Indravati River

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(Redirected from Indravati)
Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.)

Map of Rivers in India
Kotri River meets Indrawati at Bhamragadh and Indrawati later meets Godawari at Bhadrakali village in Bijapur, Chhattisgarh.

Indravati River (इंद्रावती नदी) is a tributary of the Godavari River, in central India.

Variants

Origin

== Course ==The Indravati River rising in the Kalahandi state enters Bastar on the plateau near Jagdalpur and flows across the centre of the state from east to west, dividing it to two portions. On reaching the border it turns to the south, and forms boundary of Bastar until it joins Godavari River below Sironcha.

At Chitrakot, where the Indravati River leaves Jagdalpur plateau, is a fine waterfall 94 feet high, while the course of the river through the western hills exhibits some extremely picturesque scenery. The rivers next in importance are Sabari River which divides Bastar from Jeypore on the east, and the Tel River, which rises in the state and flows south-west to Godavari.[1]

Indravati River originates from the Eastern Ghats of Dandakaranya range in Kalahandi district of Orissa in Dharmgarh tahsil at Thuamul Rampur and flows through Nabarangapur District near southern border in a westerly direction; enters into Jagdalpur in Chhattisgarh state. This is the largest river for Nabarangapur. It further traverses in the westerly direction and thereafter in southern direction before finally meeting Godavari River at the border of Maharashtra, Chhattisgarh and Telangana. The river during its course forms the boundary between the states of Maharashtra and Chhattisgarh at various places.

The Indravati is sometimes known as the "lifeline" of the Kalahandi, Nabarangapur, of Odisha & Bastar district of Chhattisgarh, one of the greenest districts in India.

Most of the river course is through dense forests of Nabarangapur & Bastar. The river flows for 535 kms and has a drainage area of 41,665 square kms.


The river Indravati rises at an elevation of 914 metres in the Kalahandi district of Odisha on the western slopes of the Eastern Ghats. It flows west-ward through the Kalahandi, Nabarangapur and Koraput districts for 164 kms and after forming the boundary between Odisha and Chhattisgarh states for 9.5 kms, enters the Bastar district of Chhattisgarh. After flowing 233 kms in Chhattisgarh, it turns south and flows along the boundary of Chhattisgarh and Maharashtra for about 129 kms and joins Godavari River at the junction of the boundaries of Maharashtra, Chhattisgarh and Telangana states.

Indravati sub-basin

The Indravati sub-basin covers a total area of about 40,625 square kms. Indravati has a catchment area of 7,435 square kms in Odisha. The length of river is about 535.80 kms , and starting from the hills of Kalahandi, it joins the Godavari river near village Bhadrakali in Bijapur district of Chhattisgarh. It has a well-defined course from its origin to its confluence with the Godavari River. Starting in a south-east direction as a small rivulet in Odisha, it later runs in western direction through Bastar district of Chhattisgarh until it is deflected and runs north-west and then again takes a turn to the south-west. During its total course of 535.80 kms the river drops by 832.10 metres. Its bed level at its junction with the Godavari River is of the order of R.L. 82.3 m compared to the level in Kalahandi from where it takes off is 914.4m.

Indravati and Sabari are interconnected naturally in Odisha area. Indravati waters overflow into the Sabari through Jaura nallah during floods.

Tributaries

The major tributaries of river Indravati are: Keshadhara Nalla, Kandabindha Nallah, Chandragiri Nalla, Golagar Nalla, Poragarh Nalla, Kapur Nallah, Muran River, Bangiri Nallah, Telengi Nallah, Parlijori Nallah, Turi Nallah, Chourijori Nallah, Damayanti Sayarh, Kora River, Modang River, Padrikundijori River, Jaura River and Bhaskel River.

The important right bank tributaries of the Indravati are Bhaskal, Narangi, Boarding, Nibra, Kotri and Bandia. The important left bank tributary is Nandiraj.

Places of Historical Importance on Indrawati

  • Jagdalpur (जगदलपुर) - On left bank of Indravati River, Jagdalpur is a city and tahsil in Bastar district in Chhattisgarh. It was the capital of the erstwhile Bastar State. Jagdalpur is well known for its greenery, lush green mountains, deep valleys, dense forests, streams, waterfalls, caves, natural parks, monuments, natural resources, herbs, exuberant festivity and peaceful solitude. Other tourist attractions relate to Bastar's royal past and its tribes.

