Machhar

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Map of Ancient Jat habitations

Machhar (माछर) Mathur (माथुर)[1] [2] [3][4] Machh (माछ) Mathar (माठर)[5] Matsya (मत्स्य)/Matsyar (मत्स्यर)[6] Michharwal (मिछारवाल)[7] is gotra of Jats found in Delhi, Haryana, Uttar Pradesh and Rajasthan. There is a village named Karala(कराळा) of this gotra people near Delhi. Machhar (माछर) Jats live in Uttar Pradesh. [8]

Origin

Ancient Indian Kingdoms in 600 BC

This gotra is based on place name or the ancient Matsya (मत्स्य) people. Machhar (माछर) gotra is its prakrat equivalent. [9] The identifications of Matsya with Machhar Jat clan finds support in Mahabharata which mentions Machella (माचेल्ल)/ Machchhila (मच्छिल्ल)[10], the great Charioteer king, named Virata, showing thereby that these people were located closely, near the Jaipur/ Mathura / Alwar region [11] Jats of this gotra prefer to use their surname as "Mathur".

Mention by Panini

Matsyika (मात्स्यिका) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [12]


Mathar (माठर), also Padura (पादूर), is name of a Country mentioned by Panini in Ashtadhyayi under Dhumadi (धूमादि) (4.2.127) group.[13]

In Mahabharata

Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 86 mentions that on the mountain called Varunasrotasa (वरुण सरॊतस) (III.86.7) is the sacred and auspicious wood of Mathara (माठर वन) (III.86.7)[14] abounding in fruits and roots, and containing a sacrificial stake.

History

V S Agarwal [15] writes that Panini takes Bhakti to denote loyalty of the citizen to the State either a kingdom or a republic. The Kashika mentions, as examples of this kind of Bhakti or loyalty, 1. Angaka, 2. Vangaka, 3. Sauhmaka, 4. Paundraka, 5. Madraka, 6. Vrijika. We may also consider as Sraughnaḥ, Māthuraḥ, one owing loyalty (bhakti) to the township of Srughna, Mathura, as indicative of the civic devotion of a citizen to his city.


Ram Swarup Joon[16] writes In the Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 48, while describing various Kings who attended a ceremony in the Durbar (court) of Maharaja Yudhisthira, seventeen names are mentioned which are today found as Jat gotras. These are Malhia, Mylaw, Sindhar, Gandhar, Mahity, Mahe, Savi, Bath, Dharan, Virk, Dard, Shaly, Matash, Kukar (Khokar) Kak, Takshak, Sand, Bahik (Bathi) Bije (Bijenia), Andhra, Sorashtra (Rathi) Mann, Ar, Sohat, Kukat, Othiwal (Othval).


Megasthenes has described this gotra as Mese (Matsya), along with Amatae (Antal), Bolingae (Balyan), Gallitalutae (Gahlot), Dimuri (Dahiya), Megari (Maukhari), Ordabae (Buria), towards the Indus come, in an order which is easy to follow. (See - Jat clans as described by Megasthenes)

Kaniska had a minister called Mathara.[17]


The Machella and Machhar have only the difference of suffix ‘al’ or ‘ ar’ A place called Machhari in Alwar-Jaipur area is supposed to be their traditional city. [18] Machhar (माछर) is also name of mosquito in Rajasthani language which are more abundant in such swampy areas.

According to Bhim Singh Dahiya[19] they have been mentioned in Mahabharata Bhisma Parva. Mahabharata mention them and locates them in the west. [20] Kanishka had a minister called Mathara. [21] Their name was Sanskritised as Matsya from Machha, macchi, machhali in Prakrit means fish. Machhari near Alwar, was named after them. [22] They are the Machiya of Darius. Markandeya Purana Mentions them as Mathara. [23]

मत्स्य जनपद: दलीप सिंह अहलावत

यह जनपद अति प्राचीनकाल से विद्यमान था। इस जनपद के उत्तर में दशार्ण, दक्षिण में पांचाल, नवराष्ट्र (नौवार), मल्ल (मालव) आदि और शाल्व, शूरसेनों से घिरा हुआ था। सुग्रीव वानरों को सीता जी की खोज के लिये दक्षिण दिशा के देशों में अन्य देशों के साथ मत्स्य देश में जाने का भी आदेश देता है (वा० रा० किष्कन्धाकाण्ड, 41वां सर्ग)। पाण्डवों की दिग्विजय में सहदेव ने दक्षिण दिशा में सबसे पहले शूरसेनियों को जीतकर फिर मत्स्यराज विराट को अपने अधीन कर लिया (महाभारत सभापर्व, 31वां अध्याय)। महाभारत विराट पर्व के लेख अनुसार


1. ठा० देशराज जाट इतिहास पृ० 702, इस मालवा नाम से पहले इस प्रदेश का नाम अवन्ति था।
  • . नोट - कोली व शाक्य जाट वंश हैं।


