Goa

From Jatland Wiki
(Redirected from Goparashtra)
Jump to navigation Jump to search
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

गोआ का मानचित्र

Goa (गोआ) is a state on the southwestern coast of India within the Konkan region.

Variants

Location

It is bounded by Maharashtra to the north and Karnataka to the east and south, with the Arabian Sea forming its western coast. Panaji is the state's capital, while Vasco da Gama is its largest city. The historic city of Margao still exhibits the cultural influence of the Portuguese, who first landed in the early 16th century as merchants and conquered it soon thereafter. Goa is a former Portuguese province; the Portuguese overseas territory of Portuguese India existed for about 450 years until it was annexed by India in 1961.

Origin

In ancient literature, Goa was known by many names, such as Gomanchala, Gopakapattana, Gopakapattam, Gopakapuri, Govapuri, Govem, and Gomantak.[1] Other historical names for Goa are Sindapur, Sandabur, and Mahassapatam.[2]

History

Rock art engravings found in Goa exhibit the earliest traces of human life in India.[3]

Early Goan society underwent radical change when Indo-Aryan and Dravidian migrants amalgamated with the aboriginal locals, forming the base of early Goan culture.[4]

In the 3rd century BC, Goa was part of the Maurya Empire, ruled by the Buddhist emperor, Ashoka of Magadha. Buddhist monks laid the foundation of Buddhism in Goa.

Between the 2nd century BC and the 6th century AD, Goa was ruled by the Bhojas of Goa. Chutus of Karwar also ruled some parts as feudatories of the Satavahanas of Kolhapur (2nd century BC to the 2nd century AD), Western Kshatrapas (around 150 AD), the Abhiras of Western Maharashtra, Bhojas of the Yadav clans of Gujarat, and the Konkan Mauryas as feudatories of the Kalachuris.[5] The rule later passed to the Chalukyas of Badami, who controlled it between 578 and 753, and later the Rashtrakutas of Malkhed from 753 to 963. From 765 to 1015, the Southern Silharas of Konkan ruled Goa as the feudatories of the Chalukyas and the Rashtrakutas.[6] Over the next few centuries, Goa was successively ruled by the Kadambas as the feudatories of the Chalukyas of Kalyani. They patronised Jainism in Goa.[7]

In 1312, Goa came under the governance of the Delhi Sultanate. The kingdom's grip on the region was weak, and by 1370 it was forced to surrender it to Harihara I of the Vijayanagara empire. The Vijayanagara monarchs held on to the territory until 1469, when it was appropriated by the Bahmani sultans of Gulbarga. After that dynasty crumbled, the area fell into the hands of the Adil Shahis of Bijapur, who established as their auxiliary capital the city known under the Portuguese as Velha Goa (or Old Goa).[8]

In 1510, the Portuguese defeated the ruling Bijapur sultan Yusuf Adil Shah with the help of a local ally, Timayya. They set up a permanent settlement in Velha Goa. This was the beginning of Portuguese rule in Goa that would last for four and a half centuries, until its annexation in 1961. The Goa Inquisition, a formal tribunal, was established in 1560, and was finally abolished in 1812.[9]

In 1843 the Portuguese moved the capital to Panaji from Velha Goa. By the mid-18th century, Portuguese Goa had expanded to most of the present-day state limits. Simultaneously the Portuguese lost other possessions in India until their borders stabilised and formed the Estado da Índia Portuguesa or State of Portuguese India. Contemporary period

After India gained independence from the British in 1947, India requested that Portuguese territories on the Indian subcontinent be ceded to India. Portugal refused to negotiate on the sovereignty of its Indian enclaves. On 19 December 1961, the Indian Army invaded with Operation Vijay resulting in the annexation of Goa, and of Daman and Diu islands into the Indian union. Goa, along with Daman and Diu, was organised as a centrally administered union territory of India. On 30 May 1987, the union territory was split, and Goa was made India's twenty-fifth state, with Daman and Diu remaining a union territory.[10]

In Mahabharata

Goparashtra (गोपराष्ट्र) (Mahabharata) (VI.10.42)

Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Goparashtra (गोपराष्ट्र) is mentioned in Mahabharata. (VI.10.42). [11]....: Govindas, the Mandakas, the Shandas, the Vidarbhas, the Anupavasikas; the Ashmakas, the Pansurashtras, the Goparashtras, the Panitakas and....

गोपराष्ट्र

विजयेन्द्र कुमार माथुर[12] ने लेख किया है ...गोपराष्ट्र (AS, p.300): महाभारत में वर्णित एक जनपद जिस की स्थिति सीवी वैद्य के अनुसार महाराष्ट्र में थी.

