Chandrarama

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Chandrarama (चन्द्रराम) was a King of Hala Jat gotra of Halakhandi in Sindh, Pakistan during early 8th century.

Jat Gotras

Hala

History

चन्द्रराम

ठाकुर देशराज[1] ने लिखा है.... हाला - यह खानदान कुछ पुराना है। सतवाहन लोगों में हाला एक विद्वान पुरुष हुआ है। जिसने गाथा सप्तमी तैयार कराई थी। राजपूत काल में चंदराम हाला सूस्थान का अधिपति था। इसका देश हालाखंडी के नाम से मशहूर था।

उस समय सिंध में मता और नेरून नाम के दो जाट राजा और भी राज करते पाए जाते हैं।


ठाकुर देशराज लिखते हैं कियह चन्द्रराम ‘हाला’ वंश का जाट सरदार था। पहले सूस्थान का शासक था, किन्तु सूस्थान इसके हाथ से निकल गया था। कुछ समय यह इधर-उधर मारा-मारा फिरता रहा, किन्तु ज्योंही अवसर आया सूस्थान से मुसलमानों को निकाल कर किले पर कब्जा कर लिया। मुहम्मद कासिम ने इस खबर को सुना तो वह नाराज हुआ और अब्दुल रहमान के साथ एक हजार सवार और दो हजार पैदल देकर चन्द्रराम का दमन करने के लिए भेजा। ‘चन्द्रराम हाला’ बड़ी बहादुरी से लड़ा, किन्तु हार गया। उसका प्रदेश हालाखण्डी नाम से प्रसिद्ध है।[2][3]

दलीपसिंह अहलावत लिखते हैं - सिंध में चन्दराम हाला नामक नरेश की परम्परा का राज्य 7वीं शताब्दी में मुहम्मद-बिन-कासिम ने समाप्त कर दिया। वहां सिंध को बलोचिस्तान से पृथक् करने वाला हाला पर्वत इसी हाला वंश के नाम पर है जो आजकल सोमगिरी कहलाता है। यहां पर इनके राज्य क्षेत्र का नाम हाला खण्डी था। काठियावाड़ में हाला नामक जिला इन्हीं हाला जाटों का स्मारक है। सिंध में हाला जाट मुस्लिम धर्मी हैं और राजस्थान, पंजाब तथा यू० पी० (बदायूं) में बसने वाले सभी हाला जाट हिन्दू हैं जो डीलडौल और गठन में आदर्श क्षत्रिय हैं।[4]

References


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