Godavari River

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Godavari River

Godavari (Hindi:गोदावरी, Marathi: गोदावरी, Telugu: గోదావరి) is the second longest river in India after the river Ganges. It starts in Maharashtra and flows east for 1,465 kms emptying into Bay of Bengal.

Variants

Jat clans

Godavari River basin

Godavari River drains the Indian states Maharashtra (48.6%), Telangana and Andhra Pradesh (combined 23.4%), Chhatisgarh (10.9%), Madhya Pradesh (10.0%), Odisha (5.7%) and Karnataka (1.4%)[1] through its extensive network of tributaries. Measuring upto a staggering 3,12,812 km2 , it forms one of the largest river basins in India, only the Ganges and Indus(within Indian borders) rivers have a drainage basin larger than it.[2] In terms of length, catchment area and discharge, the Godavari river is the largest in peninsular India and had been dubbed as the 'Dakshina Ganga' - the South Ganges river [3]

Course

The Godavari originates 80 kms from the Arabian Sea in the Western Ghats of central India near Nasik in Maharashtra. It flows for 1,465 kms (910 mi), first eastwards across the Deccan Plateau then turns southeast, entering the West Godavari district and East Godavari district of Andhra Pradesh, until it splits into two watercourses that widen into a large river delta and flow into the Bay of Bengal.

Tributaries

The major tributaries of the river can be classified as the

Pranhita is the largest tributary covering about 34% of its drainage basin. Though the river proper flows only for 113 km, by virtue of its extensive tributaries Wardha, Wainganga, Penganga, the sub-basin drains all of Vidharba region as well as the southern slopes of the Satpura Ranges.

Indravati is the 2nd largest tributary,known as the "lifeline" of the Kalahandi, Nabarangapur of Odisha & Bastar district of Chhattisgarh.

Due to their enormous sub-basins both Indravati and Pranhita are considered rivers in their own right.

Manjira is the longest tributary and holds the Nizam Sagar reservoir.

Purna is a prime river in the water scarce Marathwada region of Maharashtra.

गोदावरी नदी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...गोदावरी नदी (AS, p.299) भारत की प्रसिद्ध नदी है। यह नदी दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट से लेकर पूर्वी घाट तक प्रवाहित होती है। नदी की लंबाई लगभग 900 मील (लगभग 1440 कि.मी.) है। यह नदी नासिक त्रयंबक गाँव की पृष्ठवर्ती पहाड़ियों से निकलती है। मुख्य रूप से नदी का बहाव दक्षिण-पूर्व की ओर है। गोदावरी की सात शाखाएँ मानी गई हैं- 1. गौतमी, 2. वसिष्ठा, 3. कौशिकी, 4. आत्रेयी, 5. वृद्ध गौतमी, 6. तुल्या, 7. भारद्वाजी

महाभारत, वनपर्व 85, 43 में सप्त गोदावरी का उल्लेख है- 'सप्तगोदावरी स्नात्वा नियतो नियतो नियताशान:।' ब्रह्मपुराण के 133वें अध्याय में तथा अन्यत्र भी गोदावरी (गौतमी) का उल्लेख है।

श्रीमद्भागवत 5, 19, 18 में गोदावरी की अन्य नदियों के साथ उल्लेख है- 'कृष्णवेण्या भीमरथी गोदावरी निर्विन्ध्या’।' विष्णुपुराण 2, 3, 12 में गोदावरी से सह्य पर्वत से निस्सृत माना है- 'गोदावरी भीमरथी कृष्णवेण्यादिकास्तथा। सह्मपादोद्भवा नद्य: स्मृता: पापभयापहा:।'

महाभारत, भीष्मपर्व 9, 14 में गोदावरी का भारत की कई नदियों के साथ उल्लेख है- 'गोदावरी नर्मदा च बाहुदां च महानदीम्।' गोदावरी नदी को पांडवों ने तीर्थयात्रा के प्रसंग में देखा था- 'द्विजाति मुख्येषुधनं विसृज्य गोदावरी सागरगामगच्छत्।' वनपर्व 118, 3

