Tosham

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Location of Tosham in Bhiwani District

Tosham (तोशाम) is a town and tahsil in Bhiwani district in Haryana. It is also a constituency of Haryana Vidhan Sabha.

Jat Gotras

Panghal

History

दिलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

भिवानी जिले के मीत्ताथल गांव में की गई खुदाइयों से पता चला कि इस गांव की बनावट,


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-488


वास्तु-कला और शिल्पकला के नमूने पूर्व हड़प्पा सभ्यता से मिलते हैं। प्रथम बार यह स्थान उस समय रोशनी में आया जब 1913 ई० में वहां से समुद्रगुप्त (धारण गोत्र का जाट) सम्राट् के समय के सिक्कों का बड़ा भंडार मिला।

महाभारत से इस बात का प्रमाण मिलता है कि इस जिले में पांडवों का भी पदार्पण हुआ। नकुल ने अपनी दिग्विजय के दौरान यहां के लोगों का मुकाबला किय और उस पर विजय पाकर शासन भी किया। तोशाम की पहाड़ी भी इस बात की साक्षी है कि पांडव इस स्थान से जुड़े रहे। इस पहाड़ी पर सूर्यकुण्ड, व्यासकुण्ड, पाण्डुतीर्थ तथा अन्य कई पवित्रस्थान बने हैं और यह विश्वास किया जाता है कि यह स्थान पाण्डवों के समय में एक तपोभूमि था, जहां साधु लोग घोर तपस्या किया करते थे। यही तोशाम पृथ्वीराज चौहान के समय में दिल्ली का एक हिस्सा भी रहा। महाभारत युद्ध के बाद यह जिला कुरुराज्य (जाटवंश) का एइ हिस्सा बना। कुरुराज्य तीन सीमाओं में बंटा था - 1. कुरुक्षेत्र 2. कुरुदेश 3. कुरुजंगल।

भिवानी क्षेत्र कुरुजंगल का हिस्सा बना और इस क्षेत्र पर पहले राजा परीक्षित और उनके बाद उनके पुत्र जनमेजय ने प्रभावशाली ढ़ंग से शासन किया। कुरु शासन के पतन के साथ इस क्षेत्र में कई जातियां जैसे जाट अहीर, भदनाकस तथा यौधेय (जाटवंश) आकर बस गईं। ये जातियां काफी ताकतवर, सुदृढ़ और शक्तिशाली थीं तथा उनका मुख्य धन्धा खेतीबाड़ी ही रहा।

इस क्षेत्र में मौर्य-मोर (जाटवंश) राजाओं का शासन होने का भी आभास होता है। तोशाम तथा नौरंगाबाद की खुदाई से मिले सिक्कों से पुरातत्त्वज्ञों ने यह पाया है कि यह क्षेत्र मौर्य शासन में व्यापार का केन्द्र रहा। नौरंगाबाद से मिले इण्डो-ग्रीक सिक्कों से इण्डो-ग्रीक के शासन होने के भी चिन्ह मिलते हैं। (गांधार कला को ही ‘इण्डो-ग्रीक कला’ कहा जाता है क्योंकि इनका विषय भारतीय होते हुए भी शैली (ढंग) पूर्णतया यूनानी थी। गांधार जाटवंश है और यहां इस जाटवंश का शासन था)। गांधार शासन पर बाद में कुषाणवंश (जाटवंश) ने अधिकार कर लिया।

कुषाणवंश ने इस भिवानी क्षेत्र पर लगभग 150 वर्षों तक शासन किया। इस बात की पुष्टि कनिष्क और उसके बेटे हुविष्क के उन सिक्कों से होती है जो नौरंगाबाद में मिले।

तत्पश्चात् इस क्षेत्र पर 350 ईस्वी तक यौधेयों (जाटवंश) का राज्य रहा और बाद में गुप्त वंश (धारण गोत्र के जाट) के शक्तिशाली राजा समुद्रगुप्त ने यौधेयों को हराकर अपना शासन स्थापित किया। समुद्रगुप्त के शासन में भी नौरंगाबाद तथा तोशाम महत्त्वपूर्ण स्थान थे। नौरंगाबाद एक राजनैतिक केन्द्र के रूप में महत्त्वपूर्ण था तो तोशाम धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध था। (दैनिक ट्रिब्यून, बुधवार, 11 फरवरी 1987, लेखक रमेश आनन्द)। [1]

