Pulinda

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.)

Pulinda (पुलिन्द) was a country mentioned in Mahabharata. It has been identified with modern Bundelkhand.

Variants

Genealogy

Lambodara ancestry

'A study of the Bhagavata Purana; or, Esoteric Hinduism'[1] by Purnendu Narayana Sinha, pp 226-227 mentions that (10) ten kings of the Sunga dynasty shall reign for 112 years. These are:

Pushyamitra → Agnimitra → Sujyestha → (Vasumitra + Bhadraka + Pulinda):

Pulinda → Utghosha → Vajramitra → Bhagavata → Devabhuti


Vasudeva, the minister of Devabhuti, shall kill his master and become himself the king.

Vasudeva
Bhumitra
Narayana
Susarman

These four kings shall be called Kanvas. They shall reign for 345 years. Susarman shall be killed by his servant Balin, a King of the Andhra clan, who shall himself usurp the throne. Balin shall be succeeded by his brother Krishna.

History

Pulindaka (122-119 BC) was a ruler of Magadha in the Shunga Dynasty (185-73 BC) with genealogy as under:

पुलिंद

विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है .....पुलिंद (AS, p.567): महाभारत, वनपर्व के अंतर्गत पुलिंदों के देश का वर्णन पांडवों की गंधमादन पर्वत की यात्रा के प्रसंग में है। जान पड़ता है कि यह देश कैलाश पर्वत या तिब्बत के ऊँचे पहाड़ों की उपत्यकाओं में बसा था। इस प्रसंग में तंगणों और किरातों का भी उल्लेख है। पुलिंद देश के बर्फीले पहाड़ों का वर्णन भी इस प्रसंग में है.

मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेख 13 में पारिंदों का उल्लेख है, जो कुछ विद्वानों के मत में पुलिंदों का ही नाम है। किंतु डॉक्टर भंडारकर के मत में पारिंद वरेंद्र (बंगाल) के निवासी थे। पुराणों में पुलिंदों का विंध्याचल में निवास करने वाली अन्य जातियों के साथ वर्णन है- 'पुलिंदा विंध्यपुषिका वैदर्भा दंडकै: सह'। मत्स्य पुराण 114, 48. 'पुलिंदा विंध्यमूलीका वैदर्भा दंडकै: सह'। वायुपुराण 55, 126

[p.568]: महाराज हस्तिन के नवग्राम से प्राप्त 517 ई. के दानपत्र अभिलेख में पुलिंद राष्ट्र का उल्लेख है, जिसकी स्थिति डभाल, मध्य प्रदेश का उत्तरी भाग, में बतायी गयी है। अशोक के समय में पुलिंद नगर, जो पुलिंद देश की राजधानी थी, रूपनाथ के निकट स्थित होगा, जहाँ अशोक का एक लघु अभिलेख प्राप्त हुआ है। (रायचौधरी- पोलिटिकल हिस्ट्री ऑफ इंडिया, पृष्ठ 258) उपर्युक्त विवेचन से जान पड़ता है कि 'पुलिंद' नामक जाति मूलत: उत्तर तिब्बत की रहने वाली थी और कालांतर में भारत में आकर विंध्य की घाटियों में बस गयी थी। यह भी संभव है कि प्राचीन काल में भारतीयों ने दो भिन्न जातियों को उनके सामान्य गुणों के कारण पुलिंद नाम से अभिहित किया हो। (दे. पुलिंद नगर)

पुलिंदनगर

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है .....पुलिंद नगर (AS, p.568) का उल्लेख महाभारत, सभापर्व में हुआ है-- 'ततो दक्षिणमागम्य पुलिंदनगरं महत्‌, सुकुमारं वशे चक्रे सुमित्रं चा नराधिपम्‌। महाभारत, सभापर्व 29,10. जहाँ बताया गया है कि पाण्डव भीमसेन ने अपनी दिग्विजय यात्रा के समय पुलिंद नगर पर अधिकार कर किया था। उपर्युक्त प्रसंग से पुलिंद नगर की स्थिति विंध्यप्रदेश की उपत्यकाओं में जान पड़ती है। हेमचन्द्र रायचौधरी के अनुसार यह प्रदेश 'रूपनाथ' के निकट स्थित रहा होगा, जहाँ अशोक का अभिलेख प्राप्त हुआ है। (दे. पुलिंद)