महाकवि कालिदास के 'रघुवंश' 13, 33, 13, 35 में गोदावरी का सुंदर शब्द चित्र खींचा है- 'अमूर्विमानान्तरलबिनोनां श्रुत्वा स्वनं कांचनर्किकणीम्, प्रत्युद्ब्रजन्तीव खमुत्पतन्य: गोदावरीसारस पंक्तयस्त्वाम्’;’ ‘अत्रानुगोदं मृगया निवृतस्तरंग वातेन विनीत खेद: रहस्त्वदुत्संग निपुण्णमुर्घा स्मरामि वानीरगृंहेषु सुप्त:।' कालिदास ने इस उल्लेख में गोदावरी को 'गोदा' कहा है। ‘शब्द-भेद प्रकाश’ नामक कोश में भी गोदावरी का रूपांतर ‘गोदा’ दिया हुआ है।

भवभूति ने उत्तर राम चरित में अनेक बार गोदावरी का उल्लेख किया है-- 'गोदावर्या: पयसि विततानोकहश्यामलश्री : 2,25. 'एतानि तानि बहुकंदरनिर्झराणि गोदावरीपरिसरस्यगिरेस्तटानि' 3,8.

गोदावरी परिचय

यह नदी दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट से लेकर पूर्वी घाट तक प्रवाहित होती है। नदी की लंबाई लगभग 900 मील (लगभग 1440 कि.मी.) है। यह नदी नासिक त्रयंबक गाँव की पृष्ठवर्ती पहाड़ियों से निकलती है। मुख्य रूप से नदी का बहाव दक्षिण-पूर्व की ओर है।

बंगाल की खाड़ी में दौलेश्वरम् के पास डेल्टा बनाती हुई यह नदी सात धाराओं के रूप में समुद्र में गिरती है। भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ- गोदावरी और कृष्णा, ये दोनों मिलकर 'कृष्णा-गोदावरी डेल्टा' का निर्माण करती हैं, जो सुन्दरबन के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा डेल्टा है। इस डेल्टा को बहुधा 'केजी डेल्टा' भी कहा जाता है।

वैदिक साहित्य में अभी तक गोदावरी की कहीं भी चर्चा नहीं प्राप्त हो सकी है। बौद्ध ग्रन्थों में बावरी के विषय में कई दन्तकथाएँ मिलती हैं। ब्रह्मपुराण में गौतमी नदी पर 106 दीर्घ पूर्ण अध्याय है। इनमें इसकी महिमा वर्णित है। वह पहले महाकोसल का पुरोहित था और पश्चात् पसनेदि का, वह गोदावरी पर अलक के पार्श्व में अस्यक की भूमि में निवास करता था और ऐसा कहा जाता है कि उसने श्रावस्ती में बुद्ध के पास कतिपय शिष्य भेजे थे। ( सुत्तनिपात, सैक्रेड बुक आव दि ईस्ट, जिल्द 10, भाग 2, 184 एवं 187)

पाणिनि 5.4.75 के 'संख्याया नदी-गोदावरीभ्यां च' वार्तिक में 'गोदावरी' नाम आया है और इससे 'सप्तगोदावर' भी परिलक्षित होता है। रामायण, महाभारत एवं पुराणों में इसकी चर्चा हुई हैं। वन पर्व महाभारत, 88.2 ने इसे दक्षिण में पायी जाने वाली एक पुनीत नदी की संज्ञा दी है और कहा है कि यह निर्झरपूर्ण एवं वाटिकाओं से आच्छादित तटवाली थी और यहाँ मुनिगण तपस्या किया करते थे। रामायण के अरण्य काण्ड वा. रा.(रामायण (अरण्य काण्ड), 13.13 एवं 21) ने गोदावरी के पास के पंचवटी नामक स्थल का वर्णन किया है, जहाँ मृगों के झुण्ड रहा करते थे और जो अगस्त्य के आश्रम से दो योजन की दूरी पर था। ब्रह्म पुराण अध्याय 70-175 में गोदावरी एवं इसके उपतीर्थों का सविस्तार वर्णन हुआ है। तीर्थंसार (नृसिंह पुराण का एक भाग) ने ब्रह्मपुराण के कतिपय अध्यायों (रह्म पुराण, यथा- 89, 91, 106, 107, 116-118, 121, 122, 131, 144, 154, 159, 172) से लगभग 60 श्लोक उद्धृत किये हैं, जिससे यह प्रकट होता है कि आज के ब्रह्मपुराण के गौतमी वाले अध्याय 1500 ई. के पूर्व उपस्थित थे। वामन काणे के लेख के अनुसार[5] ब्रह्म पुराण ने गोदावारी को सामान्य रूप में गौतमी कहा है।[6] ब्रह्मपुराण 78.77 में आया है कि विन्ध्य के दक्षिण में गंगा को गौतमी और उत्तर में भागीरथी कहा जाता है। गोदावरी की 200 योजन की लम्बाई कही गयी है और कहा गया है कि इस पर साढ़े तीन करोड़ तीर्थ पाये जाते हैं।(ब्रह्म पुराण 77.8-9) दण्डकारण्य को धर्म एवं मुक्ति का बीज एवं उसकी भूमि को (उसके द्वारा आश्लिष्ट स्थल को) पुण्यतम कहा गया है।[7]

