Atavi

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.)

Atavika (आटविक) is the north-eastern part of Madhya Pradesh and south-eastern part of Uttar Pradesh. [1]

Variants

Location

KP Jayaswal has identified Atavi with Bundelkhand and eastern Baghelkhand. [2]

Jat clans

History

The ancient name of Bharhut was Vardavati. Ptolemy in his 'Geography' has mentioned a city named 'Bardaotis' situated on the route from Ujjain to Pataliputra, which according to Alexander Cunningham is related with Bharhut. According to Tibetan 'Dhulva' a Shakya monk named Samyak was expelled from Kapilavastu and came to Bagud and built a stupa here. Alexander Cunningham tells us that Bagud is Bharhut. It has been mentioned to be within the Ātavī province of the ancient literature. Samudragupta has mentioned Atavi in the list of places won by him. KP Jayaswal has identified Atavi with Bundelkhand and eastern Baghelkhand. [3]


Sandhya Jain[4] mentions Mahabharata Tribes in 'Geography' and 'Tributes' whose Position is not Known whose side they fought Mahabharata War. This includes ...1. Atavisavara (अटवीशबर) - Refers to the tribes of mid- Vindhya region, and may be identical with the Atavika mentioned in the Puranas and the Allahabad Pillar Inscription of Samudragupta. Mentioned in geography of Mahabharata (VI.10.46). [5] The Mahabharata Tribe - Atavi (अटवी) may be identified with Jat Gotra - Atval (अटवाल) of Jats from Punjab. The Mahabharata Tribe - Shavara (शबर) may be identified with Jat Gotra - Shiwar (शीवर) of Jats from Rajasthan.

अटवी

अटवी (AS, p.17): विजयेन्द्र कुमार माथुर[6] ने लिखा है....प्राचीन काल में बेतवा नदी के दोनों ओर के प्रदेश का जो विंध्याचल की तराई में बसे होने के कारण वनाच्छादित था, इस नाम से अभिधान किया जाता था. महाभारत काल में अटवी पुलिंदों की बस्ती थी। महाभारत (सभा. 29, 10) (II.26.10) में पुलिंदनगर पर भीम ने अपनी दिग्विजय-यात्रा के प्रसंग में अधिकार कर लिया था। वायु पुराण (45, 126) में भी आटवियों का उल्लेख है।--'कारुषाश्च सहैषीकाटव्या: शवरास्तथा.' गुप्तसम्राट समुद्रगुप्त ने चौथी शती ई. में अटवी के सब राजाओं पर विजय प्राप्त करके उन्हें 'परिचारक' बना दिया था। ('परिचारकीकृतसर्वाटिवीकराजस्य'- समुद्रगुप्त की प्रयाग-प्रशस्ति) हर्षचरित में बाणभट्ट ने भी 'विंध्याटवी' का सुंदर वर्णन किया है। अटवी में ही राज्यश्री की खोज करते समय हर्ष की भेंट बौद्ध भिक्षु 'दिवाकरमित्र' से हुई थी। अटवी को आटविक प्रदेश भी कहा गया है। (दे.कोटाटवी, वटाटवी)

आटविक

आटविक: वर्तमान मध्य प्रदेश का पूर्वोत्तर तथा उत्तर प्रदेश का दक्षिण पूर्वी भाग जो वनों के आधिक्य के कारण अटवी कहलाता था. इसके कोटाटवी तथा वटाटवी नामक भाग थे. आटविक राज्य उत्तर में गाजीपुर से लेकर जबलपुर तक फैले थे। [7]

कोटाटवी

कोटाटवी (AS, p.230) - आटविक प्रदेश (मध्य प्रदेश का पूर्वोत्तर तथा उत्तर प्रदेश का दक्षिण पूर्वी भाग जो वनों के आधिक्य के कारण अटवी कहलाता था), इसके कोटाटवी तथा वटाटवी नामक भाग थे. इसका उल्लेख संध्याकरनन्दिरचित रामचरित (पृ.36) की टीका में किया गया है. [8]

विंध्याटवी

विंध्याटवी (AS, p.849) - विंध्याटवी प्राचीन वन प्रदेश था (दे. अटवी), जिसका वर्णन वाणभट्ट ने 'हर्षचरित' में किया है। यह विंध्याचल का वन प्रदेश था। अपने स्वामी गृहवर्मा के मारे जाने के पश्चात् राज्यश्री का विंध्याटवी के वन में प्रवेश करने का बाण ने उल्लेख इस प्रकार किया है- 'देव देवभूयं गते देवेराज्यवर्धने गुप्तनाम्ना च गृहीते कुशस्थले देवी राज्यश्रीः परिमृश्यबंधनाद्विंध्याटवीं सपरिवारा प्रविष्टेति। ('हर्षचरित', उच्छ्वास 6)[9]

In Mahabharata

Atavi (अटवी) is mentioned in Mahabharata (VI.10.46), (VIII.30.45),

Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Atavi (अटवी) province is mentioned in Mahabharata (VI.10.46).[10]


Karna Parva/Mahabharata Book VIII Chapter 30 gives description blaming the Vahikas and Madrakas and the countries to be avoided. Atavi (अटवी) is mentioned in Mahabharata (VIII.30.45). [11]...The Karasakaras, the Mahishakas, the Kalingas, the Karkotakas, the Atavis, the Virakas, and other peoples of no religion, one should always avoid. (VIII.30.45)

External links

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.61
  2. Abha Singh, Bharhut Stoopa Gatha (Hindi), Ed. Ramnarayan Singh Rana, Satna, 2007, p. 119
  3. Abha Singh, Bharhut Stoopa Gatha (Hindi), Ed. Ramnarayan Singh Rana, Satna, 2007, p. 119
  4. Sandhya Jain: Adi Deo Arya Devata - A Panoramic View of Tribal-Hindu Cultural Interface, Rupa & Co, 7/16, Ansari Road Daryaganj, New Delhi, 2004,p.127
  5. अपरन्ध्राश च शूद्राश च पह्लवाश चर्म खण्डिकाः । अटवी शबराश चैव मरु भौमाश च मारिष (VI.10.46).
  6. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.17
  7. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.61-62
  8. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.230
  9. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.849
  10. अपरन्ध्राश च शूद्राश च पह्लवाश चर्म खण्डिकाः, अटवी शबराश चैव मरु भौमाश च मारिष (VI.10.46)
  11. कारः करान महिषकान कलिङ्गान कीकटाटवीन, कर्कॊटकान वीरकांश च दुर्धर्मांश च विवर्जयेत (VIII.30.45)