पंघाल गोत्र का इतिहास

पंडित अमीचन्द्र शर्मा[2]ने लिखा है - [p.30]: पंघाल गोत्र के बड़े का नाम थीथा था जो चौहान संघ में था। चौहान संघ मुख्यतया जाट गोत्रों का ही संघ था। वह सांभर के आस-पास किसी ग्राम में रहता था, वहाँ से चलकर तोशाम जिला हिसार (अब भिवानी जिले) में एक टूण गोत्री जाट के घर रहने लगा। थीथा और उस जाट में प्रेम हो गया। थीथा सुंदर और प्रवीण था।


[p.31]: वह जाट वहाँ का नंबरदार था। वह औरंगजेब (1618 – 1707) को ग्रामकर (माल) भरने दिल्ली जाया करता था तब वह थीथा को भी साथ लेजाया करता था। बाद में जाट ने थीथा को ही अपना मुखिया बना लिया और अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया। अब थीथा की दिल्ली में पहचान हो चुकी थी। जब जाट मर गया तो थीथा के साथ जाट के पुत्रों का विरोध हुआ। जाट के पुत्रों ने थीथा को मारना चाहा। थीथा की स्त्री को नाईन ने यह खबर देदी। थीथा ने दिल्ली जाकर बादशाह औरंगजेब की सहायता ली। बादशाह ने सेनापति भेजकर तूण जाटों पर हमला कर दिया जिसमें कुछ तूण जाट मर गए और कुछ भाग गए। थीथा ने अपने घर की रक्षा के लिए मोर पक्षियों के पंख का चिन्ह कर दिया था इसलिए थीथा के घर को पंखालय कहा गया और उसकी सन्तानें बाद में पंखाल बोली जाने लगी जिसका रूपांतर पंघाल हो गया। पंघाल जाटों के संघ का वही गोत्र है जो चौहान संघ का पंघाल है। यह विवरण तालू ग्राम के चौधरी पखिरियाराम के पुत्र रामलाल ने लिखाया। वह पंघाल जाट है।

नोट - पंडित अमीचन्द्र शर्मा ने ऊपर टूण गोत्र का उल्लेख किया है। टूण गोत्र जाटों में नहीं होता है। यह संभवत: दूण या दुहण होना चाहिए। भाट द्वारा थीथा के 'मोर पक्षियों के पंख का चिन्ह' का प्रयोग करना यह बताता है कि वह मौर या कोई नागवंशी वंश से होना चाहिए।

Notable persons

Villages in Tosham tahsil

Alakhpura Bhiwani, Alampur Bhiwani, Badalwala, Baganwala, Bajina, Bhariwas, Bhera, Bhurtana, Bijlanawas, Birola, Busan, Chanana, Chhapar Jogian, Chhapar Rangran, Dadam, Dang Kalan, Dang Khurd, Daryapur, Devawas, Devrala, Dhani Kirawar, Dhani Mahu, Dharan, Dharwanbas, Dulheri, Garanpura, Hasan, Indiwali, Isharwal Bhiwani, Jainawas, Jhanwari, Jhuli, Kairu, Katwar, Khanak, Khaparbas, Khariawas, Kharkhri Makhwan, Kharkhri Sohan, Khawa, Kirawar, Ladianwali, Mandhan, Mansarwas, Miran, Nigana Kalan, Nigana Khurd, Patodi, Pinjo Khara, Riwasa, Rodhan, Sagban, Salewala, Sandwa, Sara, Shimliwas, Sidhan, Sungarpur, Thilor, Tosham (MC),

External links

References

  1. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter V (Page 488-489)
  2. Jat Varna Mimansa (1910) by Pandit Amichandra Sharma, p.30-31

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