Muzaffarnagar

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Author of this article is Laxman Burdak लक्ष्मण बुरड़क
Map of Muzaffarnagar district

Muzaffarnagar (Hindi: मुज़फ़्फ़रनगर, Urdu: مظفر نگر) (Mujaffarnagar) is a medium-sized city, headquarters of the Muzaffarnagar district, in the western part of the state of Uttar Pradesh in India. According to the 2001 census it has a metropolitan population of 331,403.

Contents

Tahsils in Muzaffarnagar district

Villages in Muzaffarnagar Tahsil

Abdul Pur, Aiki, Akbagarh, Akhlor, Alamgirpur, Ali Pura, Alipur Kalan, Alipurkhurd, Almaspur, Almawala, Amirnagar, Arnaich, Atali, Azizpur, Badh, Badhai Kalan, Badhai Khurd, Badheri, Badhiwala, Badhiwala, Baghra, Bagowali, Bagumpur, Bahadarpur, Baikunthpur, Bajheri, Balwakheri, Bamanheri, Bannagar, Barkali, Barla, Barwala, Basera, Behari, Beheri, Bhadola, Bhadoli, Bhainser Heri, Bhainsliwala, Bhaisani, Bhamela, Bhandura, Bhikki, Bhohjhaheri, Bhuraheri, Bibipur, Bijopura, Bilaspur, Biralsa, Biralsi, Buchha, Budhakhera, Budina Kalan, Budinakhurd, Chamrawala, Chandan, Chandpur, Charthaval (NP), Charthawal Rural, Chhapar, Chhapra, Chhetela, Chhmau, Chokra, Chroli, Dadheru Khurd, Dadherukalan, Dadupur, Damaatpatti, Datiyana, Dehchand, Desalpur, Dhamat, Dhandhera, Dhansani, Dhindhawali, Dholara, Dholari, Dhudhli, Didaheri, Doheli, Farakhpur, Faridpur, Foloda, Garhi Durganpur, Ghisukhera, Ghumawti, Godhna, Gujarheri, Gunyazuddi, Gyanamazra, Haibatpur, Haider Nagar Jalalpur, Harenti, Harnaki, Harsoli, Husainpur, Jafarpur, Jagaheri, Jamalpur, Jaroda, Jasoi, Jatmajhra, Jatnagla, Jhabarpur, Jindawala, Kabirpur, Kacholi, Kailanpur Jalalpur, Kallarpur, Kamhera, Kanahheri, Karwara, Kasampur, Kasiara, Kasoli, Kayampur, Kazi Khera, Khaikheri, Khampur, Khanjahanpur, Khatola, Khera Gadai, Kheri Duda Dhari, Kheriwiran, Kherki, Khindiya, Khojanagla, Khudda, Kinauni, Kolaheri, Kukra, Kulheri, Kusropur, Kutabpur, Kutba, Kutbi, Kutesra, Lachhera, Ladwa, Lakhan, Lakhnoti, Lalu Kheri, Luhari, Madpur, Mahmood Pura Lakarsandha, Mahraipur, Makhyali, Makundpur, Malira, Mandhera, Mandi, Mandla, Manganpur, Marakpur, Megha, Meghakheri, Mimlana, Mirapur, Mirzapur Urf Shahananpur, Mohammadpur Madan, Mohbalipur, Molaheri, Mustafabad, Muthra, Muzaffarnagar (MB), Nagala Pithora, Nagla Rai, Naglamehrdad, Naiamu, Nairana, Nanupur, Nara, Narottampur, Nasirpur, Nasirpur, Nasrullapur, Nirdhna, Nirmana, Nirmani, Niwada, Nuna Khera, Nurnagar, Pachenda Kalan, Pachenda Khurd, Panchli, Parai, Pawti, Pilakhni, Pinna, Pipalhera, Pipalshah, Pur Kazi Rural, Purquazi (NP), Raee, Rampur, Rasul Pur, Ratheri, Razkallapur, Retanagla, Rohana Kalan, Rohana Khurd, Roniharji Pur, Rukanpur, Sadpur, Sahaoli, Saidnagala, Saidpur Kalan, Saidpur Khurd, Salah Kheri, Salajuddi, Salempur, Salempur, Samarthi, Sandhawali, Sanjhak, Sarwat, Seemli, Shahbudinpur, Shahdara, Shajhahanpur Urf Radawli, Shakarpur, Shernagar, Sherpur, Sherpur, Sikandarpur, Sikhreda, Simbhalki, Singalpur, Sisona, Sonhjani, Suaheri, Suheli, Sujru, Tajelhera, Tajpur, Tanda, Tawli, Tigri, Tikola, Titavi, Tugalakpur, Udyawali, Wahalna,

History

It is mainly an industrial town with sugar, steel and paper being the major products. It boasts of the highest per capita income in the country and the highest in the state of Uttar Pradesh. The Jaggery (heated sugar cane juice) market in Muzaffarnagar is the largest in the world. Muzaffarnagar spent 600 crore on shoes and dress in 2006 (As per report national news paper Dainik Jagran)which again is the highest in India as compared to non metro cities.