  • Bandiguda - Bandiguda is a small Village/hamlet in Borigumma Tehsil in Koraput District of Odisha State, India. It is located 40 km towards west from District head quarters Koraput, 16 km from Borigumma.

इंद्रावती

विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है ... इंद्रावती (जिला बस्तर, छत्तीसगढ़) (AS, p.77): इन्द्रावती नदी कालाहांडी ज़िले (उड़ीसा) के धरमगढ़ तहसील में स्थित 4 हज़ार फीट ऊँची मुंगेर पहाड़ी से निकलती है। यह नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई जगदलपुर ज़िले से 40 किलोमीटर दूर पर चित्रकूट जलप्रपात बनाती है, जो उड़ीसा के कालहंदी पहाड़ से निकलकर भूपालपटनम के पास गोदावरी में गिरती है। इस नदी द्वारा निर्मित चित्रकूट नाम का 94 फुट ऊँचा जलप्रपात जगदलपुर के पास स्थित है। प्राचीन समय में यहाँ के क्षेत्र को 'चक्रकूट' कहा जाता था।

इन्द्रावती नदी का परिचय

इन्द्रावती नदी छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र की सीमा भी बनाती है। महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ की सीमा बनाती हुई यह नदी दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है और अन्त में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश के सीमा संगम पर भोपालपट्टनम से दक्षिण की ओर कुछ दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रम 202 पर स्थित भद्रकाली के समीप गोदावरी में मिल जाती है। नदी की प्रदेश में कुल लम्बाई 264 किलोमीटर है।

सहायक नदियाँ: इन्द्रावती की प्रमुख सहायक नदियों में कोटरी, निबरा, बोराडिग, नारंगी उत्तर की ओर से तथा नन्दीराज, चिन्तावागु इसके दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी दिशाओं में मिलती हैं। दक्षिण-पश्चिम की ओर डंकनी और शंखनी इन्द्रावती नदी में मिलती हैं। इस नदी पर बोध घाटी परियोजना प्रस्तावित है। नदी के किनारे प्रमुख नगर जगदलपुर और बारसुर हैं। इस नदी का मैदान चावल की उपज के लिए प्रसिद्ध है।

संदर्भ: भारतकोश-इन्द्रावती नदी

इन्द्रावती नदी: बस्तर की जीवनरेखा

Source - डॉ. राजेन्द्र सिंह https://www.sahapedia.org/inadaraavatai-nadai-basatara-kai-jaivanaraekhaa

संपूर्ण विश्व में मानव संस्कृति व सभ्यता का उद्भव व विकास नदियों के किनारे ही हुआ है। इसी कारण मानव समुदाय के जीवन व संस्कृति में नदियों का विशेष स्थान है। भारत के मध्य-पूर्व क्षेत्र में स्थित छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण में स्थित बस्तर संभाग के मध्य में प्रवाहित इंद्रावती, इस क्षेत्र की एक प्रमुख नदी है। अपने प्रवाह से मानव समुदायों, वन तथा जीव-जंतुओं को जल संपदा से परिपूर्ण कर जीवन संचरण में सहायक होने के कारण बस्तर तथा उड़ीसा राज्यों में इसे ‘जीवनदायनी’ या ‘जीवनरेखा’ या ‘लाइफलाइन’ की संज्ञा दी जाती है।

