Nauhwar

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Nauhwar (नौहवार)[1] [2][3] Nohwar (नौहवार) Nauwar (नौवार)Navaveer (नववीर)[4][5] Nava (नवा)[6] [7] Nav (नव)[8] [9] Novar (नोवार)/(नौवार)[10] Naubar (नौबर)[11] Nyauwar (न्यौवोर) [12] is gotra of Jats. Nauhwar (नौहवार) gotra Jats are found in Haryana, Uttar Pradesh, Rajasthan, Gujarat and Madhya Pradesh. Dilip Singh Ahlawat has mentioned it as one of the ruling Jat clans in Central Asia. [13]It is a branch of Chauhan.

Origin

It originated from place named Noha (नोह)in Mathura district. Nava (नव), son of Chandravanshi samrat Ushinara and his wife Nava (नवा), established Navarashtra in the present Mathura Janapada which is known as Noha . [14]

Nauhwar Khap

Nauhwar Khap has about 100 villages which are spread around Nauhjheel area in Mathura district in Uttar Pradesh. Nohwar Khap has 8 villages in Agra district and 124 villages in Mathura and two village Dhindar & Sherpura Ghaziabad in Ghaziabad district. [15]

Main villages of the khap are: Mathura district - Nauhjheel (नौहझील), Bajna Mathura (बाजना), Edalgarhi (एदल गढ़ी), Kateliya (कटेलिया). Nooh tahsil of Gurgaon district has 100 villages. Bulandshahr district village - Bhatta Parsaul (भट्टा पार्सौल) is in this khap. This khap includes Jats, Mule Jats, and Rajputs. [16]

History

They belong to Chandravanshi kshatriyas. They come mostly from Naujheel area in district Mathura. Nauhwar and Narwar Jats are cousins/brothers. They get Narwar name after Narhari, a great Jat warrior, from Nauhwar clan. Intermarriages are banned in these two gotras. Nauhwars are believed to have originated from village Shall (Salya) in block Naujheel. There are about 100 villages of Nauhwars and 12 of Narwars. In Palwal (Faridabad) area of Haryana they are called Nauhwar-Chauhans. Mr. Cheti Lal Verma of Palwal, a famous rich industrialist, was Nauhwar-Chauhan Jat. Nausherpur in Naujheel district has a population of Nauhwars.

ठाकुर देसराज लिखते हैं -

ये लोग वर्तमान नोह के आसपास के प्रदेश पर राज्य करते थे। महाभारत के पश्चात् यह भारत के उत्तर में आ पहुंचे थे, खोतान के पास नोह नामक झील के किनारे जाकर आवास किया था। सन् ईसवी के प्रारम्भिक काल में अपनी पितृ-भूमि वापस आ गये और जलेसर के पास बस्तियां आबाद कीं। वहां से उठकर वर्तमान नोह में एक झील खोदी और उसमें दुर्ग निर्माण किया। गदर सन् 1857 तक किसी न किसी रूप में ये वहां के शासक रहे हैं। ‘मथुरा मेमायर्स’ के हवाले से इनका कुछ हाल हम पीछे लिख चुके हैं। अब यह नोहबार (झील के नाम से) मशहूर हैं। (देखिये: जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठ-554)

जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत

दलीप सिंह अहलावत[17] लिखते हैं : ‘मथुरा मेमायर्स’ के लेखक ग्राउस साहब ने नव लोगों का वर्णन इस प्रकार किया है - चन्द्रवंशी सम्राट् ययाति के पुत्र अनु के वंश में अनु से नौवीं पीढ़ी में राजा |उशीनर हुए। उनकी पांच रानियां थीं - 1. नृगा 2. कृमि 3. नवा 4. दर्व 5. दृषद्वती। इनके एक-एक पुत्र हुआ। उनके नाम नृग, कृमि, नव, सुव्रत और शिवि थे (देखो वंशावली अनु का वंश)। नव ने नवराष्ट्र पर राज किया। कृमि ने कुमिल्लापुरी और शिवि ने शिवव्यास पर राज किया और नृग ने यौधेयों पर राज किया । (नृग के पुत्र यौधेय से यौधेयसंघ बना जो जाट गोत्र है)।

पाणिनि ने उशीनरों को पंजाब के पास रहते थे, लिखा है। ऐतरेय ब्राह्मण ने उन्हें कुरु, पांचालों में शामिल किया है। उशीनर की पांचवीं रानी दृषद्वती के नाम पर दृषद्वती नदी का नाम हुआ, जो महाभारत में कुरुक्षेत्र की दक्षिणी सीमा बताई गई है। आजकल यह नदी लुप्त है। नव ने अपने नाम से एक जनपद नवराष्ट्र के नाम से स्थापित किया और नव की वंशपरम्परा का नाम ‘नव’ प्रचलित हुआ। यह जाट गोत्र है जो राजा नव के नाम से चला।