Muzaffarnagar town Shamli paid highest LIC premium in India while Muzaffarnagar pays maximum telephonic revenue as a rent in India. The city is situated half way on the Delhi-Dehradun Highway.

The older parts of the city have a Mughal feel to them. Forty percent of the population is Muslim. There is a sizeable Sikh and small Christian population as well. Even though the majority remains Hindu.

The historical towns of Meerut, site of the rebellion of 1857, and Hastinapur are close by. Nearby towns are New Delhi, Dehra Dun, Saharanpur and Mussoorie.

The All India Jat Mahasabha was founded in Muzaffarnagar in western Uttar Pradesh, India in 1907. Its two founder members from Muzaffarnagar were:

हास और राजस्व प्रमाणों के अनुसार दिल्ली के बादशाह, शाहजहाँ, ने सरवट (SARVAT) नाम के परगना को अपने एक सरदार सैयद मुजफ़्फ़र खान को जागीर में दिया था जहाँ पर 1633 में उसने और उसके बाद उसके बेटे मुनव्वर लश्कर खान ने मुजफ़्फ़र नगर नाम का यह शहर बसाया।

इस जनपद का इतिहास बहुत पुराना है । काली नदी के किनारे तहसील सदर के मांडी नाम के गाँव में हड़प्पा कालीन सभ्यता के पुख्ता अवशेष मिले हैं। अधिक जानकारी के लिये भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने वहां पर खुदाई भी करवायी थी। सोने की अंगूठी जैसे आभूषण और बहुमूल्य रत्नों का मिलना यह दर्शाता है कि यह स्थान प्राचीन समय में व्यापार का केन्द्र था। महाभारत कालीन हस्तिनापुर और कुरूक्षेत्र नगरों से निकटता इस तथ्य को बल देती है।

किंवदंती है ​कि कौरवों तथा पांडवों के बीच महाभारत का युद्व ग्राम पचेन्‍डा में लड़ा गया । युद्व के दोरान दोनों पक्षों की सेना कुरावली तथा पंडावली ग्राम में ​विश्राम करती थी । शुक्रताल मुजफ्फरनगर जनपद में ​स्‍थित एक ​विश्‍व प्र​सिद्व धार्मिक स्थान माना जाना जाता है ।इस स्थान पर वटवृक्ष के नीचे महर्षि शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षत को भागवत कथा सुनाई थी । आज भी उस स्थान पर वह प्राचीन व पवित्र वटवृक्ष स्थित है ।

तैमूर आक्रमण के समय के फारसी इतिहास में भी इस स्थान का वर्णन मिलता है। 1399 में गंगा के किनारे भोकड़ हेड़ी स्थान पर बड़ी संख्या में हिन्दुओं ने तैमूर की सेना का सामना किया था परन्तु सुव्यवस्थित न होने के कारण पराजित हो गये। लम्बे समय तक मुगल आधिपत्य में रहने के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 1826 में मुज़फ़्फ़र नगर को जिला बना दिया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में शामली के मोहर सिंह और थानाभवन के सैयद-पठानों ने अंगेजों को हरा कर शामली तहसिल पर कब्जा कर लिया था परन्तु अंग्रेजों ने क्रूरता से विद्रोह का दमन कर शामली को वापिस हासिल कर लिया। 6 अप्रैल 1919 को डा0 बाबू राम गर्ग, उगर सेन, केशव गुप्त आदि के नेतृत्व में इण्डियन नेशनल कांगेस का कार्यालय खोला गया और पण्डित मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, मोती लाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, सरोजनी नायडू, सुभाष चन्द्र बोस आदि नेताओं ने समय-समय पर मुज़फ़्फ़र नगर का भ्रमण किया। खतौली के पण्डित सुन्दर लाल, लाला हरदयाल, शान्ति नारायण आदि बुद्धिजीवियों ने स्वतंत्रता आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने पर केशव गुप्त के निवास पर तिरंगा फ़हराने का कार्यक्रम रखा गया।

शहर से छह किलोमीटर दूर सहारनपुर रोड़ पर काली नदी के ऊपर बना बावन दरा पुल, करीब 1512 ईस्वी में शेरशह सूरी ने बनवाया था । शेरशाह सूरी उस समय मुगल सम्राट हुमायूं को पराजित कर दिल्ली की गद्दी पर बैठा था । उसने सेना के लश्कर के आने जाने के लिये सड़क का निर्माण कराया था जो बाद में ग्रांट ट्रंक रोड़ के नाम विख्यात हुई । इसी मार्ग पर बावन दर्रा पुल है । माना जाता है कि इसे इसे उस समय इस प्रकार डिजाईन किया गया था कि यदि काली नदी में भीषण बाढ़ आ जाये तो भी पानी पुल के किनारे पार न कर सके । पुल में कुल मिला कर 52 दर्रे बनाये गये हैं । जर्जर हो जाने के कारण अब इसका प्रयोग नहीं किया जा रहा है । वहलना गांव में शेरशाह सूरी की सेना के पड़ाव के लिये गढ़ी बनायी गई थी । इस गढ़ी का लखौरी ईटों का बना गेट अभी भी मौजूद है ।

