Chedi

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Ancient Indian Kingdoms in 600 BC

Chedi (चेदि) was an ancient Indian kingdom which fell roughly in the Bundelkhand division of Madhya Pradesh regions to the south of river Yamuna along the river Ken. Its capital city was called Suktimati in Sanskrit and Sotthivati-nagara in Pali.[1] In Pali-language Buddhist texts, it is listed as one of the sixteen mahajanapadas ("great realms" of northern and central India).[2]

Variants

Jat clan Chedi

Chedi (चेदि)/(चेदी) is gotra of Jats. [3] [4] This gotra is said to have started after people of Chedi rulers in Bundelkhand on the banks of Ken River. [5]

History

Google Scholar Reshma Rai[6] shares that the Chedi territory corresponded roughly to the eastern part of modern Bundelkhand. Pargiter places Chedis along the south bank of the Yamuna from the Chambal on the northwest to as far as Karvi on the south-east.

Its limits southwards may have been the Plateau of Malwa and the hills of Bundelkhand. Its capital was known as Sotthivati- nagar or Shuktimati or Shukti-Sahvaya. Other important towns were Sahajati and Tripuri.

The Chetiya Jataka traces the descent of Chedi kings from Mahasammata and Mandhata. Upachara, a king of the line, had five sons who are said to have founded the cities of Hatthipura (Hastinapura), Assapura (in Anga), Sinhapura (Lala from where Vijaya went to Ceylon), Uttarapanchala (Ahichchhatra) and Daddarapura (in the Himalayan region). Shishupala, the legendary enemy of Krishna, was a Chedi king. However, except these epic lengends nothing authentic is known about the Chedis.

चेदि

विजयेन्द्र कुमार माथुर[7] ने लेख किया है ...चेदि (AS, p.342) प्राचीनकाल में बुंदेलखंड तथा पार्श्ववर्ती प्रदेश का नाम था. ऋग्वेद में चेदि नरेश कशुचैद्य का उल्लेख है ।[8]

रैपसन के अनुसार कशु या कसु महाभारत में वर्णित चेदिराज वसु है [9] और इन्द्र के कहने से उपरिचर राजा वसु ने रमणीय चेदि देश का राज्य स्वीकार किया था।

महाभारत में चेदि देश की अन्य कई देशों के साथ, कुरु के परिवर्ती देशों में गणना की गई है। [10] कर्णपर्व में चेदि देश के निवासियों की प्रशंसा की गई है । [11] महाभारत के समय [ सभा0 पर्व / 29,11-12] कृष्ण का प्रतिद्वंद्वी शिशुपाल चेदि का शासक था। इसकी राजधानी शुक्तिमती बताई गई है। चेतिय जातक (कावेल सं 422) में चेदि की राजधानी सोत्थीवतीनगर कही गई है जो श्री नं0 ला. डे के मत में शुक्तिमती ही है[12] इस जातक में चेदिनरेश उपचर के पांच पुत्रों द्वारा हत्थिपुर, अस्सपुर, सीहपुर, उत्तर पांचाल और दद्दरपुर नामक नगरों के बसाए जाने का उल्लेख है। महाभारत [आशवमेधिक0 / 83,2 ] में शुक्तिमती को शुक्तिसाह्वय भी कहा गया है।

अंगुत्तरनिकाय में सहजाति नामक नगर की स्थिति चेदि प्रदेश में मानी गई है।[13] सहजाति इलाहाबाद से दस मील पर स्थित भीटा है। चेतियजातक में चेदिनरेश की नामावली है जिनमें से अंतिम उपचर या अपचर, महाभारत आदि0 पर्व 63 में वर्णित वसु जान पड़ता है।

वेदव्य जातक[14] में चेति या चेदि से काशी जाने वाली सड़क पर दस्युओं का उल्लेख है।

विष्णु पुराण में चेदिराज शिशुपाल का उल्लेख है।[15]

मिलिंदपन्हो[16] में चेति या चेदि का चेतनरेशों से संबंध सूचित होता है। सम्भवतः कलिंगराज खारवेल इसी वंश का राजा था। मध्ययुग में चेदि प्रदेश की दक्षिणी सीमा अधिक विस्तृत होकर मेकलसुता या नर्मदा तक जा पहुँची थी जैसा कि कर्पूरमंजरी से सूचित होता [17] कि नदियों में नर्मदा, राजाओं में रणविग्रह और कवियों में सुरानन्द चेदिमंडल के भूषण हैं।

चेदि या चेति महाजनपद

पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक था। यह शुक्तिमती नदी के पास का देश था, जिसमें बुंदेलखंड का दक्षिणी भाग और जबलपुर का उत्तरी भाग सम्मिलित था।[18] बौद्ध ग्रंथों में जिन सोलह महाजनपदों का उल्लेख है उनमें यह भी था। कलिचुरि वंश ने भी यहाँ राज्य किया। किसी समय शिशुपाल यहाँ का प्रसिद्ध राजा था। उसका विवाह रुक्मिणी से होने वाला था कि श्रीकृष्ण ने रूक्मणी का हरण कर दिया इसके बाद ही जब युधिष्ठर के राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण को पहला स्थान दिया तो शिशुपाल ने उनकी घोर निंदा की। इस पर श्रीकृष्ण ने उसका वध कर डाला। मध्य प्रदेश का ग्वालियर क्षेत्र में वर्तमान चंदेरी क़स्बा ही प्राचीन काल के चेदि राज्य की राजधानी बताया जाता है।[19]

