Kukura

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Kukara Ancestry

Kukara (कुकर) was a very ancient northwestern Mahabharata tribe. Kukura was a Chandravanshi Kingdom during Mahabharata period. It is identified with eastern Rajasthan. Kukura is also mentioned as a Nagavanshi King in Mahabharata. Varahamihira has mentioned Kukuradesha in Brihatsamhita (14,4). Probably Kukuras were related with Shakas and considered to be Anaryas. Khokhars or Gakkars who killed Muhammad Ghori while returning from India to Ghazni were descendants of Kukuras.

Variants of name

Genealogy

As per Bhagavata Purana ancestry of Kukura was as under:

AndhakaKukuraBahniVilomanKapotaromanAnu → → AndhakaDundubhiAvidyotaPunarvasuAhukaUgrasenaKansa

Jat Gotras from Kukara

  • Kokorani (कोकोराणी) gotra of Jats were inhabitants of republic of Kukura during Mahabharata period. [3]

History

Sandhya Jain[4] mentions that Kukura (कुकुर) was a very ancient northwestern Mahabharata tribe and branch of the Yadava confederacy. Mentioned in Mahabharata (geography' (VI. 10.41) and the tribute list (II.48.14). Supported Duryodhana in the war (VI. 47.7) .

The Mahabharata Tribe - Kukura (कुकुर) may be identified with Jat Gotra - Khokhar/Kukar/Kukal which is a derivative of Kukar. Khokhars are mentioned in Vayu Purana and Visnu Purana as 'Kokarakas'. [5] [6]

In Mahabharata

Kukura (कुकुर) in Mahabharata (II.46.21), (II.48.14),(II.48.15), (V.101.10), (VI.10.41), (VI.47.7),

Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 46 describes game at dice and kings who were present in that assembly. Kukuras (कुकुर) are mentioned in Mahabharata (II.46.21).[7]....The Nipas, the Chitrakas, the Kukkuras, the Karaskaras, and the Lauha-janghas are living in the palace of Yudhishthira like bondsmen.


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 48 describes Kings who presented tributes to Yudhishthira. Two Kukura (कुकुर) Kings are mentioned in this chapter. One Kukura (कुकुर) King is mentioned in Mahabharata (II.48.14).[8].... the Ambashtas, the Kukuras, the Tarkshyas, the Vastrapas along with the Palhavas, the Vasatayas, the Mauleyas along with the Kshudrakas, and the Malavas,....


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 48 describes Kings who presented tributes to Yudhishthira. Second Kukura (कुकुर) King is again mentioned in Mahabharata (II.48.15). [9].... the Paundrakas, the Kukkuras, the Sakas, the Angas, the Vangas, the Pundras, the Sanavatyas, and the Gayas--these good and well-born Kshatriyas distributed into regular clans and trained to the use of arms, brought tribute unto king Yudhishthira.


Udyoga Parva/Mahabharata Book V Chapter 101 describes Bhogavati city and innumerable Nagas dwelling there. Kukura (कुकुर) (Naga) mentioned in Mahabharata (V.101.10).[10]....Bahyakunda, Mani, Apurana, Khaga, Vamana, Elapatra, Kukura, Kukuna,....


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Kukura (कुकुर) province is mentioned in Mahabharata (VI.10.41).[11]....the Jatharas, the Kukkuras, the Sudasharnas O Bharata; the Kuntis, the Avantis, and the further-Kuntis;....


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 47 describes immeasurable heroes assembled for battle. Kukuras (कुकुर) mentioned in Mahabharata (VI.47.7).[12]....Let the Samsthanas, the Surasenas, the Venikas, the Kukkuras, the Rechakas, the Trigartas, the Madrakas, the Yavanas, with Satrunjayas, and Dussasana, and that excellent hero Vikarna, and Nanda and Upanandaka, and Chitrasena, along with the Manibhadrakas, protect Bhishma with their (respective) troops,

कुकुर = कुक्कुर = कौकुर

विजयेन्द्र कुमार माथुर[13] ने लेख किया है ... Kukura (कुकुर) = Kukkura (कुक्कुर)= Kaukura (कौकुर) (AS, p.199)

प्राचीन साहित्य तथा अभिलेखों में कुकुर-निवासियों और कुकुरदेश का अनेक बार उल्लेख आया है-- 'शौण्डिकाः कुक्कुराश चैव शकाश चैव विशां पते, अङ्गा वङ्गाश च पुण्ड्राश च शाणवत्या गयास्तदा' (II.48.15) (महाभारत सभापर्व 52,16) तथा 'जठराः कुक्कुराश चैव सुदशार्णाश च भारत' (VI.10.41) (महाभारत भीष्म पर्व 9,42); 'यादवा: कुकुरा भोजा: सर्वे चांधकवृष्णय:' शांतिपर्व 81,29.

रुद्रदामन् के गिरनार अभिलेख (द्वितीय सदी ईस्वी) में इस इस प्रदेश की गणना रुद्रदामन् द्वारा जीते गए प्रदेशों में की गई है.-- 'स्ववीर्यार्जितानामनुरक्त सर्वप्रकृतीनां पूर्वापराकरा वन्त्यनूपनी वृदानर्त सुराष्ट्र श्वभ्रभरुकच्छ सिंधु सौवीर कुकुरापरान्त निषादादीनां...'

