Navarashtra

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Navarashtra (नवराष्ट्र) is a kingdom mentioned in Mahabharata (II.28.6),(IV.1.9).

Variants

History

Nauhwar Jat clan is said to have originated from place named Noha (नोह)in Mathura district. Nava (नव), son of Chandravanshi samrat Ushinara and his wife Nava (नवा), established Navarashtra in the present Mathura Janapada which is known as Noha. [1]


Tej Ram Sharma[2] describes that....We get three different versions about the origin of the Yaudheyas : third version is ....

(iii) The Harivamsa 594 and the Vayu Purana 595 state that King Usinara of the Puru dynasty had five queens named Nrga or Mrga, Krmi, Nava, Darva and Drsadvati who gave birth to five sons named Nrga, (or Mrga),'Krmi, Nava, Suvrata and Sibi (or Sivi) respectively. Sibi was the lord of the Sibi people or of the city of Sivapura, while Nrga (or Mrga) was the ruler of the Yaudheyas or of Yaudheyapura. The other three sons of Usinara, viz., Nava, Krmi and Suvrata, were the lords respectively of Navarastra, Krmilapuri and Ambasthapuri. 596 According to Pargiter, King Usinara established the Yaudheyas, Ambasthas, Navarastra,and the city of Krmila, all on the eastern border of the Punjab; while his famous son Sivi Ausinara originated the Sivis or Sibis in Sivapura. 597


594. I. 31.24-28: takes the reading Nrga.

595. 99.18-22: takes the variant reading Mrga.

596. D.C. Sircar, Oz. pp. 252-53.

597. Pargiter, M. P. 264.

In Mahabharata

Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 28 mentions Sahadeva's march towards south: kings and tribes defeated. It includes Navarashtra in verse (II.28.6). ...And subjugating next the country called Navarashtra, the hero marched against Kuntibhoja, who with great willingness accepted the sway of the conquering hero. And marching thence to the banks of the Charmanwati, the Kuru warrior met the son of king Jamvaka...

नवराष्ट्रं विनिर्जित्य कुन्तिभॊजम उपाथ्रवत
परीतिपूर्वं च तस्यासौ परतिजग्राह शासनम Mahabharata (II.28.6)

Virata Parva, Mahabharata/ Book IV Chapter 1 mentions countries surrounding the kingdom of the Kurus, suggested to spend the thirteenth year, which are beautiful and abounding in corn, such as Panchala, Chedi, Matsya, Surasena, Pattachchara, Dasarna, Navarashtra, Malla, Shalva, Yugandhara, Saurashtra, Avanti, and the spacious Kuntirashtra. (Mahabharata:IV.1.9)

सन्ति रम्या जनपथा बह्व अन्नाः परितः कुरून
पाञ्चालाश चेथिमत्स्याश च शूरसेनाः पटच्चराः
दशार्णा नवराष्ट्रं च मल्लाः शाल्व युगंधराः (Mahabharata:IV.1.9)

नरराष्ट्र

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है ...नरराष्ट्र (AS, p.478): महाभारत, सभापर्व के अनुसार पांडव सहदेव ने अपनी दिग्विजय यात्रा में नरेसर को जीता था- 'नरराष्ट्रं च निर्जित्य कुंतिभोजमुपाद्रवत्, प्रीतिपूर्व च तरयासो प्रतिजग्राह शासनम्' (महाभारत, सभापर्व, 31, 6.) अर्थात् "सहदेव ने अपनी दिग्विजय यात्रा के प्रसंग में नरराष्ट्र को जीतकर कुंतिभोज पर चढ़ाई की।" इससे नरराष्ट्र की स्थिति कुंतिभोज (=कोटवार, जिला ग्वालियर, मध्य प्रदेश) के निकट प्रमाणित होती है. हमारे मत में ग्वालियर के दुर्ग से प्राय: 10 मील उत्तर-पूर्व वन-प्रांत [p.479]: के अंतर्गत बसे हुए नरेसर नामक ग्राम का अभिज्ञान नरराष्ट्र से किया जा सकता है। नरेसर को नालेश्वर का अपभ्रंश कहा जाता है. नरराष्ट्र और नरेसर नामों में ध्वनिसाम्य तो है ही, इसके अतिरिक्त नरेसर बहुत प्राचीन भी है, क्योंकि यहाँ से अनेक पूर्व मध्यकालीन मंदिरों तथा मूर्तियों के ध्वंसावशेष भी मिले हैं। नरेसर के खंडहर विस्तीर्ण भू-भाग में फैले हुए हैं, और संभव है कि यहाँ से उत्खनन में और अधिक प्राचीन अवशेष प्राप्त हों।

