यूरोप में और अमरीका में जाकर बसे । महाभारत के लोग भिन्न भिन्न मार्ग से गए। कुछ तो पूर्व की ओर से, श्याम, चीन, भारतीय द्वीप-समूह में, कुछ लोग पश्चिमोत्तर से तुर्किस्तान, साइबेरिया, स्कैण्डनेविया, जर्मनी, इंगलिस्तान, फारस, ग्रीक, रोम आदि की ओर जा बसे और कुछ लोग पश्चिम से पूर्वी अफ्रीका


:1. आर्यों का मूल स्थान 14 वां अध्याय।


जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठान्त-98


और वहां से मिश्र को गए। ( देखो मासिक पत्र 'स्वार्थ' के संवत 1976 माघ, फाल्गुन के अंक 4 , 5 में (प्राचीन भारत के उपनिवेश) नामक लेख ले. बा. शिवदास गुप्त.)

References

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