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-255


भरतपुर, अलवर, जयपुर की भूमि पर मत्स्य जनपद बसा हुआ था। इसकी राजधानी विराट या वैराट नगर थी, जो जयपुर से 40 मील उत्तर की ओर अभी भी स्थित है। यहां का नरेश महाभारत युद्ध के समय वृद्ध था। इसने युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में सुवर्णमालाओं से विभूषित 2000 मतवाले हाथी उपहार के रूप में दिये थे (महाभारत सभापर्व, 52वां अध्याय; श्लोक 26वां)। यह विराट नरेश वृद्ध होते हुए भी महाभारत युद्ध में पाण्डवों की ओर होकर लड़ा था (महाभारत भीष्मपर्व 52वां अध्याय)। यह विराट नरेश अत्यन्त शूरवीर योद्धा था। इसी के नाम पर महाभारत का एक अध्याय ‘विराट पर्व’ विख्यात है।

इस विराट नरेश की महारानी सुदेष्णा, कीचक की बहिन थी। इसी मत्स्यराज विराट के यहां अज्ञातवास के दिनों पांचों पाण्डव द्रौपदी सहित गुप्तवेश में आकर रहे थे। इसी नरेश की कन्या उत्तरा का विवाह अर्जुनपुत्र अभिमन्यु से हुआ था। इन्हीं दोनों का पुत्र परीक्षित हस्तिनापुर राज्य का उत्तराधिकारी बना था। राजा विराट का भाई शतानीक था। विराट के दो पुत्र उत्तर और श्वेत नामक थे। महाभारत युद्ध में मद्रराज शल्य ने उत्तर को और भीष्म ने श्वेत को मार था। बौद्धकाल के 16 महाजनपदों में से एक मत्स्य जनपद भी था। इस गणराज्य की ध्वजा का चिह्न मछली था।

15 अगस्त सन् 1947 ई० को भारतवर्ष स्वतन्त्र होने पर भारत सरकार ने राजपूताना की रियासतों में से अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली को मिलाकर ‘मत्स्य संघ’ बनाया और शेष रियासतों को मिलाकर ‘राजस्थान’ बनाया। जून 1949 ई० में मत्स्य संघ की चारों रियासतें भी राजस्थान में मिला दी गयीं।

मत्स्यवंश (माथुर) की सत्ता जाटों में पाई जाती है। भरतपुर राज्य की ओर से मत्स्यवंशज जाट धीरज माथुर एवं नत्था माथुर को दिल्ली के पास कराला, पंसाली, पूंठ खुर्द, किराड़ी, हस्तसार नामक पांच गांव का शासक बनाकर कचहरी करने के लिए नियत किया था। इस कचहरी के खण्डहर अभी तक कराला में पड़े हुए हैं। इस गांव से ही ककाना गांव (गोहाना के पास) जाकर बसा। इसके अतिरिक्त मत्स्य-मत्सर या माछर जाट बिजनौर के पुट्ठा और उमरपुर गांवों में निवास करते हैं। राजस्थान के जिला सीकर में खेतड़ी गांव मत्स्य या माछर गोत्र के जाटों का है।

माथुर: ठाकुर देसराज

ठाकुर देसराज लिखते हैं - यह शब्द देशवाची है। माथुर का अपभ्रंश माहुर और माहुरे हो गया है। जिनका निकास मथुरा से है वह माहुरे कहलाते हैं। सूर्यवंशी क्षत्रियों का वह जत्था जिसने मधु-कैटभ से मथुरा छीनी थी पीछे से मथुरा से चन्द्रवंशियों द्वारा हटा दिया गया था, वही माथुर कहलाया। ब्राह्मण, वैश्य और जाट तीनों वर्णों में माथुर अथवा माहुरे मौजूद हैं। यह लोग शत्रुहन की संतान के हैं, ऐसा माना जाता है।[24]

माछर/माच्छर/मत्स्य/माथूर गोत्र का इतिहास

भलेराम बेनीवाल [25] के अनुसार यह एक अति प्राचीन गोत्र है. रामायण काल में इसका उल्लेख मिलता है. सीता की खोज में सुग्रीव द्वारा वानर गोत्र के जाट को इस प्रदेश में भेजा गया था. यह प्रदेश उस समय पांचाल, नवराष्ट्र, मालव, शालव, शूरसेनों से घिरा हुआ था. महाभारत काल में पांडव विजय अभियान में सहदेव ने इस प्रदेश को जीता था. इसी मत्स्य प्रदेश के राजा वृद ने युधिष्ठिर को अनेकों उपहार भेंट किये थे. [26]. उस समय मत्स्य प्रदेश की राजधानी विराट नगर में थी, जो आज जयपुर से ४० मील की दूरी पर स्थित है. इसी वृद यौद्धा के नाम पर ’विराट पर्व’ ग्रन्थ विद्यमान है. पांडवों ने इसी प्रदेश में एक वर्ष का अज्ञातवास पूरा किया था. इस सम्राट का ध्वज चिन्ह मछली था.यहां के वासी माछर/माच्छर/मत्स्य/माथूर कहलाये. वर्तमान में यह क्षेत्र भरतपुर, अलवर, जयपुर जिलों में पड़ता है. ये लोग किन्हीं कारणों से दिल्ली की और चले गये. दिल्ली में माथूर वंशज चौधरी धीरज व चौधरी नथवा ने गांव कराला, पंसाली, पूठ खुर्द, किराड़ी, हस्तसार, मंजरी गांव बसाकर वहां के शासक बने. इनके प्रमाण आज भी कराला में देखे जा सकते हैं. यहीं से जाकर गोहाना के पास गांव ककाना बसाया. जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश में पुठा उमरपुर आबाद है.जिला सीकर राजस्थान में खेतड़ी (?) गांव मत्स्य/माथूर गोत्र के जाटों का है. इन्हीं को मार्कण्डेय पुराण में माठर लिखा गया है.