नरराष्ट्र, नलराष्ट्र का भी रूपांतरण हो सकता है. उस दशा में इसका संबंध राजा नल से जोड़ना संभव होगा. क्योंकि राजा नल की कथा की घटनास्थली नरवर (प्राचीन नलपुर) निकट ही स्थित है. महाभारत की कई प्रतियों में नरराष्ट्र को नवराष्ट्र लिखा है जो अशुद्ध जान पड़ता है.

नवराष्ट्र का इतिहास

दलीप सिंह अहलावत[4] लिखते हैं : ‘मथुरा मेमायर्स’ के लेखक ग्राउस साहब ने नव लोगों का वर्णन इस प्रकार किया है - चन्द्रवंशी सम्राट् ययाति के पुत्र अनु के वंश में अनु से नौवीं पीढ़ी में राजा उशीनर हुए। उनकी पांच रानियां थीं - 1. नृगा 2. कृमि 3. नवा 4. दर्व 5. दृषद्वती। इनके एक-एक पुत्र हुआ। उनके नाम नृग, कृमि, नव, सुव्रत और शिवि थे (देखो वंशावली अनु का वंश)। नव ने नवराष्ट्र पर राज किया। कृमि ने कुमिल्लापुरी और शिवि ने शिवव्यास पर राज किया और नृग ने यौधेयों पर राज किया । (नृग के पुत्र यौधेय से यौधेय-संघ बना जो जाट गोत्र है)।

पाणिनि ने उशीनरों को पंजाब के पास रहते थे, लिखा है। ऐतरेय ब्राह्मण ने उन्हें कुरु, पांचालों में शामिल किया है। उशीनर की पांचवीं रानी दृषद्वती के नाम पर दृषद्वती नदी का नाम हुआ, जो महाभारत में कुरुक्षेत्र की दक्षिणी सीमा बताई गई है। आजकल यह नदी लुप्त है। नव ने अपने नाम से एक जनपद नवराष्ट्र के नाम से स्थापित किया और नव की वंशपरम्परा का नाम ‘नव’ प्रचलित हुआ। यह जाट गोत्र है जो राजा नव के नाम से चला।

नवराष्ट्र, जिसका राजा नव था, वह गुड़गांवमथुरा के समीप रहा होगा और उसकी राजधानी यही रही होगी जो अब नोह (नूह) कहलाती है। (मथुरा मेमायर्स पृ० 320-322)। इस ‘नोह’ को ‘नूह’ भी कहते हैं। महाभारतकाल के पश्चात् पश्चिमोत्तर भारत के खोतानप्रदेश पर भी नव लोगों ने शासन स्थिर किया था। वहां पर भी अभी तक नूह झील है जिसे नव लोगों ने ही खुदवाया था। सन् ईस्वी के प्रारम्भिक काल में ये लोग अपनी पितृ-भूमि वापिस आ गये और जलेसर के पास बस्तियां आबाद कीं। वहां से उठकर वर्तमान ‘नोह’ में एक झील खोदी और वहां पर दुर्ग निर्माण किया। स्वतंत्रता-युद्ध सन् 1857 तक किसी न किसी रूप में ये वहां के शासक रहे हैं। मि० ग्राउस साहब के लेखानुसार 17वीं शताब्दी में भी आगरा-मथुरा के अधिक भाग पर नव क्षत्रियों का ही शासन था। बीच में ये नव, नौवार-नौहवार नाम से भी प्रसिद्ध हुए। बुलन्दशहर में भट्टापारसोल एक गांव, गुड़गांव जिले में दो गांव, आगरा में 98 गांव और गुड़गांव जिले की नूह तहसील के समीप 98 गांव हैं जो इस वंश की विशाल जनसंख्या का परिचय देते हैं। शिवि लोगों का प्रजातंत्र काफी प्रसिद्ध था।

References