इस प्रदेश को गौतमीबलश्री के नासिक अभिलेख (द्वितीय शती ई.) में उसके पुत्र सातवाहन गौतमीपुत्र के राज्य में सम्मिलित बताया गया है.

वाराहमिहिर की बृहतसंहिता 14,4 में भी कुकुरदेश का उल्लेख है. प्राप्त साक्ष्य के आधार पर कहा जा सकता है कि संभवत: कुकुर लोग शकों से संबंधित थे तथा उनकी गणना अनार्य जातियों में की जाती थी. (12 वीं सदी में सिंध और पश्चिमी पंजाब में खोखर या घक्कर नामक एक जाति का निवास था. इन्होंने मुहम्मद गौरी का, जब भारत से गजनी लौट रहा था, वध कर दिया था. संभव है खोखर और कुकुर एक ही हों. प्राचीन काल में कुकुर देश की स्थिति पारियात्र या विंध्याचल के पश्चिमी भाग तथा राजस्थान या गुजरात के पूर्वी भाग में रही होगी. रुद्रदामन् के समय कुकुर शायद सिंध और अपरांत देश के बीच में बसे हुए थे.

कुकुर (जाति)

कुकुर प्राचीन भारत की एक जाति, जो संघ शासन की अनुयायी थी। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में उपहार लाने वालों में कुकरों का नाम भी आया है। 'महाभारत' के अनुसार अंधक-वृष्णि के गणराज्य की सेनाओं के साथ कुकुरसेना ने भी कृतवर्मा के नेतृत्व में युद्ध किया था और भीष्म की रक्षा की थी। 'राजसूय यज्ञ' के अवसर पर उपहार लाने वालों में कुकुरों का भी नाम आया है। कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार कुकुरों को राजशब्दोपजीवी संघ बताया गया है। पश्चिमी भारत से मिले कतिपय अभिलेखों में कुकुरों का उल्लेख आता है, जिनसे ज्ञात होता है, प्रथम शती ई. पू. के लगभग 'कुकुर' गणराज्य का अस्तित्व था। कदाचित वे मौर्य साम्राज्यवाद की लपट से अपनी रक्षाकर बच गए थे।[14]

मत्स्य पुराण

कृष्ण वंशावली में बभ्रु के संयोग से कंक की कन्या ने कुकुर, भजमान, शशि और कम्बलबर्हिष नामक चार पुत्रों को जन्म दिया। कुकुर का पुत्र वृष्णि,* वृष्णि का पुत्र धृति, उसका पुत्र कपोतरोमा, उसका पुत्र तैत्तिरि, उसका पुत्र सर्प, उसका पुत्र विद्वान् नल था। नल का पुत्र दरदुन्दुभि* नाम से कहा जाता था ॥51-63॥ नरश्रेष्ठ दरदुन्दुभि पुत्रप्राप्ति के लिये अश्वमेध-यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे थे उस विशाल यज्ञ में पुनर्वसु नामक पुत्र प्रादुर्भूत हुआ। पुनर्वसु अतिरात्र के मध्य में सभा के बीच प्रकट हुआ था, इसलिये वह विदान्, शुभाशुभ कर्मों का ज्ञाता, यज्ञपरायण और दानी था।

बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजन्! पुनर्वसु के आहुक नामक पुत्र और आहुकी नाम की कन्या- ये जुड़वीं संतान पैदा हुई। इनमें आहुक अजेय और लोकप्रसिद्ध था।

References

  1. Elliot and Dowson, op. cit., and Tribes and Castes, Vol.II
  2. Bhim Singh Dahiya : Jats the Ancient Rulers, 1980, p. 262
  3. Dr Mahendra Singh Arya etc, : Ādhunik Jat Itihas , Agra 1998, p.227
  4. Sandhya Jain: Adi Deo Arya Devata - A Panoramic View of Tribal-Hindu Cultural Interface, Rupa & Co, 7/16, Ansari Road Daryaganj, New Delhi, 2004 123, s.n.16
  5. Elliot and Dowson, op. cit., and Tribes and Castes, Vol.II
  6. Bhim Singh Dahiya : Jats the Ancient Rulers, 1980, p. 262
  7. आवर्जिता इवाभान्ति निघ्नाश चैत्रकि कौकुराः, कारः करा लॊहजङ्घा युधिष्ठिर निवेशने (II.46.21)
  8. अम्बष्ठाः कौकुरास तार्क्ष्या वस्त्रपाः पह्लवैः सह, वसातयः समौलेयाः सह क्षुद्रकमालवैः (II.48.14)
  9. शौण्डिकाः कुक्कुराश चैव शकाश चैव विशां पते, अङ्गा वङ्गाश च पुण्ड्राश च शानवत्या गयास तदा (II.48.15)
  10. बाह्यकुण्डॊ मणिर नागस तथैवापूरणः खगः, वामनश चैल पत्रश च कुकुरः कुकुणस तथा (V.101.10)
  11. जठराः कुक्कुराश चैव सुदशार्णाश च भारत, कुन्तयॊ ऽवन्तयश चैव तदैवापरकुन्तयः (VI.10.41)
  12. संस्थानाः शूरसेनाश च वेणिकाः कुकुरास तदा, आरेवकास त्रिगर्ताश च मद्रका यवनास तदा (VI.47.7)
  13. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.199
  14. भारतकोश-कुकुर (जाति)

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