Distribution in Haryana

Villages in Sikar district

Khetri (?)[27]

Distribution in Haryana

Villages in Sonipat district

There is one village in Haryana having Mathur as main Gotra. This village's name is Kakana Bhadri. It's in Sonepat district near Khanpur Kalan. Historically Mathur in Kakana Bhadri came from Karala village in Delhi.

Distribution in Delhi

Mathur Jats are found in North Delhi.

Villages in Delhi

Mathur Jats are found in the villages: Hastsar, Karala, Kirari Suleman Nagar, Majri Delhi, Pansali, Pooth Khurd,

Distribution in Uttar Pradesh

Mathur is also found in Uttar Pradesh in India.

Villages in Moradabad district

Guaroo,

Village in Bijnor district

Puttha (पुट्ठा), Umarpur Bijnor (उमरपुर)

माछर/माच्छर/मत्स्य/माथूर गोत्र के सम्मानित लोग

Notable persons from this gotra

  • Mr. Sidharth Mathur ( of Village Majri ) is a Judge working with Delhi Judiciary at Delhi Courts since 2006. Selected in 2006 at the age of 27 years by securing 2nd Rank in the All India Exam. His father Sh. Rohtash Mathur was also a notable lawyer at Delhi and was serving as the Vice President of Tis Hazari Lawyers Association in 1988 when he expired at a Young Age. Native of Village Majri-Karala, Delhi, M: 9910690102
  • Mr. Satish Mathur - Govt. Service, Director Presidents' Secretariat, Delhi Govt, D-II/158, Kidwai Nagar, New Delhi, Ph: 011-26870401 (PP-335)
  • Mr. Raj Singh Mathur - Govt. Service DIG(ops) BSF, D-II/A-2733, Netaji Nagar, New Delhi, Ph: 011-24362644, 011-26885986, 9868393402 (PP-431)

References

  1. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. म-61
  2. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.56,s.n. 2027
  3. B S Dahiya:Jats the Ancient Rulers (A clan study), p.240, s.n.133
  4. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. म-13
  5. B S Dahiya:Jats the Ancient Rulers (A clan study), p.240, s.n.133
  6. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. म-13
  7. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.56,s.n. 2065
  8. Jat History Thakur Deshraj/Chapter VIII,s.n. 277,p-586
  9. Mahendra Singh Arya et al: Adhunik Jat Itihas, p. 274
  10. 2 महारथॊ मगध राड विश्रुतॊ यॊ बृहद्रथः| परत्यग्रहः कुशाम्बश च यम आहुर मणिवाहनम | मच छिल्लश च यदुश चैव राजन्यश चापराजितः || (I.57.29)
  11. Sabha Parva: बाह्लिकाश चापरे शूरा राजानः सर्व एव ते । विराटः सह पुत्रैश च माचेल्लश च महारदः । (MBT:II.31.13)
  12. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.161
  13. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.509
  14. माठरस्य वनं पुण्यं बहुमूलफलं शिवम, यूपश च भरतश्रेष्ठ वरुण सरॊतसे गिरौ (III.86.7)
  15. V S Agarwal, India as Known to Panini,p.430-431
  16. Ram Swarup Joon: History of the Jats/Chapter II,p. 32-33
  17. The Age of Imperial Unity (AIU), p. 147
  18. Bhim Singh Dahiya, Jats the Ancient Rulers ( A clan study), p. 287
  19. Jats the Ancient Rulers (A clan study)/Jat Clan in India,p. 263-64
  20. MBT, Sabha , XXXI, 1195, Vana Parva, LI, 1991, Santi Parva, LXI, 2430
  21. The Age of Imperial Unity, p. 147
  22. ASI, Vol. VI, p. 84 ff.
  23. 128-LVII, 37
  24. जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठ-563
  25. भलेराम बेनीवाल:जाट यौद्धाओं का इतिहास, पृ. ७११-७१२
  26. महाभारत सभा पर्व, भीष्म पर्व
  27. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III,p. 256

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