ग्राम गढ़ी मुझेड़ा में स्थित सैयद महमूद अली खां की मजार मुगलकाल की कारीगरी की मिसाल है । 400 साल पुरानी मजार और गांव स्थित बाय के कुआं की देखरेख पुरातत्व विभाग करता है। मुगल समा्रट औरगजेब की मौत के बाद दिल्ली की गद्दी पर जब मुगल साम्राज्य की देखरेख करने वाला कोई शासक नहंी बचा तो जानसठ के सैयद बन्धु उस समय नामचीन हस्ती माने जाते थे । उनकी मर्जी के बिना दिल्ली की गद्दी पर कोई शासक नहंी बैठ सकता था । जहांदार शाह तथा मौहम्मद शाह रंगीला को सैयद बंधुओं ने ही दिल्ली का शासक बनाया था । इन्ही सैयद बंधुओं मे से एक का नाम सैयद महमूद खां था । उन्हीं की मजार गा्रम गढ़ीमुझेड़ासादात में स्थित हैं । जिसमें मुगल करीगरी की दिखाई पड़ती है । 400 साल पुरानी उक्त सैयद महमूद अली खां की मजार तथा प्राचीन बाय के कुयेंं के सम्बन्ध में किदवदन्ती है कि दोनो का निर्माण कारीगरों द्वारा एक ही रात में किया गया था ।

जिले के शुक्रताल स्थान पर 5000 वर्ष पुराना वट वृक्ष है । जिसके नीचे बैठकर महर्षि शुकदेव जी ने अपने श्रीमुख से राजा परीक्षित को श्रीमदभागवत की कथा सुनाई थी । वर्तमान में शुकदेव आश्रम में स्थित यह वटवृक्ष लाखों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है । देश के बड़े बड़े कथावाचक यहॉ पर आकर श्रीमदभागवत की कथा का आयोजन करने में अपने को धन्य मानते हैं ।

Jat Khaps in Muzaffarnagar district by gotra and villages in them

  • Source: Jat Bandhu, April 1991

Jat Gotras in Muzaffarnagar

Jat Jagriti Smarika-2006

I thought to study the distribution pattern of Jat Gotras in the Muzaffarnagar district in Uttar Pradesh. There are no ready records or studies as such. So I took the life-membership list of Jat Jagriti Smarika - 2006, Published by Janpad Jat Mahasabha Muzaffarnagar. It gives details of life members’ names, addresses, place of origin, gotra and phone numbers of Jat families living in Muzaffarnagar city.

The two attributes Jat gotra and place of origin were brought on excel file, tabulated and shorted out. There is an interesting result which gives which jat gotra is from which village. This table is available with me and if any member is interested it can be uploaded. The following table is an abstract of the detailed table that gives population of each gotra as a number out of total jat families (263) in the directory arranged in alphabetical order.


The Jat Directory gives details of 263 Jat families who are life members. They are from 60 gotras. The figure after gotra is the count out of 263 from which we can roughly assess comparative population of that gotra in the district. Here is the list:

List of Jat Gotras

Agrohe (1), Ahlawat (7), Badwan (2), Baliyan (32), Beniwal (2), Budiyan (1), Chauhan (5), Chaundiyan (1), Chikara (3), Dabas (1), Dahiya (2), Deshwal (4), Dhaka (1), Dhama (1), Dhariwal (1), Dodwal (1), Phour (1), Godyan , Gulia (3), Jatrana (5), Jawla (1), Kadian (6), Kaliyar (1), Kalkhande (4), Kharab (3), Khatiyan (2), Khokhar (4), Kuhad (2), Kuntal (1), Lal (10), Lathiyan (5), Lohan (3), Maan (1), Madan (1), Malik (29), Mehandiyan (2), Nain (4), Narwal (3), Nehra (1), Nirwal (2), Panwar (17), Pinia (1), Pipania (1), Punia (1), Raghuvanshi (10), Rana (3), Rathi (21), Rohal (1), Rohela (1), Sahrawat (5), Salaru (1), Salkalan (3), Sangwan (1), Saroha (5), Taliyan (1), Tanwar (3), Tarat (2), Tewatia (1), Thakran (3), Tomar (25), Virpal (1), Total 263

Biggest Jat Gotras

On the basis of above analysis the biggest Jat gotras of the district are as under in increasing dicated in bracket:

External links

References


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