गोआ

विजयेन्द्र कुमार माथुर[13] ने लेख किया है ...गोआ (AS, p.295) पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित भूतपूर्व पुर्तग़ाली बस्ती है, जो 1961 से भारत का अभिन्न अंग बन गई। गोवा अतिप्राचीन नगर है. इसका उल्लेख पुराणों तथा अन्य प्राचीन संस्कृत ग्रंथों से प्राप्त है. गोआ प्राचीनकाल में गोव, गोवापुरी, गोराष्ट्र, गोपकवन और गोमांतक आदि कई नामों से विख्यात रहा है।

गोवा के इतिहास से विदित होता है कि यहां दक्षिण के प्रसिद्ध कदंब नामक राजवंश का अधिकार द्वित्तीय शती ई. से 1312 ई. तक था. तत्पश्चात उत्तरी भारत से आने वाले मुसलमान आक्रमणकारियों ने इस पर आधिपत्य स्थापित कर लिया. उनका राज्य यहां 1370 ई. तक रहा, जब गोवा विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत कर लिया गया. 1402 ई. में बहमनी राज्य के विघटित हो जाने पर युसूफ आदिलशाह ने गोवा को बीजापुर रियासत में मिला लिया. इस समय गोवा की गणना पश्चिमी समुद्र तट के प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्रों में होती थी. विशेषकर हुरमुज (ईरान) से भारत आने वाले ईरानी घोड़े गोवा के बंदरगाह पर ही उतरते थे. हज यात्रियों के अरब जाने के लिए भी यही बंदरगाह था. इस समय व्यापारिक महत्व की दृष्टि से केवल कालीकट को ही गोवा के समकक्ष समझा जाता था.

अरब भौगोलिकों ने गोवा को सिंदबर या संदाबूर नाम से लिखा है. पुर्तगाली इसे गोवा वेल्हा कहते थे. 1498 ई. में पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा के |कालीकट पर उतरने के पश्चात पुर्तगालियों ने भारत के पश्चिमी तटवर्ती अनेक स्थानों पर अधिकार कर लिया. 1510 ई. में पुर्तगाली

[p.296] गवर्नर अलबूकर्क ने इस नगर पर आक्रमण करके उसे हस्तगत कर लिया. युसूफ आदिलशाह के बारंबार पुर्तगालियों से मोर्चा लेते रहने पर भी अंत में गोवा पुर्तगालियों के कब्जे में आ गया. इसी काल में इन लोगों का भारत के पश्चिमी तट के अनेक स्थानों पर अधिकार हो गया किंतु उन्हें डच, अंग्रेजों तथा मराठों का सामना करना पड़ा. पुर्तगाली बस्तियों पर 1603 ई. में डचों ने हमला कर दिया. 1683 ई. में शिवाजी के पुत्र संभाजी ने लालसट इत्यादि स्थानों पर आक्रमण करके पुर्तगालियों को बहुत हानि पहुंचाई. 1739 ई. में मराठा सरदार चिमना जी आपा ने पुर्तगाली राज्य पर जोर का आक्रमण किया और उसका अधिकांश जीत लिया. इसका एक भाग ततपश्चात अंग्रेजों के हाथ में चला गया. गोवा पुर्तगाल की अवशिष्ट बस्तियों में से था और यह स्थिति 1961 तक रही जब भारत ने अपने अभिन्न अंग को साढ़े चार सौ वर्ष के विजातीय शासन के पश्चात पुनः अपना लिया.

गोआ परिचय

इस प्रदेश की लंबी ऐतिहासिक परंपरा रही है। गोवा का प्राचीन हिन्दू शहर, जिसके अवशेष का एक अंश ही बचा हुआ है, उसका निर्माण द्वीप के सुदूर दक्षिणी बिन्दु पर हुआ था और यह आरम्भिक हिन्दू दन्तकथाओं और इतिहास में प्रसिद्ध था। पुराणों और अभिलेखों में इसका नाम गोवे, गोवपुरी व गोमत के रूप में आता है। मध्यकालीन अरबी भूगोलविद् इसे सिंदाबूर या संदाबूर के नाम से और पुर्तग़ाली वेल्हा गोवा के रूप में जानते थे।

गोवा, भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। गोवा राज्य, उत्तर में महाराष्ट्र राज्य, पूर्व व दक्षिण में कर्नाटक राज्य और पश्चिम में अरब सागर से घिरा है और पणजी गोवा की राजधानी है। गोवा का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर है, यह समुद्र तट की ओर एक द्वीपयुक्त शहर है, जो मुंबई से 400 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण में मुख्यभूमि में स्थित है। गोवा क्षेत्रफल में भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से दूसरा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने ख़ूबसूरत समुद्र के किनारों और मशहूर स्थापत्य कला के लिये जाना जाता है।