इतिहास

बुन्देली क्षेत्र पर चेदि, मौर्य, शुंग, वाकाटाक, भारशिव, नाग, गुप्त, हूण, हर्षवर्धन, कलचुरी, चन्देल, अफ़ग़ान, मुग़ल, गौड़ और बुन्देलों का शासन रहा है। सम्राट अशोक के राज्य काल में इस क्षेत्र को 'पुलिन्द देश' के नाम से सम्बोधित किया जाता था। महाकवि कालिदास की कृति 'रघुवंश' में पुलिंद जाति का उल्लेख आया है। वह यहाँ की सत्ताधारी जाति थी। वेद, पुराण, अनेक शिलालेखों और ताम्रपत्रों में पुलिन्द नरेशों और पुलिन्द देश की स्थिति के संकेत मिलते हैं। कुछ विद्वानों का मत हैं कि यही ‘पुलिन्द’ शब्द आगे चलकर ‘बोलिन्द’ और कालान्तर में ‘बुन्देल’ हो गया। ब्राह्मी लिपि के एक भेद को 'बोलिन्दी' कहते हैं। इस क्षेत्र के अनेक प्राचीन शिलालेख बोलिन्दी में लिपिबद्ध हैं।[4]

ब्रिटिश विश्वकोश[5] में बुन्देलखंड का ‘जेजाक भुक्ति’ के रूप में उल्लेख किया गया है। जॉर्ज ग्रियर्सन ने 'गजेटियर ऑफ़ इंडिया' के आधार पर लिखा है कि- "बुन्देलखंड वह भू-भाग है, जो उत्तर में यमुना, उत्तर-पश्चिम में चम्बल, दक्षिण में मध्य प्रांत के जबलपुर और सागर संभाग तथा दक्षिण और पूर्व में रीवा अथवा बघेलखंड के मध्य में स्थित हैं और जिसके दक्षिण तथा पूर्व में मिर्जापुर की पहाडि़या हैं। [6]

खोतन नदी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[7] ने लेख किया है ...खोतन नदी (AS, p.259) मध्य एशिया की नदी है। इसके तटवर्ती क्षेत्र को 'खोतन प्रदेश' कहा गया है। खोतन नदी का महाभारत में शैलोदा नाम से वर्णन मिलता है। महाभारत, सभापर्व 52, 2 में शैलोदा तथा सभापर्व 52, 3 में इस नदी के तट पर स्थित खस, पुलिंद और तंगण आदि जातियों का उल्लेख है।

In Mahabharata

Pulindanagara (पुलिन्दनगर) is mentioned in Mahabharata (II.26.10)

Pulinda (पुलिन्द) is mentioned in Mahabharata (II.28.10)/(2-32-17a)

Pulinda (पुलिन्द) is mentioned in Mahabharata (V.158.20), (VI.10.60),(VI.83.7),(VIII.51.19),

Pulindaka (पुलिन्दक) is mentioned in Mahabharata (VI.10.39),


Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 26 mentions the countries Bhimasena subjugated that lay to the East. Pulindanagara (पुलिन्दनगर) is mentioned in Mahabharata (II.26.10).[8]....Then that prince of the Kuru race, endued with great prowess going into the country of Pulinda in the south, brought Sukumara and the king Sumitra under his sway.


Pulinda (पुलिन्द) is mentioned in Mahabharata (II.28.10)/(2-32-17a).[9]....After Avanti, the hero (Sahdeva) marched towards the town of Bhojakata and there, a fierce encounter took place between him and the king of that city for two whole days. But the son of Madri (Sahdeva), vanquishing the invincible Bhismaka, then defeated in battle the king of Kosala and the ruler of the territories lying on the banks of the Venwa, as also the Kantarakas and the kings of the eastern Kosalas. The hero (Sahdeva) then defeating both the Natakeyas and the Herambakas in battle, and subjugating the country of Marudha, reduced Ramyagrama by sheer strength. And the son of Pandu then vanquished the mighty monarchs of the Nachinas and the Arbukas and the various forest king of that part of the country. Endued with great strength the hero then reduced to subjection king Atavika. And defeating in battle the Pulindas, the hero then marched southward. And the younger brother of Nakula then fought for one whole day with the king of Pandya.