नामकरण: कुछ विद्वानों के अनुसार, इसका नामकरण तेलुगु भाषा के शब्द 'गोद' से हुआ है, जिसका अर्थ मर्यादा होता है। एक बार महर्षि गौतम ने घोर तप किया। इससे रुद्र प्रसन्न हो गए और उन्होंने एक बाल के प्रभाव से गंगा को प्रवाहित किया। गंगाजल के स्पर्श से एक मृत गाय पुनर्जीवित हो उठी। इसी कारण इसका नाम गोदावरी पड़ा। गौतम से संबंध जुड जाने के कारण इसे गौतमी भी कहा जाने लगा। इसमें नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। गोदावरी की सात धारा वसिष्ठा, कौशिकी, वृद्ध गौतमी, भारद्वाजी, आत्रेयी और तुल्या अतीव प्रसिद्ध है। पुराणों में इनका वर्णन मिलता है। इन्हें महापुण्यप्राप्ति कारक बताया गया है- सप्तगोदावरी स्नात्वा नियतो नियताशन: । महापुण्यमप्राप्नोति देवलोके च गच्छति ॥

बहुत-से पुराणों में एक श्लोक आया है- 'मध्य के देश सह्य पर्वत के अनन्तर में हैं, वहीं पर गोदावरी है और वह भूमि तीनों लोकों में सबसे सुन्दर है। वहाँ गोवर्धन है, जो मन्दर एवं गन्धमादन के समान है।'[8] ब्रह्म पुराण 27.43-44 में वर्णन आया है कि किस प्रकार गौतम ने शिव की जटा से गंगा को ब्रह्मगिरि पर उतारा, जहाँ उनका आश्रम था और किस प्रकार इस कार्य में गणेश ने सहायता दी। नारद पुराण (उत्तरार्ध, 72) में आया है कि जब गौतम तप कर रहे थे तो बारह वर्षों तक पानी नहीं बरसा और दुर्भिक्ष पड़ गया, इस पर सभी मुनिगण उनके पास गये और उन्होंने गंगा को अपने आश्रम में उतारा। वे प्रात:काल शालि के अन्न बोते थे और मध्याह्न में काट लेते थे और यह कार्य वे तब तक करते चले गये जब तक पर्याप्त रूप में अन्न एकत्र नहीं हो गया। शिवजी प्रकट हुए और ऋषि ने प्रार्थना की कि वे (शिवजी) उनके आश्रम के पास रहें और इसी से वह पर्वत जहाँ गौतम का आश्रम अवस्थित था, त्र्यम्बक नाम से विख्यात हुआ।[9]

मुख्य नादियाँ: गोदावरी नदी के तट पर ही त्र्यंबकेश्वर, नासिक, पैठण जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं। इसे 'दक्षिणीगंगा' भी कहते हैं। इसका काफ़ी भाग दक्षिण भारत में हैं। इसकी कुल लंबाई 1465 किमी है, जिसका 48.6 भाग महाराष्ट्र, 20.7 भाग मध्य प्रदेश, 14 कर्नाटक, 5.5 उड़ीसा, और 23.8 आंध्र प्रदेश में पड़ता है। इसमें मुख्य नादियाँ जो आकर मिलती हैं, वे हैं– 1. पूर्णा, 2. क़दम, 3. प्रांहिता, 4. सबरी, 5. इंद्रावती, 6. मुजीरा, 7. सिंधुकाना, 8. मनेर, 9. प्रवर