नवराष्ट्र, जिसका राजा नव था, वह गुड़गांवमथुरा के समीप रहा होगा और उसकी राजधानी यही रही होगी जो अब नोह (नूह) कहलाती है। (मथुरा मेमायर्स पृ० 320-322)। इस ‘नोह’ को ‘नूह’ भी कहते हैं। महाभारतकाल के पश्चात् पश्चिमोत्तर भारत के खोतानप्रदेश पर भी नव लोगों ने शासन स्थिर किया था। वहां पर भी अभी तक नूह झील है जिसे नव लोगों ने ही खुदवाया था। सन् ईस्वी के प्रारम्भिक काल में ये लोग अपनी पितृ-भूमि वापिस आ गये और जलेसर के पास बस्तियां आबाद कीं। वहां से उठकर वर्तमान ‘नोह’ में एक झील खोदी और वहां पर दुर्ग निर्माण किया। स्वतंत्रता-युद्ध सन् 1857 तक किसी न किसी रूप में ये वहां के शासक रहे हैं। मि० ग्राउस साहब के लेखानुसार 17वीं शताब्दी में भी आगरा-मथुरा के अधिक भाग पर नव क्षत्रियों का ही शासन था। बीच में ये नव, नौवार-नौहवार नाम से भी प्रसिद्ध हुए। बुलन्दशहर में भट्टापारसोल एक गांव, गुड़गांव जिले में दो गांव, आगरा में 98 गांव और गुड़गांव जिले की नूह तहसील के समीप 98 गांव हैं जो इस वंश की विशाल जनसंख्या का परिचय देते हैं। शिवि लोगों का प्रजातंत्र काफी प्रसिद्ध था।

Distribution in Haryana

Prominent Nauhwar(Chauhan) villages in Palwal District of Haryana are Jatoli, Mahauli, Aurangabad (Mitrol) and Chhaju Nagar.

Distribution in Uttar Pradesh

Nohwar Khap has 8 villages in Agra district and 124 villages in Mathura and two village Dhindar & Sherpura Ghaziabad in Ghaziabad district. [18]

Main villages of the khap are: Mathura district - Nauhjheel (नौहझील), Bajna Mathura (बाजना), Edalgarhi (एदल गढ़ी), Kateliya (कटेलिया). Bulandshahr district village - Bhatta Parsaul (भट्टा पार्सौल) is in this khap. This khap includes Jats, Mule Jats, and Rajputs. [19]


Atri and Nohwar gotras are also onsidered brotherly gotras and do not marry within each other. There are 80 villages of Atri Jats in Aligarh. Adjoining them in Mathura district are Nohwars, who have 100 villages.

Villages in Firozabad district

Chhichhamai, Nagaria Kotli,

Villages in Agra district

Jautana, Sunari Agra (सुनारी), Panwari (पनवारी), Sirauli (सिरौली), Nagla Basua (नगला बसुआ), Nagla Aam (नगला आम),

Villages in Mathura district

Adalgarhi, Bajna Mat, Daulatpur Banger, Lalpur, Kateliya, Moiuddinpur, Nauhjheel Banger, Neem Gaon, Vijaigadhi,

Villages in Hathras district

Bhakroi (District Hathras)

Distribution in Rajasthan

Locations in Jaipur city

Barkat Nagar, Gopalpura Bypass,

Villages in Alwar district

Reta Kathumar,

Distribution in Madhya Pradesh

Villages in Bhopal district

Bhopal,

Villages in Ratlam district

Villages in Ratlam district with population of Novar (नोवार) gotra are: Ratlam 1,

Villages in Khargone district

Khargone,

Villages in Guna district

Guna,

Villages in Gwalior district

Birlanagar (Gwalior), Gwalior,

Distribution in Gujarat

Nauhwar gotra Jats are found in Gujarat where they write as Nauwar.

Notable persons

External links

References

  1. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-55
  2. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.46,s.n. 1356
  3. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.47,s.n. 1435
  4. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-55
  5. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.46,s.n. 1356
  6. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-15
  7. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.46,s.n. 1358
  8. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-55
  9. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.46,s.n. 1356
  10. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-55
  11. B S Dahiya:Jats the Ancient Rulers (A clan study), p.241, s.n.157
  12. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. न-42
  13. Dilip Singh Ahlawat: Jat viron ka Itihas
  14. Mahendra Singh Arya et al: Adhunik Jat Itihas, p. 259
  15. Jat Bandhu, Agra, April 1991
  16. Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p. 18
  17. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ-194
  18. Jat Bandhu, Agra, April 1991
  19. Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p. 18

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