Udyoga Parva/Mahabharata Book V Chapter 158 mentions Pulinda (पुलिन्द) in (verse (V.158.20). [10]....Uluka, Duryodhana's messenger presented himself before the Pandavas. Mentions - swarming with the kings of the East, West, South, and North, with Kambojas, Sakas, Khasas, Shalwas, Matsyas, Kurus of the middle country, Mlechchhas, Pulindas, Dravidas, Andhras, and Kanchis, indeed, with many nations, all addressed for battle.


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Pulinda (पुलिन्द) is listed in the other Provinces in south in verse (VI.10.60).[11]


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 83 describes the array of the Kauravas army against the Pandavas in Mahabharata War. Parada (पारद)/(परद) is mentioned in Mahabharata (VI.83.7).[12]....Bhishma, the son of Santanu, then, O king, proceeded in the van of the whole army, supported by the Malavas, and the inhabitants of the southern countries, and the Avantis. Next to him was the valiant son of Bharadwaja, accompanied by the Pulindas, the Paradas, and the Kshudraka-Malavas.


Karna Parva/Mahabharata Book VIII Chapter 51 describes terrible massacre and warriors who were killed on seventeenth day of War. Pulinda (पुलिन्द) is mentioned in (VIII.51.19).[13]....the Tusharas, the Yavanas, the Khasas, the Darvabhisaras, the Daradas, the Sakas, the Kamathas, the Ramathas, the Tanganas the Andhrakas, the Pulindas, the Kiratas of fierce prowess, the Mlecchas, the Mountaineers, and the races hailing from the sea-side,


Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Pulindaka (पुलिन्दक) Province is mentioned along with Sindhu in verse (VI.10.39). [14].... the Chedi-Vatsas, the Karushas, the Bhojas, the Sindhu-Pulindakas, the Uttamojas, the Dasharnas, the Mekalas, the Utkalas;

References

  1. A study of the Bhagavata Purana; or, Esoteric Hinduism by Purnendu Narayana Sinha, pp 226-227
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.567
  3. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.568
  4. भारतकोश-जेजाकभुक्ति
  5. एनसाइक्लापीडिया ब्रिटानिका
  6. भारतकोश-जेजाकभुक्ति
  7. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.259
  8. ततॊ दक्षिणम आगम्य पुलिन्द नगरं महत्, सुकुमारं वशे चक्रे सुमित्रं च नराधिपम् (II.26.10)
  9. पुलिन्दांश्च रणे जित्वा ययौ दक्षिणतः पुरः। 2-32-17a युयुधे पाण्ड्यराजेन दिवसं नकुलानुजः।। 2-32-17b
  10. पराच्यैः परतीच्यैर अद थाक्षिणात्यैर; उदीच्यकाम्बॊजशकैः खशैश च,शाल्वैः समत्स्यैः कुरुमध्यदेशैर मलेच्छैः पुलिन्थैर थरविडान्ध्र काञ्च्यैः
  11. तर्यङ्गाः केकरकाः परॊष्ठाः परसंचरकास तदा, तदैव विन्ध्यपुलकाः पुलिन्दाः कल्कलैः सह (VI.10.60)
  12. ततॊ ऽनन्तरम एवासीद भारद्वाजः प्रतापवान, पुलिन्दै: पारदैश चैव तदा क्षुद्रकमालवैः (VI.83.7)
  13. अन्ध्रकाश च पुलिन्थाश च किराताश चॊग्रविक्रमाः, मलेच्छाश च पार्वतीयाश च सागरानूपवासिनः (VIII.51.19)
  14. चेदिवत्साः करूषाश च भॊजाः सिन्धुपुलिन्थकाः, उत्तमौजा दशार्णाश च मेकलाश चॊत्कलैः सह (VI.10.39)