गोवा पहले पुर्तग़ाल का एक उपनिवेश था। पुर्तग़ालियों ने गोवा पर लगभग 450 साल तक शासन किया और दिसंबर, 1961 में यह भारतीय प्रशासन को सौंप दिया गया। और सन् 1987 ई. से गोवा को राज्य का दर्जा मिला। इसके उत्तर में तेरेखोल नदी बहती है जो गोवा को महाराष्ट्र से अलग करती है। इसके दक्षिण में कर्नाटक का उत्तर कन्नड़ ज़िला और पूर्व में पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर है। पणजी, मडगाँव, वास्को, मापुसा, तथा पोंडा राज्य के प्रमुख शहर हैं।

गोवा प्राचीनकाल में गोमांचल, गोपकपट्टनम, गोपपुरी, और गोमांतक आदि कई नामों से विख्यात रहा है। इस प्रदेश की लंबी ऐतिहासिक परंपरा रही है। गोवा पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित भूतपूर्व पुर्तग़ाली बस्ती है, जो 1961 से भारत का अभिन्न अंग बन गई। गोवा अतिप्राचीन नगर है।


वास्को द गामा एक पुर्तग़ाली नाविक थे। वास्को द गामा के द्वारा की गई भारत यात्राओं ने पश्चिमी यूरोप से केप ऑफ़ गुड होप होकर पूर्व के लिए समुद्री मार्ग खोल दिए थे। इन्होंने विश्व इतिहास के एक नए युग की शुरुआत की थी। यह यूरोपीय खोज युग के सबसे सफल खोजकर्ताओं में से एक है, और यह यूरोप से भारत सीधी यात्रा करने वाले जहाज़ों के कमांडर थे। वास्को द गामा ने पुर्तग़ाल को एक विश्व शक्ति बनाने में भी मदद की थी।

महाभारत में गोवा का उल्लेख 'गोपराष्ट्र' अर्थात् 'गाय चराने वालों का देश' के रूप में मिलता है। दक्षिण कोंकण का उल्लेख गोवा राष्ट्र के रूप में मिलता है। संस्कृत के कुछ प्राचीन स्रोतों में गोवा को 'गोपकपुरी' और 'गोपकपट्टन' कहा गया है जिनका उल्लेख अन्य ग्रंथों के अलावा 'हरिवंशम्' और स्कन्द पुराण में प्राप्त होता है। गोवा को बाद में कहीं कहीं 'गोअंचल' भी कहा गया है। अन्य नामों में गोवे, गोवापुरी, गोप का पाटन, और गोमंत प्रमुख हैं। टॉलमी ने गोवा का उल्लेख ईस्वी सन् 200 के लगभग 'गोउबा' के रूप में किया है। अरब के मध्ययुगीन यात्रियों ने इसे 'चंद्रपुर' और 'चंदौर' का नाम दिया है जो मुख्य रूप से एक तटीय नगर था। जिस स्थान का नाम पुर्तग़ालियों ने गोवा रखा वह आज का छोटा सा समुद्र तटीय शहर 'गोअ-वेल्हा' है। कालान्तर में उस क्षेत्र को गोवा कहा जाने लगा जिस पर पुर्तग़ालियों ने क़ब्ज़ा किया।

संदर्भ: भारतकोश-गोवा का इतिहास

External links

References

  1. http://india.gov.in/knowindia/st_goa.php
  2. Sakshena, R.N. (June 2003). Goa: Into the Mainstream. p. 5. ISBN 9788170170051
  3. Indian Archaeological Society (2006). Purātattva, Issue 36. Indian Archaeological Society. p. 254.
  4. Dhume, Anant Ramkrishna (1986). The cultural history of Goa from 10000 BC – 1352 AD. Ramesh Anant S. Dhume. pp. 355 pages (see pages 100–150).
  5. De Souza 1990, p. 9
  6. De Souza 1990, p. 10
  7. De Souza 1990, p. 11
  8. Dobbie, Aline (2006). India: The Elephant's Blessing. Melrose Press. pp. 253 pages (see page 220).
  9. Anant Kakba Priolkar (1961). The Goa Inquisition: Being a Quatercentenary Commemoration Study of the Inquisition in India. Bombay University Press. p. 3.
  10. Poddar, Prem (2 July 2008). Historical Companion to Postcolonial Literatures - Continental Europe and its Empires. Edinburgh University Press. ISBN 9780748630271.
  11. गॊविन्दा मन्दकाः षण्डा विदर्भानूपवासिकाः, अश्मकाः पांसुराष्ट्राश च गॊप राष्ट्राः पनीतकाः (VI.10.42)
  12. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.300
  13. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.295-296