इंद्रावती नदी का उद्गम उड़ीसा राज्य में ईस्टर्न घाट के दंडकारण्य रेंज में कालाहांडी ज़िला अंतर्गत धरमगढ़ तहसील के रामपुर थूयामूल (Thuamul Rampur) के निकट डोंगरला पहाड़ी पर 3000 फीट की ऊँचाई पर हुआ है। इंद्रावती नदी, का प्रवाह पूर्व से पश्चिम की ओर है। इंद्रावती नदी, अपने उद्गम के बाद उड़ीसा से छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश करती है तथा छत्तीसगढ़ राज्य के अंतिम पश्चिमी छोर से यह दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-तेलंगाना राज्य की सीमा पर बीजापुर जिले के भद्रकाली नामक ग्राम के समीप गोदावरी नदी में मिलती है। इंद्रावती नदी, अपनी लंबाई का लगभग एक तिहाई भाग उड़ीसा राज्य में तथा लगभग दो तिहाई भाग बस्तर में प्रवाहित होती है। अपने उद्गम से गोदावरी संगम तक इंद्रावती नदी 535 किमी लंबा सफ़र तय करती है, जिसमें से उड़ीसा राज्य के कालाहांडी, नवरंगपुर तथा कोरापुट ज़िले में 164 किमी, छत्तीसगढ़ व उड़ीसा राज्य सीमा पर 9.5 किमी तथा छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर, दाँतेवाड़ा, बीजापुर जिले में 233 किमी एवं छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र राज्य सीमा पर 129 किमी प्रवाहित होकर गोदावरी नदी में मिलती है।

प्रमुख सहयोगी नदियाँ व नाले: इंद्रावती नदी की 30 से अधिक सहायिका नदियाँ व नाले हैं। इंद्रावती नदी की उत्तरी सहयोगी नदियों में भवरडीग, नारंगी, निबरा, कोटरी, गुडरा, गोइंदर, भसकेली प्रमुख हैं तथा दक्षिणी सहयोगी नदियों में चिंतावागु, शंखिनी, डंकिनी, नंदीराज, चिंतावागु आदि नदियाँ प्रमुख हैं।

उद्गम संबंधी पौराणिक मिथक: इंद्रावती नदी का उल्लेख अनेक प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में पाया जाता है। इसे रामायण में वर्णित तीन मंदाकिनी नदियों में से एक कहा गया है। बस्तर के अभिलेखों (धारण महादेवी का कुरूसपाल अभिलेख, Epigraphia Indica, Vol. X, No. 31) में इसे इंद्र नदी कहा गया है। एक हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार इंद्रावती नदी का उद्गम स्वर्ग के राजा इंद्र, उनकी पत्नी इंद्राणी के पृथ्वी पर भ्रमण तथा प्रेयसी उदंती से संबंधित बताया गया है।

प्रागैतिहासिक विवरण: इंद्रावती नदी के किनारे प्रागैतिहासिक काल के अवशेष भी प्राप्त होते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि इंद्रावती नदी क्षेत्र प्राचीन मानव का आश्रयस्थल रहा है। बस्तर संभाग के अनेक स्थलों पर इंद्रावती नदी के किनारे प्रागैतिहासिक कालीन पाषाण उपकरण प्राप्त होते हैं। इनमें जगदलपुर के समीप स्थित कालीपुर, मेटावाड़ा, घाटलोहंगा, देउरगांव, करंजी, चित्रकोट आदि क्षेत्र से पूर्व पाषाणकाल, पाषाणकाल तथा उत्तर पाषाणकालीन उपकरण प्राप्त होते हैं।

ऐतिहासिक विवरण, प्रमुख शहर व गाँव तथा उनकी ऐतिहासिकता: बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी अपने आँचल में इतिहास को समेटे हुये हैं। बस्तर में नल, गंग, नाग तथा काकतीय नामक राजवंशों ने शासन किया है। जिनके राज्य का विस्तार इंद्रावती नदी के दोनों ओर रहा है। इन राजवंशों में गंग राजवंश की राजधानी इंद्रावती नदी के किनारे पर स्थापित बारसूर नगर मंदिरों तथा तालाबों के लिये प्रसिद्ध है।

नाग वंश के शासनकाल में उनके राज्य को चक्रकोट्य मंडल तथा मधुर मंडल के नाम से जाना जाता था, यह राज्य इंद्रावती नदी के किनारे ही स्थापित था। चक्रकोट्य मंडल की राजधानी कुरूसपाल तथा मधुर मंडल की राजधानी राजपुर चित्रकोट जलप्रपात के समीप स्थित है। चित्रकोट जलप्रपात के समीप स्थित नारायणपाल नामक ग्राम 11वीं सदी में बने विष्णु मंदिर के लिये प्रसिद्ध है।