संदर्भ: भरतकोश-गोदावरी नदी

गौतमी नदी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[10] ने लेख किया है ...गौतमी नदी (AS, p.309) दक्षिणी भारत की प्रसिद्ध गोदावरी नदी का एक प्राचीन पौराणिक नाम है। (दे.शिवपुराण 1,54) ब्रह्म पुराण के 133वें अध्याय में तथा अन्यत्र भी इस नदी का उल्लेख है। कहा जाता है कि इस नदी को गौतम ने तप द्वारा पृथ्वी पर अवतरित किया था। पुराणों में गौतमी को गोदावरी की एक शाखा भी माना गया है। देखें:- (गोदावरी नदी) अध्यात्मरामायण के अरण्य 48 में पंचवटी को गौतमी के तट पर अवस्थित बताया गया है जो वास्तव में गोदावरी ही हैं--'अस्ति पंचवटी नाम्ना आश्रमो गौतमीतटे'।

Settlements along the Godavari

In Maharashtra:

  • Nashik (Holy city and site of kumbh mela bathing festivals)
  • Trimbakeshwar (shrine to the Jyotirlinga of the god Shiva)
  • Kopargaon
  • Puntamba - A place of pilgrimage with a number of ancient temples including the last resting place (Samadhi) of Sant Changdev in Puntamba.
  • Paithan (Ancient capital of the Satavahana dynasty)
  • Gangakhed
  • Nanded (Location of the Hazur Sahib Nanded Sikh gurdwara)
  • Sironcha (Town situated near the confluence of Godavari and Pranahita rivers)

In Telangana:

In Andhra Pradesh:

In Indian epics

Skanda Purana:

In Ramayana:

Ramayana in Kishkindha Kanda Sarga 41 describes The Empire of Holy Vanaras to the South: Sugreeva sends Vanaras in search of Sita to southward which troop includes Hanuman, Jambavanta, Nila and others and Angada is its leader. Sugreeva gives a vivid picture of the southern side of Jambudvipa. Mahanadi is mentioned in Ramayana (IV.41.9).

8,9,10. "Search the thousand crested Vindhya mountains abounding with numerous tress and climbers, then the delightful Narmada river coursing a little southerly to that range, which is adored by great snakes, along with wonderful River Godavari, as well as River Krishnaveni and Maha Nadi, and then the greatly auspicious Varada River which is an adoration to great snakes. And the territories of Mekhala, Utkala, the cities of Dasharna, kingdoms of Abravanti, Avanti, and Vidarbha, also thus the charming kingdom of Mahishaka, are to be searched thoroughly. [4-41-10]"

सहस्र शिरसम् विंध्यम् नाना द्रुम लता आयुतम् ।
नर्मदाम् च नदीम् रम्याम् महोरग निषेविताम् ॥४-४१-८॥
ततो गोदावरीम् रम्याम् कृष्णावेणीम् महानदीम्
वरदाम् च महाभागाम् महोरग निषेविताम् ।
मेखलान् उत्कलाम् चैव दशार्ण नगराणि अपि ॥४-४१-९॥
अब्रवंतीम् अवंतीम् च सर्वम् एव अनुपश्यत ।
विदर्भान् ऋष्टिकान् चैव रम्यान् माहिषकान् अपि ॥४-४१-१०॥

Aranya Kanda/Aranya Kanda Sarga 15 describes The Panchavati. Rama entrusts the construction work of a parnashala, straw-cottage in Panchavati, nearby river Godavari. Lakshmana with all his expertise constructs a cosy cottage and they enter it after the ritual of house-entering ceremony. Rama admires Lakshmana for his construction work and as a thanksgiving he embraces Lakshmana and expresses his heart felt feeling about Lakshmana's concern towards Rama.