जाट इतिहास

चेदि जनपद बुन्देलखण्ड में था। चेदि जाट गोत्र भी है। उस समय वहां पर चन्द्रवंशी शिशुपाल राज्य करता था। ययातिपुत्र यदु के पुत्र करोक्षत्री की परम्परा में शूरसेन राजा हुआ। उसकी पुत्री क्षत्रश्रवा का विवाह चेदिराज दमघोष से हुआ जिनसे शिशुपाल हुआ। नकुल ने चेदि नरेश की पुत्री करेणुमती से विवाह किया। जिनसे पुत्र निरमित्र हुआ। (देखो चन्द्रवंशीय वंशावली)। श्रीकृष्ण जी ने शिशुपाल को मार दिया था। उसका पुत्र चेदिराज धृष्टकेतु पाण्डवों की तरफ होकर महाभारत युद्ध में लड़ा था।[20]


चेदि राज्य - शुक्तिमती (केन) नदी के तट पर यमुना नदी के समीपवर्ती आज के बुन्देलखण्ड पर चेदि राज्य था। चेदि जनपद बड़ा शक्तिशाली था। चेदि जाट गोत्र भी है। महाभारत में राजा शिशुपाल यहीं का शासक था। महाराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के अवसर पर शिशुपाल अपने अपराधों के कारण श्रीकृष्ण जी द्वारा मार दिया गया था। महाभारत युद्ध में शिशुपाल का महाबली पुत्र चेदिराज धृष्टकेतु अपनी एक अक्षौहिणी सेना के साथ पाण्डवों की ओर से होकर लड़ा था। बौद्धकाल तक इस चेदि वंश का शासन जारी था। [21]

In Mahabharata

Chedi (चेदि) is mentioned in Mahabharata (I.63.2), (II.26.10),(IV.1.9),(V.72.16),(VI.10.39),(VI.52.13), (VI.112.23), (VI.112.73),(VIII.30.61),(VIII.51.6),

Distribution

External links

References

  1. Raychaudhuri, Hem Chandra (1923), Political history of ancient India, from the accession of Parikshit to the extinction of the Gupta dynasty, p. 66
  2. Raychaudhuri, Hem Chandra (1923), Political history of ancient India, from the accession of Parikshit to the extinction of the Gupta dynasty, p. 67
  3. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. 18
  4. Dr Pema Ram:‎Rajasthan Ke Jaton Ka Itihas, 2010, p.300
  5. Mahendra Singh Arya et al.: Adhunik Jat Itihas, Agra 1998,p.242
  6. Brief Notes on the Chedi territory
  7. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.342-43
  8. 'तामे अश्विना सनिनां विद्यातं नवानाम्। यथा चिज्जेद्य: कशु: शतुमुष्ट्रानांददत्सहस्त्रा दशगोनाम्। यो में हिरण्य सन्दृशो दशराज्ञो अमंहत। अहस्पदाच्चैद्यस्य कृष्टयश्चर्मम्ना अभितो जना:। माकिरेना पथागाद्येनेमें यन्ति चेदय:। अन्योनेत्सूरिरोहिते भूरिदावत्तरोजन:' ऋग्वेद / 8,5,37-39 ।
  9. 'स चेदिविषयं रम्यं वसु: पौरवनन्दन: इन्द्रोपदेशाज्जग्राह रमणीयं महीपति:' महाभारत आदि पर्व 63,2
  10. 'सन्ति रम्या जनपदा बह्लन्ना: परित: कुरुन् पांचालाश्चेदिमत्स्याश्च शूरसेना: पटच्चरा:' महाभारत विराट0 पर्व / 1,12
  11. 'कौरवा: सहपांचाला: शाल्वा: मत्स्या: सनैमिषा: चैद्यश्च महाभागा धर्म जानन्तिशाश्वत्म' कर्णपर्व / 45,14-16
  12. ज्याग्रेफिकल डिक्शनरी / पृ0 7
  13. आयस्मा महाचुंडो चेतिसुविहरति सहजातियम्'। अंगुत्तरनिकाय 3,355
  14. वेदव्य जातक ( सं0 48 )
  15. पुनश्चेदिराजस्य दमघोषस्यात्मज शिशिशुपालनामाभवत्'। विष्णुपुराण / 4,14,50
  16. राइसडेवीज-पृ0 287
  17. 'नदीनां मेकलसुतान्नृपाणां रणविग्रह:, कवीनांच सुरानंदश्चेदिमंडलमंडनम्' कर्पूरमंजरी स्टेनकोनो पृ0 182
  18. पौराणिक कोश |लेखक: राणा प्रसाद शर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 557, परिशिष्ट 'क' |
  19. भारतकोश-चेदि-महाजनपद
  20. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III, Page 290
  21. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter V (Page 466)

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