बस्तर के सबसे प्रमुख चालुक्य (काकतीय) राजवंश ने लगभग 600 वर्ष शासन किया। इस रियासत का विस्तार उड़ीसा से बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी के अधिकांश प्रवाह क्षेत्र में रहा है। इनके द्वारा स्थापित राजधानी बारसूर, मधोता, कुरूसपाल, राजपुर तथा जगदलपुर इंद्रावती नदी के किनारे स्थित है। जगदलपुर शहर इंद्रावती नदी के किनारे स्थित सबसे प्रमुख शहर है।

नदी किनारे निवासरत प्रमुख मानव समुदाय: इंद्रावती नदी के बस्तर प्रवाह क्षेत्र में मैदानी, पठारी तथा पहाड़ी क्षेत्र आते हैं। जिसमें अनेक मानव समुदाय निवास करते हैं। इंद्रावती नदी के बस्तर प्रवेश क्षेत्र में भतरा, हल्बा, सवरा, माहरा, पनका, कुम्हार समुदाय, मध्यवर्ती क्षेत्र में राजा मुरिया, भतरा, माड़िया, दंडामी माड़िया, हल्बा, मुंडा, कुडुख, केंवट, धाकड़, सुंडी, महारा आदि तथा मध्यवर्ती क्षेत्र से संगम तक माड़िया, दंडामी माड़िया, हल्बा, गोंड, दोरला, परधान, राजगोंड, सुंडी, कोष्ठा, केंवट, राउत, महार, तेलंगा आदि जनसमुदाय निवास करता है।

नदी पर आजीविका के लिये आश्रित समुदाय: बस्तर में इंद्रावती नदी के मैदानी क्षेत्र में बसे में बसे भतरा, हल्बा, मुरिया आदि मानव समुदाय की आजीविका कृषि आधारित है। इस क्षेत्र में पर्याप्त मानसूनी वर्षा तथा इंद्रावती नदी के कारण भूमिगत जल का ऊँचा स्तर बहुफ़सली कृषि हेतु आदर्श स्थिति प्रदान करता है। इंद्रावती नदी के किनारे निवासरत कुडुख व केंवट समुदाय की आजीविका नदी पर आश्रित है। इन परिवारों के सदस्य का मुख्य कार्य नाव चलाना तथा मछली मारना है। वे छोटी-छोटी डोंगियों पर ग्रामीणों को नदी पार कराते हैं व पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार अनेक समुदाय के स्त्री-पुरूष सदस्य मछली मारने का कार्य करते हैं।

इंद्रावती के जलीय जीव-जंतु: इंद्रावती नदी के प्रवाह क्षेत्र में अनेक जलीय जीव जंतुओं का वास है। जिसमें विविध प्रकार की मछलियाँ, केकड़े, कछुआ, जलीय सर्प, मगर आदि हैं। छत्तीसगढ़ के प्रवाह क्षेत्र में चित्रकोट जलप्रपात के पश्चात् बिंता से मिचनार तक मगर का प्राकृतिक रहवास है। इस क्षेत्र में इंद्रावती नदी में बोध मछली पायी जाती है। ‘बस्तर की शार्क’ के नाम से प्रसिद्ध यह मछली 150 किलो तक वज़नी होती है।

वनस्पति तथा थलचर: इंद्रावती नदी सिंचित भू-क्षेत्र में विपुल वन संपदा पाया जाता है। इंद्रावती नदी मैदानी भाग में चित्रकोट जलप्रपात तक साल वृक्षों के वन पाये जाते हैं। चित्रकोट जलप्रपात के पश्चात् संगम स्थल तक मिश्रित प्रजाति के सघन वन पाये जाते हैं। जिसमें साल, सागौन, हर्रा, बीजा, बेहड़ा, अर्जुन, शीशम, तेंदू, आम, महुआ आदि के वृक्ष हैं। इन वनों में शेर, बाघ, भालू, हिरण, नीलगाय, मोर, वनभैंसा, खरगोश आदि अनेक वन्य प्राणी तथा विविध प्रजाति के पक्षी पाये जाते हैं।

बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी के किनारे 2799 वर्ग किमी में फैले इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन् 1975 में की गयी तथा सन् 1983 से इसे प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया है।