ततः पंचवटीम् गत्वा नाना व्याल मृगायुताम् । उवाच भ्रातरम् रामो लक्ष्मणम् दीप्त तेजसम् ॥३-१५-१॥

This River Godavari is also seen from here, surrounded by blooming trees, as that contemplated soul sage Agastya had said. [3-15-12]

यथा आख्यातम् अगस्त्येन मुनिना भावितात्मना । इयम् गोदावरी रम्या पुष्पितैः तरुभिर् वृता ॥३-१५-१२॥

On his going to River Godavari that noble [[Lakshmana] bathed and on gathering lotuses and fruits he returned to the cottage. [3-15-24]

स गत्वा लक्ष्मणः श्रीमान् नदीम् गोदावरीम् तदा । स्नात्वा पद्मानि च आदाय सफलः पुनर् आगतः ॥३-१५-२४॥

In Mahabharata

Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 9 mentions rivers in verses-18-20

There are also the four oceans, the river Bhagirathi, the Kalindi, the Vidisa, the Venwa, the Narmada of rapid current; the Vipasa, the Satadru, the Chandrabhaga, the Saraswati; the Iravati, the Vitasta, the Sindhu, the Devanadi; the Godavari, the Krishnavenwa and that queen of rivers the Kaveri;

तदा समुथ्राश चत्वारॊ नथी भागीरथी च या
कालिन्दी विदिशा वेण्णा नर्मदा :वेगवाहिनी Mahabharata (II.9.18)
विपाशाशतद्रुशचन्थ्र भागा सरस्वती
इरावती वितस्तासिन्धुर थेव नथस तदा Mahabharata (II.9.19)
गॊदावरी कृष्ण वेण्णा कावेरी च सरिथ वरा
एताश चान्याश च सरितस तीर्दानि च सरांसि च Mahabharata (II.9.20)

Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 Describes geography and provinces of Bharatavarsha. Rivers are mentioned in Mahabharata (VI.10.13,14).

नदीः पिबन्ति बहुला गङ्गां सिन्धुं सरस्वतीम
गॊदावरीं नर्मदांबाहुदांमहानदीम Mahabharata (VI.10.13)
शतद्रुं चन्द्रभागांयमुनांमहानदीम
दृषद्वतीं विपाशांविपापां सदूलवालुकाम Mahabharata (VI.10.14)

Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 83 mentions names of Pilgrims: Going next to the Godavari (गॊदावरी) (III.83.30), ever frequented by the Siddhas, one earneth the merit of the cow-sacrifice.

ततॊ गॊदावरीं पराप्य नित्यं सिद्धनिषेविताम
गवाम अयम अवाप्नॊति वासुकेर लॊकम आप्नुयात (III.83.30)

Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 86 mentions the sacred tirthas of the south: In that quarter lieth the sacred and auspicious river Godavari (गॊदावरी) (III.86.2), full of water abounding in groves and frequented by ascetics.

यस्याम आख्यायते पुण्या दिशि गॊदावरी नदी
बह्व आरामा बहु जला तापसाचरिता शुभा (III.86.2)

References

  1. "Integrated Hydrological DataBook(Non-Classified River Basins)" (PDF). Central Water Commission. p. 9.
  2. [1]
  3. "Dakshina Ganga (Ganga of South India) – River Godavari"
  4. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.299
  5. जर्नल आव दी बाम्बे ब्रांच आव दी एशियाटिक सोसाइटी, सन् 1917, पृ0 27-28
  6. विन्ध्यस्य दक्षिणे गंगा गौतमी सा निगद्यते। उत्तरे सापि विन्ध्यस्य भागीरथ्यभिधीयते॥ ब्रह्म पुराण (78।77) एवं तीर्थसार (पृ. 45)।
  7. तिस्र: कोट्योऽर्धकोटी च योजनानां शतद्वयें। तीर्थानि मुनिशार्दूल सम्भविष्यन्ति गौतम॥ ब्रह्म पुराण (77।8-9)। धर्मबीजं मुक्तिबीजं दण्डकारण्यमुच्यते। विशेषाद् गौतमीश्लिष्टो देश: पुण्यतमोऽभवत्॥ ब्रह्म पुराण (161।73)।
  8. गोवर्धनो नाम मन्दरो गन्धमादन:॥ मत्स्य पुराण (114.37-38=वायु पुराण 45.112-113=मार्कण्डेय पुराण 54.34-35=ब्रह्माण्ड पुराण 2।16।43)। और देखिए ब्रह्म पुराण (27.43-44)।
  9. नारद पुराण, श्लोक 24
  10. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.309

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