Greece

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Author: Laxman Burdak, IFS (R).
Map of Greece
Map of Greece

Greece is a country in south-eastern Europe, situated on the southern end of the Balkan peninsula

History

Herodotus, a famous Greek historian, has described himself as a descendant of Atre (Atreya).[1]

Some people in Greece consider Balram, brother of Lord Krishna as their ancestor. Yunan, the other name of Greece is after the name of Chandra Vanshi King Yavan who was from Satjit branch of Yadu.[2]


Dr. Radhakrishnan, in his history of the world writes that the people, who were called Hellene in Greece, settled there about 2000 years before Christ and named their country Hellas. They were Aryans and brought their bards with them. They worshipped Sun, Moon and Goddesses like the Indian Aryans. In 480 BC Iranians conquered Greece. At that time King of Sparta was Leonidas.[3]

Alexander's General Seleucus was from Hellene confederacy. After being defeated by Chandra Gupta Maurya, he gave his daughter Eellen in marriage to him. Seleucus, before returning, recruited a large number of Jats in his army and settled them in an area named Mawrya and a small island called Jatroti.[4]

इतिहास

दिलीपसिंह अहलावत लिखते हैं ....मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत के इतिहास में विदेशी जातियों का आना बहुत महत्त्व रखता है। ये जातियां मध्य एशिया की रहने वाली थीं। इनमें बैक्ट्रिया (बल्ख) के यूनानी और शक और कुषाण प्रमुख हैं। इनके बहुत समय बाद हूणों ने भी आक्रमण किये जो बाद में लिखे जायेंगे।

यवन अथवा यूनानी - सम्राट् सिकन्दर की मृत्यु के पश्चात् उसके साम्राज्य को उसके सेनापतियों ने आपस में बांट लिया। सैल्यूकस ने सीरिया, पार्थिया, बैक्ट्रिया तथा पश्चिमी भारत पर अपना अधिकार जमा लिया। कुछ समय बाद उसका साम्राज्य नष्ट होने लगा। 250 वर्ष ई० पू० में पार्थिया और बैक्ट्रिया राज्य स्वतन्त्र हो गये। इसी राज्य के शासकों ने मौर्य राज्य के पतन के पश्चात् भारत पर आक्रमण आरम्भ किए। सिकन्दर के बाद भारत में दूर-दूर तक हमले करने वाला बैक्ट्रिया का शासक डेमिट्रियस था। उत्तर-पश्चिम भारत की दुर्बलता और अव्यवस्था का लाभ उठाकर उसने अफगानिस्तान, पंजाब और सिन्ध के कुछ भागों पर लगभग 175 ई० पू० में अपना अधिकार कर लिया। परन्तु उसकी भारत विजय बहुत स्थायी नहीं रही।

इसी दौरान बैक्ट्रिया पर युक्राटायडस ने अपना अधिकार कर लिया और फिर भारत की ओर बढ़ा। उसने डेमिट्रियस से भारत का कुछ भाग भी छीन लिया।

इस तरह से भारत की सीमा पर दो अलग-अलग यूनानी खानदानों के राज्य स्थापित हो गये। एक खानदान (डेमिट्रियस) के पास पूर्वी पंजाब, सिंध, पश्चिमी पंजाब आदि का भाग जबकि दूसरे के पास बैक्ट्रिया, काबुल, कन्धार, गांधार और पश्चिमी पंजाब आदि के भाग थे। इन यूनानियों का शासन बहुत समय तक चलता रहा। इनमें केवल दो ही शासक प्रसिद्ध थे। (1) मिनाण्डर (2) एनटालकेडस।

मिनाण्डर - यह डेमिट्रियस के खानदान का था। डॉ० वन्सन्ट स्मिथ के अनुसार यह 160 ई० पू० से 140 ई० पू० तक शासक रहा। यह शुङ्गवंश के राजा पुष्यमित्र का समकालीन था। मिनाण्डर एक


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-486


बड़ा विजेता शासक था जिसने व्यास नदी को पार करके गंगा और यमुना नदियों के मध्य क्षेत्रों को जीत लिया। इसके अतिरिक्त काठियावाड़ और भडोच को भी विजय कर लिया। इसने पाटलिपुत्र पर भी आक्रमण किया परन्तु वहां से इसे पुष्यमित्र ने वापिस धकेल दिया। इसके साम्राज्य में अफगानिस्तान, पंजाब, काठियावाड़, सिन्ध, राजपूताना और मथुरा तक के प्रदेश थे। इसकी राजधानी शाकल (सियालकोट) थी। यह बौद्ध-धर्म का अनुयायी था।

एनटालकेडस - यह टिक्रीटाईड्स के खानदान से था। इसकी राजधानी तक्षशिला थी। इसके बाद यह यूनानी राज्य दुर्बल हो गया। बाद के शासक दुर्बल थे। उन्होंने हिन्दू व बौद्ध-धर्म अपना लिया और सदा के लिए भारतीय हो गए। डा० वन्सन्ट स्मिथ के अनुसार 140 ई० पू० से 120 ई० पू० के लगभग कई विदेशियों (शकों) ने भारत पर आक्रमण किए और इन साम्राज्यों को समाप्त कर दिया। परन्तु छोटे-छोटे क्षेत्रों पर इन यूनानी सरदारों का राज्य फिर भी रहा जिसको बाद में कुषाण लोगों ने समाप्त कर दिया। [5]

ग्रीस (यूनान)

ग्रीस (यूनान) - सल्तनत यूनान को ग्रीस कहते हैं। ग्रीस अपभ्रंश है गौरेश का। गोर = गौरे, ईश = स्वामी अर्थात् यूरोप निवासी गोरे आदमियों का देश। इसीलिए महाभारत आदि में गौराण्ड करके पुकारा गया है। यूनान में जो सबसे पहला राजा हुआ उसका नाम माइनस् था। माइनस् अपभ्रंश है मनु का। मनु सबसे प्रथम श्रेणी का फिलोस्फर (योगी), लेजिस्लेटर (कानूदां) और चक्रवर्ती महाराजा हुआ है।[6]

जाट इतिहास

विश्व विजय सिकन्दर के देश ग्रीस में भी जाटों ने अपना उपनिवेश स्थापित किया था, यद्यपि इस समय ग्रीस में उनका अस्तित्व नहीं पाया जाता, किन्तु उसके मोरिया (Morea) के निकट ज्यूटी (Zouti) द्वीप के निवासी जाटों के उत्तराधिकारी हैं।[7]

Population

External links

References


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