जलप्रपात: इंद्रावती नदी, बस्तर जिला मुख्यालय से पश्चिम दिशा में 40 किमी दूरी पर चित्रकोट नामक स्थल पर एक विशाल जलप्रपात का निर्माण करती है। यहाँ इंद्रावती नदी 96 फीट ऊँचे, विशाल जलप्रपात के रूप में गिरती है। चित्रकोट जलप्रपात का आकार घोड़े की नाल के समान है। इसका स्वरूप कनाडा के विशाल नियाग्रा जलप्रपात के सदृश होने के कारण इसे ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है। यह छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे बड़ा, सबसे चौड़ा तथा सर्वाधिक जल प्रवाहित करने वाला जलप्रपात है। चित्रकोट जलप्रपात वर्षाकाल में मटमैला तथा विशाल जलराशि युक्त, शीत व ग्रीष्मकाल में स्वच्छ जलयुक्त शांत व शीतल होता है। सूर्य के प्रकाश तथा प्रपात में गिरने से उत्पन्न जलबिंदूओं के परावर्तन से बनने वाला इंद्रधनुष चित्रकोट जलप्रपात के प्रेक्षकों का मनमोह लेता है।

संगम: इंद्रावती नदी अपने उद्गम से उड़ीसा राज्य तथा छत्तीसगढ़ की प्रवाह यात्रा पूर्ण कर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-तेलंगाना राज्य की सीमा पर बीजापुर जिला के भोपालपट्नम तहसील के भद्रकाली नामक ग्राम के समीप गोदावरी नदी में मिलती है।

संकट: वर्तमान में उडीसा-छत्तीसगढ़ सीमा के समीप प्रवाहित जोरा नाला के कारण इंद्रावती नदी का अस्तित्व संकट में है। जिसके कारण इंद्रावती नदी का जल सबरी नदी में प्रवाहित हो रहा है। इससे ग्रीष्मकाल में इसका सतत प्रवाह खंडित हो जाता है। रेत उत्खनन, तट पर शवदाह, गंदगी, कचरा फेंकने, प्रदूषित व गंदे जल की निकासी व निरंतर बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी अपने स्वरूप को खो रही है।

विकासीय परिदृश्य: दांतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर ‘बोधघाट परियोजना‘ नामक एक वृहत बाँध परियोजना का निर्माण किया जा रहा था, किंतु पर्यावरण संबंधी आपत्तियों के कारण इसे रोक दिया गया है। बस्तर जिले के जगदलपुर के समीप इंद्रावती नदी के किनारे नगरनार में एन.एम.डी.सी. (National Mineral Development Corporation) द्वारा वृहत् स्टील प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इंद्रावती नदी के जल संसाधन के उपयोग हेतु उड़ीसा राज्य में खातीगुड़ा बाँध बनाया गया है। इसे सतत प्रवाहमान बनाये रखने, सिंचाई सुविधाओं के विकास, जलापूर्ति तथा भूजल स्तर को बनाये रखने के उद्देश्य से नगरनार से चित्रकोट तक नौ एनीकट (Anicut) का निर्माण किया गया है। यातायात सुविधाओं के विकास के लिये इंद्रावती नदी पर अनेक पुलों का निर्माण किया गया है।

निष्कर्ष: इंद्रावती नदी का उद्गम से संगम तक का सफर विविध भौगोलिक परिदृश्य, परिवेश, समुदाय व संस्कृति के मध्य प्रवाहमान होकर पूर्ण होता है। इंद्रावती नदी, अपने जलसिंचन क्षेत्र में भौगोलिक परिदृश्य, मानव तथा उसके जीवन, वन तथा पर्यावरण के बदलते स्वरूप की साक्षी रही है। वर्तमान में इंद्रावती नदी प्राकृतिक तथा मानवीय कारणों से अपना मूल स्वरूप खो रही है। इंद्रावती नदी के जल का अन्यत्र प्रवाह, बाँध, एनीकट, व्यापक जलदोहन आदि के कारण इसका अविरल जलप्रवाह ग्रीष्मकाल में बाधित होता है। इंद्रावती नदी की यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक एवं भविष्य के लिये संकटकारी है। जन, शासन एवं प्रशासन का निरंतर, सामूहिक, समन्वित प्रयास ही इंद्रावती नदी के संकट का निवारण कर सकता है।

References


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